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सेवा की कहानी: कभी पति थे बेरोजगार और बच्चों की पढ़ाई थी मुश्किल, आज सुप्रिया ने स्वरोजगार से बदल दी परिवार की तकदीर

*सेवा संकल्प अभियान-2026

 

*छत्तीसगढ़ महिला कोष से दो लाख रुपये का ऋण लेकर शुरू किया टेंट हाउस व्यवसाय, मेहनत से पूरा ऋण भी चुकाया*

 

*स्व-सहायता समूह से जुड़कर बनीं आत्मनिर्भर, पति को मिला रोजगार और बच्चों की बेहतर शिक्षा का सपना हो रहा साकार*

 

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण की योजनाओं से ग्रामीण महिलाओं को मिल रहे स्वरोजगार के अवसर*

 

रायपुर, 14 अक्टूबर 2026/ कभी परिवार की आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई और घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल था। पति के पास रोजगार नहीं था और आमदनी का कोई मजबूत साधन भी नहीं था। लेकिन परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय एक महिला ने स्वयं आगे बढ़कर परिवार की जिम्मेदारियां संभालने का संकल्प लिया। अपनी मेहनत, हिम्मत और शासकीय योजना से मिले आर्थिक सहयोग के बल पर उन्होंने न केवल स्वयं का व्यवसाय स्थापित किया, बल्कि बेरोजगार पति के लिए भी रोजगार का अवसर तैयार किया। यह प्रेरक कहानी है सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कृष्णापुर निवासी श्रीमती सुप्रिया की, जिन्होंने छत्तीसगढ़ महिला कोष से दो लाख रुपये का ऋण लेकर टेंट हाउस व्यवसाय शुरू किया। आज उनका व्यवसाय परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। इससे दोनों बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रिया ने व्यवसाय से अर्जित आय के बल पर दो लाख रुपये का पूरा ऋण भी चुका दिया है।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहयोग प्रदान किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ महिला कोष ऋण योजना महिलाओं को आजीविका गतिविधियां शुरू करने और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर उपलब्ध करा रही है। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सामने आई सुप्रिया की सफलता की कहानी दर्शाती है कि आर्थिक संसाधन और सही मार्गदर्शन मिलने पर महिलाएं परिवार की परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं।

 

*आर्थिक तंगी से जूझ रहा था परिवार, स्व-सहायता समूह से जुड़कर मिली नई राह*

 

सुप्रिया बताती हैं कि पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। पति बेरोजगार थे और परिवार में आय का नियमित साधन नहीं होने से दो बच्चों की पढ़ाई तथा घर की आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो रहा था। वे चाहती थीं कि परिवार की परिस्थितियां बदलें और बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, लेकिन स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध नहीं थी। ऐसे समय में भाग्यलक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बना।

 

समूह से जुड़ने के बाद सुप्रिया को महिलाओं के स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित शासकीय योजनाओं की जानकारी मिली। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष ऋण योजना के संबंध में बताया। योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता प्राप्त कर व्यवसाय शुरू करने की संभावना ने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। उन्होंने उपलब्ध अवसर का लाभ उठाने का निर्णय लिया और टेंट हाउस व्यवसाय शुरू करने की योजना बनाई।

 

*दो लाख रुपये के ऋण से शुरू किया टेंट हाउस, पति को भी मिला रोजगार*

 

छत्तीसगढ़ महिला कोष से दो लाख रुपये का ऋण प्राप्त होने के बाद सुप्रिया ने टेंट हाउस व्यवसाय की शुरुआत की। उनके इस निर्णय से परिवार को आजीविका का नया साधन मिला। पहले बेरोजगार रहने वाले उनके पति भी टेंट हाउस के काम से जुड़ गए, जिससे परिवार के दोनों सदस्य मिलकर व्यवसाय संचालित करने लगे। धीरे-धीरे इस व्यवसाय से होने वाली आमदनी ने परिवार की आर्थिक परेशानियों को कम करने में मदद की।

 

