
Karan Dewan Birth Anniversary Special: हिंदी सिनेमा के पुराने दौर में कई ऐसे सितारे हुए, जिन्होंने अपनी एक्टिंग से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. इन्हीं में एक नाम करण दीवान का भी है. 6 नवंबर 1917 को जन्मे करण दीवान ने अपने करियर की शुरुआत फिल्मों से नहीं, बल्कि पत्रकारिता से की थी. वह कॉलेज के दिनों में उर्दू की फिल्म मैगजीन ‘जगत लक्ष्मी’ एडिट करते थे.
बाद में फिल्मों में आए और अपनी मेहनत के दम पर ऐसे स्टार बने कि उनकी करीब 20 फिल्मों ने सिल्वर जुबली मनाई. साल 1944 में आई फिल्म ‘रतन’ उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई. दिलचस्प बात यह है कि करण सिर्फ एक्टिंग ही नहीं करते थे, बल्कि फिल्मों में गाने भी गाते थे.
पत्रकारिता से शुरू हुआ था करण दीवान का सफर
करण दीवान का असली नाम दीवान करण चोपड़ा था. उनका जन्म 6 नवंबर 1917 को अविभाजित भारत के पंजाब के गुजरांवाला में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है. पढ़ाई के दौरान ही उनकी दिलचस्पी फिल्मों और पत्रकारिता में बढ़ने लगी थी. वह लाहौर में कॉलेज की पढ़ाई करते हुए उर्दू की फिल्म मैगजीन ‘जगत लक्ष्मी’ एडिट किया करते थे.
इसी दौरान उनकी मुलाकात फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर ताराचंद बड़जात्या से हुई. उनके संपर्कों की मदद से करण कोलकाता पहुंचे. साल 1939 में उन्होंने पंजाबी फिल्म ‘पूरन भगत’ से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा. इस फिल्म में उन्होंने पूरन का किरदार निभाया था. इसके बाद 1941 में वह पंजाबी फिल्म ‘मेरा माही’ में नजर आए.
बॉम्बे टॉकीज तक पहुंच गए करण दीवान
फिल्मों में काम करने की चाह उन्हें मुंबई ले आई. यहां उन्होंने बॉम्बे टॉकीज में काम पाने की कोशिश की. बताया जाता है कि करीब 1500 लोगों के बीच उनका चयन भी हुआ था, लेकिन वह बॉम्बे टॉकीज की किसी फिल्म में नजर नहीं आए.
इसके बाद उन्हें फिल्म ‘तमन्ना’ में काम करने का मौका मिला. साल 1942 में रिलीज हुई इस फिल्म में उनके साथ एक्ट्रेस लीला देसाई थीं. इसके बाद वह ‘शोभा’ और ‘स्कूल मास्टर’ जैसी फिल्मों में नजर आए. साल 1943 में आई ‘आदाब अर्ज’ में उन्होंने नलिनी जयवंत के साथ काम किया. हालांकि, शुरुआती फिल्मों से उन्हें वैसी सफलता नहीं मिली, जिसकी उन्हें उम्मीद थी.
‘रतन’ ने बदल दी करण दीवान की किस्मत
करण दीवान के करियर का सबसे बड़ा मोड़ साल 1944 में आया, जब उनकी फिल्म ‘रतन’ रिलीज हुई. एम. सादिक के निर्देशन में बनी इस फिल्म में करण दीवान के साथ स्वर्णलता नजर आई थीं. फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिला और इसने गोल्डन जुबली मनाई. यह साल 1944 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल थी.
फिल्म की सफलता ने करण दीवान को रातोंरात पहचान दिला दी. ‘रतन’ के गाने भी खूब पसंद किए गए. खास बात यह थी कि करण ने इस फिल्म में एक्टिंग के साथ गाना भी गाया था. उनका गाया गाना ‘जब तुम ही चले परदेस’ काफी लोकप्रिय हुआ. फिल्म का संगीत नौशाद ने दिया था.
