कोरबा 24 सितम्बर 2026/ग्राम पंचायत मातीन, जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा की रहने वाली श्रीमती तीजन पोर्ते के लिए बिहान योजना से जुड़ना उनके जीवन में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत लेकर आया। कभी परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित आय पर निर्भर रहने वाली तीजन आज स्वयं आजीविका का साधन संचालित कर रही हैं और अपनी मेहनत से ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। बिहान योजना के माध्यम से मिले सहयोग और स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने हुनर को स्वरोजगार का रूप दिया।
लाभार्थी श्रीमती तीजन पोर्ते बताती हैं, “बिहान योजना से जुड़ने से पहले मेरे पास अपनी कोई स्थायी आय का साधन नहीं था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने में कई बार आर्थिक परेशानी आती थी। सरस्वती स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद मुझे आगे बढ़ने का अवसर मिला और अपने पैरों पर खड़े होने का विश्वास भी बढ़ा।”
वह बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिलने लगा। आजीविका गतिविधि को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें 60 हजार रुपये की सहायता प्राप्त हुई। इसके साथ ही बैंक लिंकेज के माध्यम से 1.50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने ईंट निर्माण का कार्य शुरू किया। मेहनत, समूह के सहयोग और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने ईंट निर्माण गतिविधि से 2.50 लाख रुपये का आर्थिक लाभ अर्जित किया। बिहान से जुड़ने के बाद मुझे केवल आर्थिक सहायता ही नहीं मिली, बल्कि काम करने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी मिला। समूह के माध्यम से मुझे बैंक से ऋण लेने और अपनी आजीविका गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला। मैंने ईंट निर्माण का काम शुरू किया और इससे अच्छी आमदनी होने लगी। अब मैं अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक रूप से सहयोग कर पा रही हूं।”
श्रीमती तीजन के जीवन में आए इस बदलाव ने उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है। पहले जहां आर्थिक जरूरतों के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भरता रहती थी, वहीं अब वह स्वयं आय अर्जित कर रही हैं। अपने काम से प्राप्त आमदनी का उपयोग परिवार की दैनिक आवश्यकताओं और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने में कर रही हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।
आज मुझे खुशी है कि मैं अपने काम से कमाई कर रही हूं और परिवार की जरूरतों में अपना योगदान दे रही हूं। बिहान योजना और सरस्वती स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग ने मेरी जिंदगी में बहुत बदलाव किया है। पहले जो काम मुश्किल लगता था, आज वही काम मेरी पहचान और आय का जरिया बन गया है। अब मैं आगे भी अपनी आजीविका गतिविधि को बढ़ाना चाहती हूं।”
वीबी जीरामजी अंतर्गत जियो-टैगिंग में छत्तीसगढ़ का उत्कृष्ट प्रदर्शन,
*भूग्राम योजना में 99.34 प्रतिशत परिसंपत्तियां डिजिटल मैप पर दर्ज* *दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद राष्ट्रीय औसत को पछाड़कर राज्य ने बनाई बढ़त, 11.82 लाख से अधिक परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग पूर्ण*…
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