सुप्रिया के लिए यह व्यवसाय केवल आय अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का अवसर भी बना। पहले बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों के लिए पैसों की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब व्यवसाय से प्राप्त आमदनी के कारण इन आवश्यकताओं को पूरा करने में सुविधा हो रही है। पति को रोजगार मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है और सुप्रिया अपने दोनों बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान दे पा रही हैं।

 

*मेहनत से चुकाया पूरा ऋण, आर्थिक आत्मनिर्भरता की पेश की मिसाल*

 

सुप्रिया की सफलता का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने टेंट हाउस व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ छत्तीसगढ़ महिला कोष से प्राप्त दो लाख रुपये का पूरा ऋण भी चुका दिया है। यह उपलब्धि उनकी मेहनत, आर्थिक अनुशासन और व्यवसाय के प्रति समर्पण को दर्शाती है। जिस महिला के सामने कभी व्यवसाय शुरू करने के लिए पूंजी जुटाना बड़ी चुनौती थी, आज उन्होंने स्वयं का रोजगार स्थापित कर ऋण की पूरी राशि वापस कर दी है।

 

अपनी सफलता के बारे में सुप्रिया कहती हैं, “पहले हमारी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। पति बेरोजगार थे और बच्चों को पढ़ाने में भी परेशानी होती थी। समूह से जुड़ने के बाद मुझे योजनाओं की जानकारी मिली। छत्तीसगढ़ महिला कोष से दो लाख रुपये का ऋण लेकर टेंट हाउस शुरू किया। आज हमारा परिवार आर्थिक रूप से पहले से बेहतर स्थिति में है। पति को भी रोजगार मिला है और बच्चों की पढ़ाई अच्छे से हो रही है। मैंने पूरा ऋण भी चुका दिया है।”

 

सुप्रिया का अनुभव बताता है कि महिलाओं को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहयोग मिलने से उसका लाभ पूरे परिवार तक पहुंच सकता है। उनके प्रयास से जहां परिवार को आय का साधन मिला, वहीं पति को रोजगार और बच्चों की शिक्षा को भी आर्थिक सहारा प्राप्त हुआ।

 

*स्व-सहायता समूह और शासकीय सहयोग से महिलाओं को मिल रही नई पहचान*

 

ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूह महिलाओं को संगठित करने के साथ उन्हें आर्थिक गतिविधियों और शासकीय योजनाओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। सुप्रिया के जीवन में भी भाग्यलक्ष्मी स्व-सहायता समूह की भूमिका महत्वपूर्ण रही। समूह के माध्यम से उन्हें योजनाओं की जानकारी मिली और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के मार्गदर्शन से वे छत्तीसगढ़ महिला कोष ऋण योजना का लाभ प्राप्त कर सकीं।

 

छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से मिलने वाला ऋण महिलाओं को अपनी क्षमता और स्थानीय अवसरों के अनुरूप व्यवसाय शुरू करने में सहायता प्रदान करता है। सुप्रिया ने टेंट हाउस व्यवसाय का चयन कर इस अवसर का उपयोग किया और परिवार की आजीविका को मजबूत बनाया। उनकी सफलता अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशने तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

 

*प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार, कहा—योजना ने दी आगे बढ़ने की ताकत*

 

सुप्रिया ने छत्तीसगढ़ महिला कोष ऋण योजना से मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि योजना से मिली सहायता ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और स्वयं की पहचान बनाने का अवसर दिया। पहले जहां परिवार आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था, वहीं अब टेंट हाउस व्यवसाय से आय प्राप्त होने के कारण घरेलू जरूरतें और बच्चों की पढ़ाई बेहतर ढंग से संचालित हो रही है।

 

सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सुप्रिया की यह सफलता की कहानी महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण है। दो लाख रुपये के ऋण से शुरू हुआ उनका टेंट हाउस व्यवसाय आज परिवार की आजीविका का मजबूत आधार बन गया है। उन्होंने न केवल पति को रोजगार से जोड़ा और बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक संबल जुटाया, बल्कि पूरा ऋण चुकाकर अपनी व्यावसायिक क्षमता भी साबित की है। सुप्रिया की उपलब्धि दर्शाती है कि महिलाओं को सही अवसर, आर्थिक संसाधन और मार्गदर्शन मिले तो वे स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ पूरे परिवार की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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