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भ्रामक विज्ञापनों से बचें कोचिंग संस्थान, सीसीपीए के दिशा-निर्देशों का करें पालन सफल अभ्यर्थियों के विज्ञापन में पाठ्यक्रम की अवधि, रैंक और सशुल्क या निःशुल्क होने की जानकारी देना अनिवार्य

 कोरबा, 21 अक्टूबर 2026/केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार व्यवहार पर रोक लगाने के लिए जिला कलेक्टरों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके तहत जिले के कोचिंग संस्थानों और कोचिंग केंद्रों को कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम संबंधी दिशा-निर्देश, 2024 का पालन करने और भ्रामक प्रचार बंद करने के लिए कहा गया है।
सीसीपीए ने पाया है कि कुछ कोचिंग संस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम घोषित होते ही सफल अभ्यर्थियों के नाम और तस्वीरों का विज्ञापनों में उपयोग करते हैं। कई मामलों में अभ्यर्थियों ने संस्थान से केवल साक्षात्कार मार्गदर्शन या अल्पकालिक निःशुल्क सहायता ली होती है, जबकि संस्थान विज्ञापन में अपने नियमित पाठ्यक्रम को सफलता का कारण बताकर वास्तविक जानकारी छिपाते हैं। इसे भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया है।
दिशा-निर्देशों के अनुसार, सफल अभ्यर्थी के नाम और तस्वीर के साथ उसकी प्राप्त रैंक, संबंधित पाठ्यक्रम का नाम और अवधि तथा पाठ्यक्रम सशुल्क था या निःशुल्ककृयह जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी। पाठ्यक्रम, फीस, शिक्षक की योग्यता तथा शुल्क वापसी से जुड़े सभी दावे सही और प्रमाणित होने चाहिए। सफलता दर, चयन या रैंक की संख्या के बारे में गलत दावे तथा चयन, नौकरी की सुरक्षा या वेतन वृद्धि की गारंटी देना प्रतिबंधित है।
किसी अभ्यर्थी का नाम, तस्वीर, प्रशंसापत्र या वीडियो विज्ञापन में उपयोग करने से पहले उसका लिखित सहमति-पत्र लेना अनिवार्य है। विज्ञापन में अस्वीकरण और महत्वपूर्ण जानकारी स्पष्ट रूप से तथा मुख्य दावे के समान अक्षर आकार में प्रदर्शित करनी होगी। कोचिंग संस्थान सीमित सीटों या समय-सीमा का हवाला देकर दाखिले के लिए भ्रामक दबाव भी नहीं बना सकेंगे।
सीसीपीए ने अब तक देशभर के कोचिंग संस्थानों को भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार व्यवहार के संबंध में 66 नोटिस जारी किए हैं। 34 संस्थानों पर कुल 1 करोड़ 59 लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के साथ भ्रामक विज्ञापन बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला प्रशासन द्वारा जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों को इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के लिए कहा जाएगा। प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों का विज्ञापन करने वाले संस्थानों की जांच भी की जाएगी। दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की जानकारी मिलने पर संबंधित संस्थान के विरुद्ध उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
कोचिंग संस्थानों से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए विद्यार्थी राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1915 पर संपर्क कर सकते हैं या एनसीएच मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं।
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