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जहां कुएं का पानी बताता है इंसान की उम्र, बनारस के 5 ऐसे ‘गुप्त’ मंदिर जो गूगल मैप्स पर भी आसानी से नहीं मिलते

जहां कुएं का पानी बताता है इंसान की उम्र, बनारस के 5 ऐसे ‘गुप्त’ मंदिर जो गूगल मैप्स पर भी आसानी से नहीं मिलतेVaranasi hidden places: बनारस के कुछ ऐसे छिपे हुए मंदिर हैं जो आम पर्यटकों की नजरों से दूर हैं. जानें उन 5 गुप्त मंदिरों के बारे में, जिनमें अनोखी मान्यताएं और रहस्य छिपे हैं, जैसे उम्र बताने वाला कुआं और जमीन के नीचे के शिवलिंग.
वाराणसी की इस यात्रा में मशहूर जगहों से आगे छिपे काशी के अनदेखे रंग खोजिएबनारस घूमने निकलते ही ज्यादातर लोगों की पहली मंजिल काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा के घाट होते हैं. ये दोनों काशी की पहचान जरूर हैं, लेकिन बनारस की असली खूबसूरती उसकी उन गलियों और मंदिरों में भी छिपी है, जिनके बारे में बहुत कम पर्यटकों को जानकारी होती है. काशी की संकरी गलियों में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं, पुराण कथाएं और सदियों पुरानी परंपराएं उन्हें खास बनाती हैं. अगर आप अगली बार बनारस जाएं तो इन पांच जगहों को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें.
काशी यात्रा का ‘गवाह’ माना जाता है यह गणेश मंदिरकाशी विश्वनाथ मंदिर की ओर जाने वाली विश्वनाथ गली में मौजूद श्री साक्षी विनायक मंदिर बाहर से देखने पर छोटा सा मंदिर लगता है, लेकिन इसकी धार्मिक मान्यता काफी खास है. यह मंदिर लाहौरी टोला में मणिकर्णेश्वर मंदिर के पास स्थित है. साक्षी विनायक को लेकर मान्यता है कि भगवान गणेश यहां काशी यात्रा और तीर्थयात्रा के साक्षी माने जाते हैं. खास तौर पर पंचकोसी परिक्रमा से जुड़ी परंपरा में इस गणेश मंदिर का उल्लेख मिलता है. यानी काशी आने वाला श्रद्धालु केवल बड़े और प्रसिद्ध मंदिरों तक सीमित न रहे, बल्कि इस छोटे से मंदिर तक भी पहुंचे. यही इसकी खास पहचान है. कुछ यात्रा स्रोत इसे 18वीं सदी में मराठा पेशवा द्वारा बनवाया गया मंदिर बताते हैं. लोकेशन: विश्वनाथ गली, मणिकर्णेश्वर मंदिर के पास, लाहौरी टोला.
जमीन के नीचे छिपा काशी का रहस्यमयी शिवलिंगचंद्रकूप से कुछ ही दूरी पर काशी का एक ऐसा शिव मंदिर है, जिसके बारे में जानकर पहली बार आने वाले पर्यटक हैरान रह जाते हैं. पितामहेश्वर शिवलिंग जमीन के नीचे स्थित है और इसे काशी के बेहद प्राचीन और गुप्त शिव स्थलों में गिना जाता है. स्थानीय धार्मिक स्रोत इसे स्वयंभू शिवलिंग बताते हैं और इसका उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड से जोड़ते हैं. इस मंदिर की सबसे खास बात इसका जमीन के नीचे होना है. शिवलिंग के दर्शन एक छोटे से रास्ते/छिद्र से किए जाते हैं, जबकि विशेष अवसरों पर नीचे जाकर दर्शन की व्यवस्था होती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार पितामहेश्वर की पूजा का संबंध परिवार की कई पीढ़ियों के कल्याण और मुक्ति से जोड़ा गया है. यही वजह है कि काशी की गलियों में मौजूद यह छोटा-सा स्थल अपने भीतर बड़ी धार्मिक कथा समेटे हुए है. लोकेशन: सिद्धेश्वरी गली/शीतला गली क्षेत्र, चंद्रकूप के पास.
मौत का संकेत देता है चंद्रकूप, जानिए इस रहस्यमयी कुएं की कहानीकाशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास की गलियों में स्थित सिद्धेश्वरी मंदिर अपने आप में धार्मिक आस्था का केंद्र है, लेकिन इसी परिसर में मौजूद चंद्रकूप इसे और रहस्यमयी बना देता है. इस प्राचीन कुएं को लेकर स्थानीय धार्मिक परंपराओं में कई मान्यताएं प्रचलित हैं. सबसे चर्चित मान्यता यह है कि कुएं में झांकने पर यदि किसी व्यक्ति को अपनी परछाईं दिखाई न दे, तो इसे उसके जीवन से जुड़ा अशुभ संकेत माना जाता है. कुछ लोककथाओं में इसे मृत्यु की समय-सीमा से भी जोड़ा गया है. हालांकि, यह धार्मिक लोकमान्यता है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं. यही रहस्य चंद्रकूप को काशी के उन अनोखे स्थलों में शामिल करता है, जहां इतिहास, आस्था और लोकविश्वास एक साथ दिखाई देते हैं. लोकेशन: सिद्धेश्वरी मंदिर परिसर, काशी विश्वनाथ मंदिर के पास.
