जशपुरनगर 23 अक्टूबर 2026/ केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में सहायक साबित हो रही हैं।
इन योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ परिवार की जिम्मेदारियों को भी बेहतर ढंग से निभा रही हैं।
दुलदुला विकासखंड के ग्राम छेड़डाड़ निवासी श्रीमती सविता रजक इसकी एक प्रेरक मिसाल हैं, जिन्होंने बिहान योजना और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मिले सहयोग से बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया है।
सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रीमती सविता का सपना अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने का था।
इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत महिला ग्राम संगठन से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया।
महिला ग्राम संगठन के माध्यम से उन्हें 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता तथा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत एक लाख रुपए का ऋण प्राप्त हुआ।
इस राशि का उपयोग करते हुए उन्होंने बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया।
मेहनत और लगन से उन्होंने इस व्यवसाय को अपनी आजीविका का साधन बनाया।
बकरी पालन से प्रतिमाह 10 हजार रुपए की आय
बकरी पालन के व्यवसाय से श्रीमती सविता रजक को प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपए की आय हो रही है।
इस आमदनी से वह बच्चों की पढ़ाई और परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा कर रही हैं।
साथ ही अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने और आय में वृद्धि करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
स्वरोजगार से मिली आर्थिक मजबूती ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
श्रीमती सविता का कहना है कि बिहान योजना और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मिले सहयोग ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद की।
उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं से उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी मिल रहा लाभ
श्रीमती सविता रजक के परिवार को छत्तीसगढ़ शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत उन्हें गैस सिलेंडर, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्का आवास तथा महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है।
इन योजनाओं से परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है और जीवन स्तर में सुधार आया है।
श्रीमती सविता रजक की सफलता यह दर्शाती है कि योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएं स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं और अपने परिवार के बेहतर भविष्य की नींव रख सकती हैं।
उनकी यह पहल गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने और आजीविका के नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित कर रही है।
स्वरोजगार से परिवार को मिला आर्थिक सहारा,
गांव की अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणास्रोत









