Ro no D15139/23

सफलता की कहानी: नर बकरा वितरण योजना से बदली अंजोला एक्का की आर्थिक स्थिति, बकरी पालन से कमाए 65 हजार रुपये

*सेवा संकल्प अभियान-2026

 

*शासन से मिले 4 हजार रुपये के अनुदान से खरीदा उन्नत नस्ल का बकरा, नस्ल सुधार से बढ़ी पशुधन की गुणवत्ता और आमदनी*

 

*15 बकरा-बकरियों के साथ बकरी पालन को बनाया आजीविका का मजबूत आधार, आसपास के पशुपालकों को भी मिल रहा नस्ल सुधार का लाभ*

 

*पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन, नियमित टीकाकरण और बेहतर प्रबंधन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहीं सरगुजा की अंजोला एक्का*

 

रायपुर, 14 अक्टूबर 2026/ ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन केवल पारंपरिक आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार का मजबूत आधार भी बन रहा है। शासन की योजनाओं और पशुधन विकास विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से ग्रामीण परिवार अपने पशुधन की गुणवत्ता सुधारकर आय के नए अवसर विकसित कर रहे हैं। इसकी प्रेरक मिसाल हैं सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम लोसंगी निवासी श्रीमती अंजोला एक्का, जिन्होंने छत्तीसगढ़ शासन की नर बकरा वितरण योजना का लाभ लेकर अपने पारंपरिक बकरी पालन व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाया है। कभी स्थानीय नस्ल की बकरियों के पालन से सीमित आमदनी प्राप्त करने वाली अंजोला ने शासन से मिले 4 हजार रुपये के अनुदान की सहायता से उन्नत नस्ल का बकरा खरीदा। नस्ल सुधार और पशुधन विकास विभाग के नियमित मार्गदर्शन से उनके पशुओं की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। वर्तमान में उनके पास 15 बकरा-बकरियां हैं और पिछले वर्ष उन्होंने बकरियों की बिक्री से 65 हजार रुपये की आय अर्जित की।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में पशुपालन आधारित आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। पशुधन विकास विभाग द्वारा नस्ल सुधार, टीकाकरण, कृमिनाशक दवाओं और पशुओं की वैज्ञानिक देखभाल से संबंधित सेवाएं पशुपालकों के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं। अंजोला एक्का की सफलता दर्शाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सही तकनीक और शासकीय सहायता से पारंपरिक बकरी पालन को बेहतर आय के साधन में विकसित किया जा सकता है।

 

*चार हजार रुपये के अनुदान से खरीदा उन्नत नस्ल का बकरा, बदली पशुपालन की दिशा*

 

अंजोला एक्का बताती हैं कि पहले वे स्थानीय नस्ल की बकरियों का पालन करती थीं। इन बकरियों का वजन अपेक्षाकृत कम होने के कारण बिक्री से उन्हें सीमित आमदनी प्राप्त होती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए वे बकरी पालन को आगे बढ़ाना चाहती थीं, लेकिन बेहतर नस्ल के पशुओं की आवश्यकता उनके सामने एक चुनौती थी। इसी दौरान उन्हें पशुधन विकास विभाग के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन की नर बकरा वितरण योजना की जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत उन्होंने अपनी पसंद से उन्नत नस्ल का बकरा खरीदा, जिसके लिए शासन की ओर से 4 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ।

 

उन्नत नस्ल के बकरे को अपने पशुधन में शामिल करने के बाद उन्होंने नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया। इसके परिणामस्वरूप उनकी बकरियों से पहले की तुलना में बड़े आकार के बच्चे पैदा होने लगे, जिससे पशुधन की गुणवत्ता में सुधार हुआ। बेहतर नस्ल के पशुओं से बकरी पालन की आर्थिक संभावनाएं भी बढ़ीं। अंजोला के लिए यह अनुदान केवल एक बकरा खरीदने की सहायता नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक व्यवसाय को व्यवस्थित और अधिक लाभकारी बनाने का अवसर साबित हुआ।

 

*नियमित टीकाकरण और विभागीय मार्गदर्शन से पशुओं की बेहतर देखभाल*

 

बकरी पालन में पशुओं का स्वास्थ्य और बीमारियों से बचाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। अंजोला एक्का के सामने भी पशुओं को विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रखने की चुनौती थी। पशुधन विकास विभाग द्वारा उन्हें पशुओं की देखभाल और रोगों से बचाव के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। विभाग के सहयोग से बकरियों को नियमित रूप से कृमिनाशक दवा पिलाने तथा पीपीआर और एंटरोटॉक्सिमिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण की सुविधा मिली।

 

इन सेवाओं से अंजोला को अपने पशुओं के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल करने में मदद मिली। उन्होंने बकरी पालन में नियमित निगरानी, पशुओं के उचित रखरखाव और रोगों से बचाव को प्राथमिकता दी। विभागीय मार्गदर्शन और नस्ल सुधार के संयुक्त प्रयासों से वे अपने व्यवसाय को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित कर रही हैं। उनका अनुभव बताता है कि पशुपालन में बेहतर आय प्राप्त करने के लिए केवल पशुओं की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नस्ल, स्वास्थ्य और नियमित देखभाल पर ध्यान देना भी आवश्यक है।

 

*15 बकरा-बकरियों के साथ मजबूत हुई आजीविका, पिछले वर्ष 65 हजार रुपये की आय*

 

नर बकरा वितरण योजना और पशुधन विकास विभाग के सहयोग से अंजोला एक्का के बकरी पालन व्यवसाय में सकारात्मक बदलाव आया है। वर्तमान में उनके पास कुल 15 बकरा-बकरियां हैं। उन्नत नस्ल के बकरे से पैदा होने वाले बच्चों के आकार और गुणवत्ता में सुधार होने से पशुधन की उपयोगिता बढ़ी है। इसका लाभ उन्हें बकरियों की बिक्री के माध्यम से भी मिलने लगा है। उन्होंने पिछले वर्ष बकरियां बेचकर 65 हजार रुपये की आय अर्जित की, जिससे परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग मिला।