इस सफलता के बाद करण दीवान की गिनती हिंदी सिनेमा के बड़े सितारों में होने लगी. साल 1945 में उनकी फिल्में ‘जीनत’ और ‘भाईजान’ भी सिल्वर जुबली हिट रहीं. उनकी करीब 20 फिल्मों ने जुबली मनाई थी. इसी वजह से उन्हें उस दौर में ‘जुबली स्टार’ के नाम से जाना जाने लगा.
राजेंद्र कुमार से पहले करण दीवान बने थे हिंदी सिनेमा के पहले सिल्वर जुबली स्टार
करण दीवान को हिंदी सिनेमा का पहला सिल्वर जुबली स्टार कहा जाता है. उस दौर में जब किसी फिल्म का 25 हफ्तों तक सिनेमाघरों में चलना बड़ी कामयाबी माना जाता था, करण दीवान ने अपनी फिल्मों से यह मुकाम हासिल किया. उनकी फिल्म ‘रतन’ (1944) ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई और इसी कामयाबी के बाद उनका नाम सिल्वर जुबली स्टार के तौर पर चर्चा में आया.
हालांकि, राजेंद्र कुमार को 1960 के दशक में ‘जुबली कुमार’ के नाम से पहचान मिली, लेकिन करण दीवान उनसे पहले ही अपनी फिल्मों की सिल्वर जुबली मना चुके थे. उनकी करीब 20 फिल्मों ने 25 हफ्तों या उससे ज्यादा समय तक सिनेमाघरों में टिककर यह कामयाबी हासिल की थी. यही वजह है कि उन्हें हिंदी सिनेमा के शुरुआती जुबली स्टार्स में खास जगह मिली.
‘रतन’ के सेट पर मिलीं जीवनसाथी मंजू
करण दीवान की निजी जिंदगी भी फिल्मों से जुड़ी रही. फिल्म ‘रतन’ में उनके साथ एक्ट्रेस मंजू ने भी काम किया था. इसी फिल्म के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं. साल 1944 में दोनों ने शादी कर ली. शादी के बाद मंजू ने फिल्मों में काम करना छोड़ दिया. दोनों के पांच बेटियां और दो बेटे थे.
जब हीरो से कैरेक्टर रोल में आने लगे करण दीवान
एक समय ऐसा भी आया जब करण दीवान को फिल्मों में पहले की तरह लीड रोल मिलने कम हो गए. इसके बाद उन्होंने कैरेक्टर रोल करना शुरू कर दिया. उन्होंने ‘दहेज’, ‘परदेस’, ‘तीन बत्ती चार रास्ता’, ‘गुमराह’, ‘अनुराग’ और ‘सीता और गीता’ जैसी फिल्मों में काम किया.
करण दीवान ने अपने करियर में 70 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. वह सिर्फ एक्टर ही नहीं, बल्कि अच्छे सिंगर भी थे. ‘रतन’ के अलावा उन्होंने ‘पिया घर आजा’, ‘मिट्टी के खिलौने’ और ‘लाहौर’ जैसी फिल्मों में भी गाने गाए.
61 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
करण दीवान ने करीब चार दशक तक फिल्मों में काम किया. 1939 में शुरू हुआ उनका फिल्मी सफर 1979 तक जारी रहा. उनकी आखिरी फिल्मों में ‘आत्माराम’ शामिल थी. 2 अगस्त 1979 को मुंबई में उनका निधन हो गया. उस वक्त वह 61 साल के थे.
आज भी पुराने हिंदी सिनेमा की बात होती है तो करण दीवान का नाम उन कलाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने पत्रकारिता से शुरुआत कर फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई. फिल्म ‘रतन’ की कामयाबी, उनके गाए गाने और जुबली हिट फिल्मों का रिकॉर्ड उन्हें हिंदी सिनेमा के इतिहास में खास जगह दिलाता है.