यहां शिव के साथ मौजूद है औषधीय मान्यता वाला कुंडबनारस के दारानगर इलाके में स्थित महामृत्युंजय महादेव मंदिर भगवान शिव के उस स्वरूप को समर्पित है, जिसे मृत्यु पर विजय से जोड़ा जाता है. मंदिर का पता दारानगर, कोतवाली, बाग क्षेत्र में दर्ज है. इस मंदिर की खास पहचान यहां मौजूद प्राचीन कुएं से भी जुड़ी है, जिसे धन्वंतरि कूप कहा जाता है. धार्मिक मान्यता में इसके पानी को औषधीय गुणों से जोड़ा जाता है. मंदिर परिसर में कई देवी-देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर और शिवलिंग भी मौजूद हैं. यही वजह है कि काशी विश्वनाथ की भीड़ से थोड़ा अलग यह स्थान शिवभक्तों के लिए खास आस्था का केंद्र माना जाता है. लोकेशन: महामृत्युंजय रोड, दारानगर, कोतवाली, बाग, वाराणसी.
एक साथ 20 हजार लोग कर सकते हैं ध्यान, काशी का भव्य स्वर्वेद महामंदिरउमरहा में बना स्वर्वेद महामंदिर धाम काशी के आधुनिक आध्यात्मिक स्थलों में खास पहचान रखता है. इसे दुनिया के सबसे बड़े ध्यान केंद्रों में शामिल बताया जाता है. यहां एक साथ 20 हजार से अधिक साधक ध्यान कर सकते हैं. दिसंबर 2023 में शुरू हुए इस भव्य परिसर की खासियत इसकी विशाल संरचना और शांत वातावरण है. मंदिर की दीवारों पर ‘स्वर्वेद’ के पद और श्लोक उकेरे गए हैं. संगमरमर और गुलाबी बलुआ पत्थर से बना यह परिसर काशी की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक स्थापत्य से जोड़ता है. लोकेशन: उमरहा, वाराणसी.
काशी को सिर्फ देखा नहीं, महसूस किया जाता हैबनारस की पहचान सिर्फ काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा के घाटों तक सीमित नहीं है. इसकी असली कहानी उन संकरी गलियों, प्राचीन मंदिरों, रहस्यमयी कुओं और सदियों पुरानी मान्यताओं में छिपी है, जिनसे गुजरते हुए काशी का एक अलग ही रूप सामने आता है. अगली बार बनारस आएं, तो सिर्फ मशहूर जगहों की तस्वीरें लेकर न लौटें. इन अनदेखे ठिकानों तक पहुंचिए, क्योंकि इन्हीं में बसी है उस काशी की कहानी, जिसे हर कोई नहीं जानता.
जहां कुएं का पानी बताता है इंसान की उम्र, बनारस के 5 ऐसे ‘गुप्त’ मंदिर जो गूगल मैप्स पर भी आसानी से नहीं मिलतेVaranasi hidden places: बनारस के कुछ ऐसे छिपे हुए मंदिर हैं जो आम पर्यटकों की नजरों से दूर हैं. जानें उन 5 गुप्त मंदिरों के बारे में, जिनमें अनोखी मान्यताएं और रहस्य छिपे हैं, जैसे उम्र बताने वाला कुआं और जमीन के नीचे के शिवलिंग.यहां शिव के साथ मौजूद है औषधीय मान्यता वाला कुंडबनारस के दारानगर इलाके में स्थित महामृत्युंजय महादेव मंदिर भगवान शिव के उस स्वरूप को समर्पित है, जिसे मृत्यु पर विजय से जोड़ा जाता है. मंदिर का पता दारानगर, कोतवाली, बाग क्षेत्र में दर्ज है. इस मंदिर की खास पहचान यहां मौजूद प्राचीन कुएं से भी जुड़ी है, जिसे धन्वंतरि कूप कहा जाता है. धार्मिक मान्यता में इसके पानी को औषधीय गुणों से जोड़ा जाता है. मंदिर परिसर में कई देवी-देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर और शिवलिंग भी मौजूद हैं. यही वजह है कि काशी विश्वनाथ की भीड़ से थोड़ा अलग यह स्थान शिवभक्तों के लिए खास आस्था का केंद्र माना जाता है. लोकेशन: महामृत्युंजय रोड, दारानगर, कोतवाली, बाग, वाराणसी.एक साथ 20 हजार लोग कर सकते हैं ध्यान, काशी का भव्य स्वर्वेद महामंदिरउमरहा में बना स्वर्वेद महामंदिर धाम काशी के आधुनिक आध्यात्मिक स्थलों में खास पहचान रखता है. इसे दुनिया के सबसे बड़े ध्यान केंद्रों में शामिल बताया जाता है. यहां एक साथ 20 हजार से अधिक साधक ध्यान कर सकते हैं. दिसंबर 2023 में शुरू हुए इस भव्य परिसर की खासियत इसकी विशाल संरचना और शांत वातावरण है. मंदिर की दीवारों पर ‘स्वर्वेद’ के पद और श्लोक उकेरे गए हैं. संगमरमर और गुलाबी बलुआ पत्थर से बना यह परिसर काशी की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक स्थापत्य से जोड़ता है. लोकेशन: उमरहा, वाराणसी.
काशी को सिर्फ देखा नहीं, महसूस किया जाता हैबनारस की पहचान सिर्फ काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा के घाटों तक सीमित नहीं है. इसकी असली कहानी उन संकरी गलियों, प्राचीन मंदिरों, रहस्यमयी कुओं और सदियों पुरानी मान्यताओं में छिपी है, जिनसे गुजरते हुए काशी का एक अलग ही रूप सामने आता है. अगली बार बनारस आएं, तो सिर्फ मशहूर जगहों की तस्वीरें लेकर न लौटें. इन अनदेखे ठिकानों तक पहुंचिए, क्योंकि इन्हीं में बसी है उस काशी की कहानी, जिसे हर कोई नहीं जानता.

 

 

 

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