
योजना से गत वर्ष की तुलना में 52 हजार रूपए का हुआ अतिरिक्त लाभ*
*- फसल चक्र परिवर्तन से जल संरक्षण के साथ बढ़ी आमदनी, अन्य किसानों को भी दलहन-तिलहन की खेती के लिए कर रहे प्रेरित*
राजनांदगांव 27 सितम्बर 2026। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) योजना किसानों के लिए उनकी उपज के उचित मूल्य एवं सुगम विपणन का माध्यम बन रही है। योजना से लाभान्वित होकर ग्राम तेंदूनाला निवासी किसान श्री कोमल कुमार साहू ने रबी मौसम में ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर चना एवं गेहूं की खेती कर न केवल फसल चक्र में बदलाव किया, बल्कि चना विक्रय से अपनी आय में भी वृद्धि की है।
श्री कोमल कुमार साहू ने बताया कि पूर्व के रबी मौसम में वे ग्रीष्मकालीन धान की खेती करते थे। इससे जल स्तर पर दबाव पडऩे के साथ सभी रकबे में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना भी कठिन होता था। कृषि विभाग के मार्गदर्शन से उन्होंने इस वर्ष 2.430 हेक्टेयर में चना तथा शेष रकबे में गेहूं की फसल ली। चना की फसल से उन्हें लगभग 38 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। कृषि विभाग से पीएम आशा योजना के अंतर्गत चना उपार्जन की जानकारी मिलने पर उन्होंने सेवा सहकारी समिति तुमड़ीबोड़ में चना विक्रय हेतु पंजीयन कराया। पंजीयन के बाद उन्होंने अपनी पूरी उपज समिति में विक्रय की, जिसके एवज में उन्हें 2 लाख 23 हजार 250 रूपए की राशि प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि विक्रय की राशि लगभग 15 दिनों के भीतर प्राप्त हो गई। गत वर्ष की तुलना में उन्हें पीएम आशा योजना से लगभग 52 हजार रूपए का अतिरिक्त लाभ हुआ है। श्री साहू ने बताया कि वे पहले प्राईवेट दुकानों में चना फसल का विक्रय करते थे। लेकिन पीएम आशा योजना से विक्रय करने पर उन्हें अतिरिक्त आय हुई है। श्री साहू ने योजना की सुविधा के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पीएम आशा योजना से किसानों को अपनी उपज के विक्रय में सुविधा मिल रही है। उन्होंने जिले के अन्य किसानों से भी धान के साथ दलहन एवं तिलहन फसलों को अपनाने तथा चना, मसूर, सरसों, मूंग एवं सोयाबीन जैसी फसलों का पीएम आशा योजना के अंतर्गत पंजीयन कराकर विक्रय करने की अपील की।
*फसल चक्र परिवर्तन से प्रेरित हो रहे अन्य किसान -*
श्री कोमल कुमार साहू के फसल चक्र परिवर्तन एवं पीएम आशा योजना के माध्यम से चना विक्रय से प्रभावित होकर ग्राम के अन्य कृषक भी दलहन फसलों की खेती तथा योजना के अंतर्गत अपनी उपज का विक्रय करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इससे कृषि में विविधीकरण, जल संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक वातावरण निर्मित हो रहा है।