 

अंजोला के प्रयासों की विशेषता यह है कि उनके उन्नत नस्ल के बकरे का लाभ आसपास के पशुपालकों को भी मिल रहा है। उनके बकरे से अन्य पशुपालकों की बकरियों में भी बेहतर नस्ल के बच्चे पैदा होने लगे हैं। इस प्रकार नस्ल सुधार का सकारात्मक प्रभाव उनके परिवार तक सीमित न रहकर क्षेत्र के अन्य पशुपालकों तक पहुंच रहा है। इससे ग्रामीण स्तर पर बेहतर नस्ल के बकरी पालन को प्रोत्साहन मिलने के साथ पशुपालन से आय बढ़ाने की संभावनाएं भी विकसित हो रही हैं।

 

*ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं अंजोला, पशुपालन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम*

 

अंजोला एक्का की सफलता ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच अपने पारंपरिक बकरी पालन व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रयास किया और शासन की योजना का लाभ लेकर पशुधन की गुणवत्ता में सुधार किया। आज बकरी पालन उनके परिवार की आय का महत्वपूर्ण साधन बन गया है। इससे उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी मिला है।

 

उनकी कहानी यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों और पारंपरिक आजीविका गतिविधियों को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। विशेष रूप से नस्ल सुधार, नियमित टीकाकरण और पशुओं के उचित रखरखाव से बकरी पालन की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। अंजोला का अनुभव अन्य महिलाओं और पशुपालकों को भी विभागीय सेवाओं तथा शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

 

*शासकीय सहायता और मेहनत से साकार हो रही आर्थिक आत्मनिर्भरता*

 

सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत अंजोला एक्का की सफलता की कहानी बताती है कि शासन की छोटी आर्थिक सहायता भी सही उपयोग और निरंतर मेहनत से आजीविका में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। नर बकरा वितरण योजना से प्राप्त 4 हजार रुपये के अनुदान ने उन्हें उन्नत नस्ल का बकरा खरीदने का अवसर दिया। इसके बाद पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन, नस्ल सुधार और नियमित स्वास्थ्य देखभाल से उनके बकरी पालन व्यवसाय को मजबूती मिली।

 

आज 15 बकरा-बकरियों का पालन कर रहीं अंजोला एक्का ने पिछले वर्ष 65 हजार रुपये की आय अर्जित की है। उनकी यह उपलब्धि दर्शाती है कि पशुपालन आधारित स्वरोजगार ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। सरगुजा की अंजोला एक्का ने अपनी मेहनत और शासकीय सहयोग से न केवल परिवार की आजीविका को मजबूत किया है, बल्कि आसपास के पशुपालकों के लिए भी उन्नत नस्ल के बकरी पालन की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है।

  • Related Posts

    शिवरीनारायण को विकास की बड़ी सौगात : महानदी पर 63 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनेगा नया पुल

    *मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया तीन दिवसीय शिवरीनारायण महोत्सव का शुभारंभ*   *एसटीपी प्लांट की होगी स्थापना, राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत शिवरीनारायण के विकास की घोषणा*…

    Read more

    प्रशासनिक अधिकारियों से सकारात्मक बातचीत के बाद गंगरेल बांध प्रभावितों का जल सत्याग्रह समाप्त

    तीसरे दिन सौहार्दपूर्ण माहौल में बनी आगे की बातचीत की सहमति, मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखेगा प्रभावितों का प्रतिनिधिमंडल   धमतरी, 14 अक्टूबर 2026। गंगरेल बांध के डूब प्रभावित…

    Read more

    NATIONAL

    गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की प्रचंड जीत, जनता के अटूट विश्वास और विकास की विजय : गोमती साय

    गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की प्रचंड जीत, जनता के अटूट विश्वास और विकास की विजय : गोमती साय

    ‘आतंकवादी, तुम यहां क्यों आए?’ न्यूयॉर्क में बांग्लादेशी प्रवासियों के गुस्से का सामना कर रहे मुहम्मद यूनुस

    ‘आतंकवादी, तुम यहां क्यों आए?’ न्यूयॉर्क में बांग्लादेशी प्रवासियों के गुस्से का सामना कर रहे मुहम्मद यूनुस

    VIDEO: राहुल गांधी ने डीके शिवकुमार को कॉलर पकड़कर पीछे खींचा? वायरल वीडियो पर कर्नाटक CM ने तोड़ी चुप्पी

    VIDEO: राहुल गांधी ने डीके शिवकुमार को कॉलर पकड़कर पीछे खींचा? वायरल वीडियो पर कर्नाटक CM ने तोड़ी चुप्पी

    अमित शाह की कांग्रेस को नसीहत, बोले- 14 पार्टियों की भीड़ जुटाकर राहुल गांधी देश की आवाज नहीं बन सकते

    अमित शाह की कांग्रेस को नसीहत, बोले- 14 पार्टियों की भीड़ जुटाकर राहुल गांधी देश की आवाज नहीं बन सकते

    सऊदी अरब, इजरायल, इरबिल… क्या मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था बिखर रही है?

    सऊदी अरब, इजरायल, इरबिल… क्या मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था बिखर रही है?

    14 खामियां, 220 रुपये फीस कम… सुप्रीम कोर्ट में क्यों अटकी राहुल गांधी की याचिका?

    14 खामियां, 220 रुपये फीस कम… सुप्रीम कोर्ट में क्यों अटकी राहुल गांधी की याचिका?