Ro no D15139/23

कम खर्च, कम शोर और ढेर सारा सुकून, इस दिवाली अपनाएं स्लो लिविंग का तरीका

Slow Living Diwali: दिवाली आते ही मन में कई तरह की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. घर की सफाई, नए कपड़ों की खरीदारी, मिठाइयों की लिस्ट, मेहमानों का स्वागत और घर को सबसे खूबसूरत बनाने की होड़. कई बार त्योहार की इन तैयारियों के बीच हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि दिवाली का असली मजा ही नहीं ले पाते.

सोचिए, अगर इस बार दिवाली थोड़ी अलग हो तो? न ज्यादा खर्च की चिंता, न सजावट का दबाव और न ही हर चीज को परफेक्ट बनाने की टेंशन. बस अपनों के साथ वक्त, घर में रोशनी और मन में सुकून. यही है ‘स्लो लिविंग’ का असली मतलब.

दिखावे से दूर, खुशियों के करीब

स्लो लिविंग का मतलब त्योहार को कम उत्साह से मनाना नहीं, बल्कि छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूंढ़ना है. इस दिवाली महंगी सजावट के बजाय घर में रखी पुरानी चीजों को नया रूप दें.

मिट्टी के दीये, फूलों की लड़ियां और हाथ से बनी रंगोली घर को खूबसूरत (Slow Living Diwali) बनाने के लिए काफी हैं. इससे खर्च भी कम होगा और त्योहार में अपनी मेहनत का रंग भी दिखेगा.

खरीदारी से ज्यादा अपनों को दें समय

हर दिवाली नए कपड़े और महंगे गिफ्ट खरीदना जरूरी नहीं है. इस बार बजट के हिसाब से खरीदारी करें. अपनों के लिए हाथ से बना गिफ्ट या छोटा-सा पौधा भी खास हो सकता है.

बच्चों के साथ मिलकर मिठाइयां बनाएं, परिवार के साथ बैठकर पुराने किस्से सुनें और दोस्तों से मिलने के लिए थोड़ा वक्त जरूर निकालें. याद रखिए, कई बार सबसे अच्छा तोहफा आपका समय होता है.

Slow Living Diwali: शोर कम करें, सुकून बढ़ाएं

दिवाली रोशनी का त्योहार है, इसलिए इसे पटाखों के शोर और धुएं से जोड़ना जरूरी नहीं. दीये जलाएं, हल्का संगीत सुनें और घर के बुजुर्गों, बच्चों व पालतू जानवरों का भी ख्याल रखें. कम शोर और साफ हवा के साथ त्योहार का आनंद कहीं ज्यादा अच्छा लगता है.

खुद के लिए भी निकालें थोड़ा वक्त

त्योहार की भागदौड़ में खुद को भूल जाना आम बात है. इस बार कुछ समय अपने लिए भी रखें. सुबह की शुरुआत चाय के साथ करें, पसंदीदा किताब पढ़ें या छत पर बैठकर दीयों की रोशनी निहारें. हर पल को कैमरे में कैद करने के बजाय उसे महसूस करें.

इस दिवाली एक छोटा-सा बदलाव करके देखें. कम खरीदें, कम भागें और ज्यादा जिएं. आखिर त्योहार की खूबसूरती महंगी चीजों में नहीं, बल्कि उन पलों में है जिन्हें हम अपनों के साथ दिल से जीते हैं.

  • Related Posts

    Chhoti Diwali 2026: आज छोटी दिवाली पर भद्रा का साया, कैसे करें पूजा और दीपदान?

    Chhoti Diwali 2026: छोटी दिवाली आज 7 नवंबर 2026, शनिवार को मनाई जा रही है. इसे  और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व दिवाली से…

    Read more

    नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले क्यों करते हैं अभ्यंग स्नान? जानें नरक से मुक्ति की धार्मिक मान्यता

    Narak Chaturdashi Abhyang Snan: दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी पर सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करने की विशेष परंपरा है. इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है.…

    Read more

    NATIONAL

    अभिषेक बनर्जी के घर पर रात 2 बजे हंगामा, आपस में भिड़े BJP-TMC समर्थक; सांसद ने लगाया फायरिंग का आरोप

    अभिषेक बनर्जी के घर पर रात 2 बजे हंगामा, आपस में भिड़े BJP-TMC समर्थक; सांसद ने लगाया फायरिंग का आरोप

    क्या सोशल मीडिया ट्रोलिंग और चरित्र हनन बनी वजह? पिता ने लगाए आरोप

    क्या सोशल मीडिया ट्रोलिंग और चरित्र हनन बनी वजह? पिता ने लगाए आरोप

    पटाखे की नगरी वाला शहर, दिवाली में ₹4 हजार करोड़ बिक्री; पर एक्सपोर्ट में चीन का क्यों है एकतरफा राज

    पटाखे की नगरी वाला शहर, दिवाली में ₹4 हजार करोड़ बिक्री; पर एक्सपोर्ट में चीन का क्यों है एकतरफा राज

    चीनी जहाज, पाकी पायलट खुदा खैर करे… हा.. हा.. हा.. हा.., वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…

    चीनी जहाज, पाकी पायलट खुदा खैर करे… हा.. हा.. हा.. हा.., वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…

    खतरे में नौकरी: गुरुजी संभल जाइए! क्लासरूम में AI की एंट्री, क्या खतरे में हैं कोचिंग टीचर्स का करियर?

    खतरे में नौकरी: गुरुजी संभल जाइए! क्लासरूम में AI की एंट्री, क्या खतरे में हैं कोचिंग टीचर्स का करियर?

    ट्रंप की परिसीमन रणनीति फेल, बीजेपी के लिए क्या है सबक? चुनावी नक्शे बदलने के बाद भी नहीं मिली जीत

    ट्रंप की परिसीमन रणनीति फेल, बीजेपी के लिए क्या है सबक? चुनावी नक्शे बदलने के बाद भी नहीं मिली जीत