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पीएम जनमन योजना से मिला सुरक्षित आवास, बच्चों के भविष्य को मिली नई दिशा

 

जंगल की कठिन जिंदगी से सुरक्षित आशियाने तक का सफर

धमतरी, 15 जून 2026/ किसी भी परिवार के लिए अपना सुरक्षित घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद का प्रतीक होता है। धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम पीपरहीभर्री (ग्राम पंचायत कौहाबाहरा) की विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय की महिला दिनेश्वरी के जीवन में भी यह सपना वर्षों तक अधूरा रहा। लेकिन प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) ने उनके इस सपने को साकार कर दिया।
दिनेश्वरी और उनके पति छन्नू का जीवन लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में बीता। परिवार की आजीविका का मुख्य साधन जंगल से प्राप्त लघु वनोपज और दिहाड़ी मजदूरी थी। सीमित आय के कारण वे बांस, मिट्टी और घास-फूस से बने एक कच्चे मकान में रहने को मजबूर थे। बरसात के मौसम में घर की दीवारें कमजोर पड़ जाती थीं, छत से पानी टपकता था और हर समय घर के ढहने का भय बना रहता था। इसके अलावा जंगल के समीप होने के कारण जंगली जानवरों का खतरा भी परिवार की चिंता बढ़ाता था।
इन चुनौतियों के बीच पीएम जनमन योजना उनके जीवन में आशा की नई किरण बनकर आई। योजना के तहत दिनेश्वरी को पक्के आवास की स्वीकृति मिली और जिला प्रशासन के सहयोग से उनके लिए सुरक्षित एवं सुविधायुक्त घर का निर्माण कराया गया। आज उनका पक्का मकान केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुका है।
नए घर के साथ परिवार को बिजली, शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध हुई हैं। सड़क संपर्क बेहतर होने से स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य शासकीय योजनाओं तक उनकी पहुंच आसान हुई है। अब उनके बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा है, जिससे परिवार के भविष्य के प्रति नई उम्मीद जगी है।
दिनेश्वरी भावुक होकर बताती हैं, “पहले हर बारिश हमारे लिए चिंता लेकर आती थी। घर टूटने का डर और बच्चों की सुरक्षा की फिक्र हमेशा बनी रहती थी। अब हमें पक्का घर मिला है। हम सुरक्षित हैं और हमारे बच्चों का भविष्य भी पहले से बेहतर दिखाई देता है। सरकार की इस योजना ने हमारे जीवन में बड़ा बदलाव लाया है।”
पीएम जनमन योजना विशेष रूप से देश की अत्यंत पिछड़ी जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। दिनेश्वरी की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचता है, तो उनका जीवन पूरी तरह बदल सकता है।
आज दिनेश्वरी का परिवार आत्मविश्वास, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जी रहा है। उनका बदला हुआ जीवन न केवल कमार समुदाय के अन्य परिवारों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं।

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