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काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं भगवान का रंग गहरा नीला काले जैसा सलोना

काले रंग की गाड़ियों की दुर्घटनाएं अधिक होती हैं। एक नयी रिपोर्ट के अनुसार काले या गहरे रंग उजले या सफेद रंग की तुलना में कम दिखाई देते हैं इसलिये काली और गहरे रंग वाली गाड़ियों की दुर्घटनाएं अधिक होती हैं। रौषनी कम हो और धंुध हो तो काला रंग कम दिखता है और सफेद अधिक।

 

इसीलिये आमतौर पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्कूल बस और एम्बुलेंस जैसी गाड़ियों में सफेद, पीला और लाल जैसे उजले रंग लगाए जाते हैं। सफेद गाड़ियो की बिक्री सबसे अधिक होती है। सर्वे के अनुसार आधी गाड़ियां सफेद बिकती हैं और आधे षेष रंग सब मिलाकर। हालांकि सफेद पर दाग जल्दी चढ़़ता है, गाड़ी जल्दी गंदी दिखने लगती है फिर भी सफेद की मांग ज्यादा है।

काला विरोध और षोक के लिये

आमतौर पर काला रंग विरोध, दुख या डर का प्रतीक होता है। किसी नेता को विरोध करना हो तो उसे काले झण्डे दिखाने का रिवाज है। किसी बात का विरोध हो तो कर्मचारी काली पट्टी लगाकर काम करते हैं। यहां तक कि कभी आषंका होने पर पुलिस अपने नेता को विरोध से बचाने के लिये काली साड़ी, काली ओढ़नी या काली षर्ट और काला रूमाल तक जप्त कर लेती है।
इसके अलावा फिल्मों मे यही दिखाया जाता है कि जो कैरेक्टर दमदार गुण्डे टाईप का होता है अच्छे या बुरे की बात नहीं हो रही, केवल बाहुबल की बात हो रही है तो जो कैरेक्टर बाहुबलि जैसा होता है उसके पास सारी गाड़ियां ब्लैक होती हैं। वैसे जीवन में ब्लैक कलर को अच्छा नहीं माना जाता।

गहरा नीला काले जैसा
सर्वव्यापी भगवान का रंग


विद्वान कहते हैं कि राहु की दषा आ जाएगी तो आपको काला रंग पसंद आने लगेगा। डार्क ब्लू से भी प्यार हो जाएगा। नीले और काले कपड़े पहनने से पर्सनालिटी खिलती है पर राहु एक्टिव हो जाता है चाहे अच्छा हो या बुरा। राहु हमें पीड़ा पहुंचाकर अध्यात्म की ओर मोड़ देता है। क्योंकि राहु का रंग नीला है। भगवान के सारे अवतारों का रंग नीला होता है। साफ आसमान भी नीला होता है और विषाल समुद्र भी। ये रंग भगवान की विषालता और सर्वव्यापी होने को संकेत देता है

आमतौर पर काले दिल वाले लोग पर बड़े उजले और मददगार नजर आते हैं। लोग उन्हें पहचान ही नहीं पाते क्योंकि वे बातचीत में मीठे होते हैं, काम निकालने में चतुर, धोखा देने में कोई संकोच नहीं, ‘मतलब’ निकालकर टाटा। यहां तक कि अपने मतलब के लिये बेषर्मी से किसी को भी, अपने अपनों को भी धोखा दे देते हैं, नुकसान पहंुचाने में गुरेज नहीं करते, जबकि जो लोग दिल के काले नहीं होते वे चाहे जिस भी कलर के हों, साफ बोलते हैंं, कुछ छिपाते नहीं और सही सलाह देते हैं। आमतौर पर अकेला नहीं छोड़ते, साथ निभाते हैं। पर इसलिये समाज में अनफिट हो जाते हैं।

काला तिल षरीर पर
काला तिल खाने-पूजने का भी
बात करंे काले तिल की तो काला तिल जो चेेहरे पर होता है हमेषा नजर से बचाता है। बच्चों को लगा दो नजर नहीं लगती। जानकारों के अनुसार षरीर मे अलग-अलग जगह काला तिल होना अलग-अलग प्रभाव दर्षाता है। जो होता है वो तिल होने के कारण नहीं होता। तिल तो केवल ऐसा हो सकने की संभावना का एक संकेत मात्र होता है।
एक काला तिल खाने का भी होता है। काले तिल के लड्डू और पापड़ी बनते हैं। ये पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र में भी काम आता है। घर या दुकान के सामने या अंदर छिड़कने से नजर से बचाव होता है।

कितना भी तिल-तेल चढ़ाओ
पाप करोगे तो भुगतोगे

 

धार्मिक विद्वानों से सुना है कि भगवान षनि पर सरसों तेल के साथ काले तिल चढ़ाए जाने से खराब षनि अच्छा या नॉर्मल होता है। वैसे ये एक भ्रम है क्योंकि कहा जाता है कि षनिदेव कर्मों के अनुसार फल देते हैं उन्हें न्याय का देवता कहा जाता है। अपने यहां ‘इंसाफ की देवी’ आम बोलचाल में बोला जाता है, जबकि वो काम दरअसल षनिदेव करते हैं और वे इसमें कोई मुरव्वत नहीं करते। जो जैसा कर्म करेगा वो वैसा फल पाएगा, इसमें कोई अपवाद नहीं।
मसलन किसी ने अगर किसी को मारा, कष्ट पहंुचाया तो वो भी उतना ही कष्ट पाएगा। वो अगर किसी की मदद कर दे और ये कहे कि उसका कष्ट कम हो जाए तो ऐसा नहीं होगा हां उसने मदद की तो वक्त पर उसे भी उतनी ही मदद मिलेगी, ये जरूर होगा। यानि टू प्लस टू फोर। इसका कोई अपवाद नहीं। इसलिये केवल सरसांे और काले तिल के भरोसे मत रहना भैया। सत्कर्म के भरोसे रहना, वही सुकून देगा।

 

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