
कलेक्टर ने राहत शिविरों, क्षति सर्वेक्षण और स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की
जगदलपुर, 29 सितंबर 2026/ कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में मंगलवार को कलेक्टर श्री आकाश छिकारा की अध्यक्षता में समय-सीमा की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जिले में विगत दिनों आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद राहत एवं पुनर्वास कार्यों की स्थिति, आगामी शासकीय आयोजनों, जनहितैषी योजनाओं के क्रियान्वयन और लंबित विभागीय प्रकरणों की गहन समीक्षा की गई। बैठक में वन मंडलाधिकारी श्री दीपेश कपिल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री तन्मय खन्ना, अपर कलेक्टर श्री सीपी बघेल, नगर निगम आयुक्त श्री प्रवीण वर्मा, सहायक कलेक्टर श्री यशवंत नायक सहित जिले के सभी अनुविभागीय दंडाधिकारी एवं जिला स्तरीय अधिकारी कलेक्टोरेट में उपस्थित रहे, जबकि सभी तहसीलदार, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और खंड स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
बैठक की शुरुआत में कलेक्टर श्री छिकारा ने जिले में लगभग पचास वर्षों के अंतराल के बाद आई इस भीषण बाढ़ के दौरान जिला प्रशासन, एसडीआरएफ टीम द्वारा किए गए बचाव व राहत कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कोंडागांव और दंतेवाड़ा जैसे पड़ोसी जिलों से अतिरिक्त संसाधन जुटाकर जलभराव में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया और उन तक भोजन व जरूरी सामग्री पहुंचाई गई। उन्होंने आगे कहा कि अब रेस्क्यू के बाद सबसे महत्वपूर्ण कार्य राहत और पुनर्वास का है। उन्होंने राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की नियमित निगरानी के निर्देश दिए ताकि प्रभावितों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके साथ ही उन्होंने राजस्व अमले को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री जी की घोषणा के अनुरूप मकान, फसल, पशु क्षति और जनहानि के मामलों का त्वरित व उदारतापूर्वक सर्वेक्षण कर प्रकरण तैयार किए जाएं, जिससे पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिल सके। उन्होंने दो दिन से अधिक जलभराव के कारण हुए कपड़े और बर्तनों के नुकसान के लिए निर्धारित राहत राशि स्वीकृत करने तथा क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण हेतु निःशुल्क बांस-बल्ली उपलब्ध कराने के प्रस्ताव तैयार करने के भी निर्देश दिए।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को देखते हुए कलेक्टर ने स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को अलर्ट मोड पर रहने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि जलभराव वाले क्षेत्रों में डायरिया, पीलिया, टायफाइड, मलेरिया और चर्म रोग जैसी जलजनित बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए स्वास्थ्य दल घर-घर पहुंचे, क्लोरीन की गोलियों का वितरण करें और पानी उबालकर पीने हेतु ग्रामीणों को जागरूक करें। वहीं पीएचई विभाग को क्षतिग्रस्त हैण्डपंप एवं पाइपलाइनों की तत्काल मरम्मत कर नागरिकों को शुद्ध व क्लोरिनेटेड पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए। इसके साथ ही उन्होंने विद्युत विभाग को निर्देशित किया कि जिन इलाकों में जलस्तर सामान्य हो चुका है, वहां सब-स्टेशनों और ट्रांसफार्मरों की तुरंत जांच व मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, ताकि जनजीवन तेजी से सामान्य हो सके।
समीक्षा के दौरान आगामी आयोजनों और विभागीय प्राथमिकताओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कलेक्टर ने 7 और 8 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय रोजगार मेले का जिले के युवाओं के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए ताकि तकनीकी व उच्च शिक्षित युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अधिक से अधिक अवसर मिल सकें। इसके अतिरिक्त ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित होने वाली मशाल रैली और रंगोली कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी विमर्श किया गया। राजस्व विभाग को डिजिटल क्रॉप सर्वे (एग्रीस्टैक) और ई-केवाईसी के लंबित कार्यों को आगामी 10 अक्टूबर तक शत-प्रतिशत पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए। पीएम-सूर्यघर योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिक से अधिक नागरिकों को 60 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ दिलवाकर सोलर रूफटॉप लगवाने हेतु वेंडरों और बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा।
