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मखाना खेती – किसानों की समृद्धि और स्वास्थ्य की नई राह

धमतरी । धमतरी धान के कटोरे कहे जाने वाले इस अंचल में अब एक नई फसल अपनी पहचान बना रही है – सुपर फूड मखाना, जिसे काला हीरा भी कहा जाता है। स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर मखाने की खेती अब जिले में आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ की जा रही है। जिला प्रशासन ने इसे नई दिशा देते हुए किसानों और महिला स्वसहायता समूहों के लिए आजीविका का मजबूत आधार बनाने का संकल्प लिया है।

पायलट प्रोजेक्ट से नई उम्मीदें

विकासखंड कुरूद के ग्राम राखी, दरगहन और सरसोंपुरी को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है। इन गांवों के तालाबों में लगभग 20 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने की खेती की जा रही है। राखी गांव में तो करीब 5 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल की हार्वेस्टिंग भी शुरू हो चुकी है। यह कार्य कुशल मजदूरों की मदद से किया जा रहा है, क्योंकि मखाने की कटाई-छंटाई में विशेष दक्षता की आवश्यकता होती है।

स्वसहायता समूहों की भागीदारी

इस नई फसल ने क्षेत्र में उत्सुकता और उत्साह का वातावरण बना दिया है। खासकर महिला स्वसहायता समूह भी आगे आ रहे हैं। ग्राम देमार के शैलपुत्री महिला समूह और नई किरण महिला समूह ने मखाने की खेती और हार्वेस्टिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है। यह कदम न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाएगा बल्कि ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती देगा।

तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाबद्ध विस्तार

कृषि विस्तार अधिकारी श्री आदित्य मेश्राम और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के विशेषज्ञ लगातार किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दे रहे हैं। मखाने की खेती के लिए खेत या तालाब में केवल 2–3 फीट पानी पर्याप्त है। यह फसल लगभग 6 महीने में तैयार हो जाती है और धान की तुलना में अधिक लाभ देती है।

धान की खेती में जहां शुद्ध लाभ लगभग ₹32,698 आता है, वहीं मखाने से किसान को ₹64,000 तक की आमदनी हो रही है। यही कारण है कि किसानों की बढ़ती रुचि को देखते हुए जिला प्रशासन ने अगले रबी सीजन में 200 एकड़ तालाबों में मखाने की खेती विस्तार का लक्ष्य रखा है।

स्वास्थ्य के लिए वरदान

मखाना सिर्फ आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अमूल्य वरदान है। यह विटामिन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्निशियम, आयरन और जिंक से भरपूर होता है।

• डायबिटीज और हृदय रोगियों के लिए उपयोगी।

• कैल्शियम की अधिकता से हड्डियों और जोड़ों के दर्द में राहत।

• रात को सेवन करने से अच्छी नींद और तनाव मुक्ति।

• प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फास्फोरस से भरपूर होने के कारण यह शरीर को मजबूत और ऊर्जावान बनाता है।

कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में मखाने की आधुनिक खेती किसानों और महिला स्वसहायता समूहों के लिए आय बढ़ाने का नया मार्ग है। यह पहल न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उपयोगी है। प्रशासन का उद्देश्य है कि इसे व्यापक स्तर पर बढ़ाकर किसानों को धान के विकल्प के रूप में मजबूत फसल उपलब्ध कराई जाए।

मखाने की यह अभिनव पहल जिले को नई पहचान देने के साथ-साथ किसानों के जीवन में समृद्धि और स्वास्थ्य की नई किरण लेकर आ रही है।

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