
Narak Chaturdashi Abhyang Snan: दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी पर सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करने की विशेष परंपरा है. इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है. इस दिन लोग शरीर पर तिल का तेल लगाकर स्नान करते हैं.
हिंदू धर्म में मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर विधि-विधान से अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और नरक जाने का भय दूर होता है. लेकिन इस परंपरा का संबंध केवल शरीर की सफाई से नहीं है. इसके पीछे भगवान श्रीकृष्ण और राक्षस नरकासुर के वध से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है.
Abhyang Snan Ritual: क्या है अभ्यंग स्नान और क्यों लगाया जाता है तिल का तेल?
अभ्यंग स्नान का अर्थ है शरीर पर तेल लगाकर मालिश करना और फिर स्नान करना. नरक चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तिल का तेल लगाने की परंपरा है. इसके बाद उबटन लगाकर स्नान किया जाता है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन तिल के तेल से मालिश और स्नान करने से शरीर की अशुद्धियां दूर होती हैं. इसे शारीरिक और मानसिक शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है.
Narakasura Vadh Story: भगवान श्रीकृष्ण ने किया था नरकासुर का वध
के अनुसार, नरकासुर नाम का एक अत्याचारी असुर था. उसने देवताओं को परेशान करने के साथ ही 16 हजार कन्याओं को बंदी बना लिया था. उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी.
इसके बाद भगवान ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध करके नरकासुर का वध किया और बंदी बनाई गई कन्याओं को मुक्त कराया. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह घटना कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हुई थी.
नरकासुर के अंत की खुशी में लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया. इसी वजह से इस दिन को नरक चतुर्दशी कहा जाता है.
Abhyang Snan Before Sunrise: सूर्योदय से पहले स्नान करने से कैसे मिलता है नरक से छुटकारा?
धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति को नरक के भय से मुक्ति मिलती है. इस दिन स्नान करना पापों से मुक्ति और अच्छे कर्मों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.
इसके अलावा नरक चतुर्दशी पर यमराज की पूजा और दीपदान का भी विशेष महत्व है. शाम के समय घर के बाहर यमराज के नाम से दीप जलाने की परंपरा है. मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है.