बैठक में कलेक्टर ने सांसद व विधायक निधि के स्वीकृत निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृतियां तत्काल जारी करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विभिन्न विभाग मनरेगा और अन्य योजनाओं के साथ कन्वर्जेंस कर ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त कमरों, आंगनबाड़ी केंद्रों, सामुदायिक भवनों और स्वास्थ्य केंद्रों के संधारण कार्यों को गति प्रदान करें। प्रशासनिक जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से कलेक्टर ने सभी ब्लॉक और तहसील स्तर के कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली तथा कर्मचारियों की शत-प्रतिशत बायोमेट्रिक व ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी आपसी समन्वय के साथ जनहित के कार्यों और शासन की प्राथमिकताओं को समय-सीमा के भीतर पूर्ण करें।
बैठक की शुरुआत में कलेक्टर श्री छिकारा ने जिले में लगभग पचास वर्षों के अंतराल के बाद आई इस भीषण बाढ़ के दौरान जिला प्रशासन, एसडीआरएफ टीम द्वारा किए गए बचाव व राहत कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कोंडागांव और दंतेवाड़ा जैसे पड़ोसी जिलों से अतिरिक्त संसाधन जुटाकर जलभराव में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया और उन तक भोजन व जरूरी सामग्री पहुंचाई गई। उन्होंने आगे कहा कि अब रेस्क्यू के बाद सबसे महत्वपूर्ण कार्य राहत और पुनर्वास का है। उन्होंने राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की नियमित निगरानी के निर्देश दिए ताकि प्रभावितों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके साथ ही उन्होंने राजस्व अमले को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री जी की घोषणा के अनुरूप मकान, फसल, पशु क्षति और जनहानि के मामलों का त्वरित व उदारतापूर्वक सर्वेक्षण कर प्रकरण तैयार किए जाएं, जिससे पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिल सके। उन्होंने दो दिन से अधिक जलभराव के कारण हुए कपड़े और बर्तनों के नुकसान के लिए निर्धारित राहत राशि स्वीकृत करने तथा क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण हेतु निःशुल्क बांस-बल्ली उपलब्ध कराने के प्रस्ताव तैयार करने के भी निर्देश दिए।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को देखते हुए कलेक्टर ने स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को अलर्ट मोड पर रहने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि जलभराव वाले क्षेत्रों में डायरिया, पीलिया, टायफाइड, मलेरिया और चर्म रोग जैसी जलजनित बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए स्वास्थ्य दल घर-घर पहुंचे, क्लोरीन की गोलियों का वितरण करें और पानी उबालकर पीने हेतु ग्रामीणों को जागरूक करें। वहीं पीएचई विभाग को क्षतिग्रस्त हैण्डपंप एवं पाइपलाइनों की तत्काल मरम्मत कर नागरिकों को शुद्ध व क्लोरिनेटेड पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए। इसके साथ ही उन्होंने विद्युत विभाग को निर्देशित किया कि जिन इलाकों में जलस्तर सामान्य हो चुका है, वहां सब-स्टेशनों और ट्रांसफार्मरों की तुरंत जांच व मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, ताकि जनजीवन तेजी से सामान्य हो सके।
समीक्षा के दौरान आगामी आयोजनों और विभागीय प्राथमिकताओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कलेक्टर ने 7 और 8 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय रोजगार मेले का जिले के युवाओं के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए ताकि तकनीकी व उच्च शिक्षित युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अधिक से अधिक अवसर मिल सकें। इसके अतिरिक्त ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित होने वाली मशाल रैली और रंगोली कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी विमर्श किया गया। राजस्व विभाग को डिजिटल क्रॉप सर्वे (एग्रीस्टैक) और ई-केवाईसी के लंबित कार्यों को आगामी 10 अक्टूबर तक शत-प्रतिशत पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए। पीएम-सूर्यघर योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिक से अधिक नागरिकों को 60 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ दिलवाकर सोलर रूफटॉप लगवाने हेतु वेंडरों और बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा।
बैठक में कलेक्टर ने सांसद व विधायक निधि के स्वीकृत निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृतियां तत्काल जारी करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विभिन्न विभाग मनरेगा और अन्य योजनाओं के साथ कन्वर्जेंस कर ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त कमरों, आंगनबाड़ी केंद्रों, सामुदायिक भवनों और स्वास्थ्य केंद्रों के संधारण कार्यों को गति प्रदान करें। प्रशासनिक जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से कलेक्टर ने सभी ब्लॉक और तहसील स्तर के कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली तथा कर्मचारियों की शत-प्रतिशत बायोमेट्रिक व ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी आपसी समन्वय के साथ जनहित के कार्यों और शासन की प्राथमिकताओं को समय-सीमा के भीतर पूर्ण करें।









