
Slow Living Diwali: दिवाली आते ही मन में कई तरह की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. घर की सफाई, नए कपड़ों की खरीदारी, मिठाइयों की लिस्ट, मेहमानों का स्वागत और घर को सबसे खूबसूरत बनाने की होड़. कई बार त्योहार की इन तैयारियों के बीच हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि दिवाली का असली मजा ही नहीं ले पाते.
सोचिए, अगर इस बार दिवाली थोड़ी अलग हो तो? न ज्यादा खर्च की चिंता, न सजावट का दबाव और न ही हर चीज को परफेक्ट बनाने की टेंशन. बस अपनों के साथ वक्त, घर में रोशनी और मन में सुकून. यही है ‘स्लो लिविंग’ का असली मतलब.
दिखावे से दूर, खुशियों के करीब
स्लो लिविंग का मतलब त्योहार को कम उत्साह से मनाना नहीं, बल्कि छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूंढ़ना है. इस दिवाली महंगी सजावट के बजाय घर में रखी पुरानी चीजों को नया रूप दें.
मिट्टी के दीये, फूलों की लड़ियां और हाथ से बनी रंगोली घर को खूबसूरत (Slow Living Diwali) बनाने के लिए काफी हैं. इससे खर्च भी कम होगा और त्योहार में अपनी मेहनत का रंग भी दिखेगा.
खरीदारी से ज्यादा अपनों को दें समय
हर दिवाली नए कपड़े और महंगे गिफ्ट खरीदना जरूरी नहीं है. इस बार बजट के हिसाब से खरीदारी करें. अपनों के लिए हाथ से बना गिफ्ट या छोटा-सा पौधा भी खास हो सकता है.
बच्चों के साथ मिलकर मिठाइयां बनाएं, परिवार के साथ बैठकर पुराने किस्से सुनें और दोस्तों से मिलने के लिए थोड़ा वक्त जरूर निकालें. याद रखिए, कई बार सबसे अच्छा तोहफा आपका समय होता है.
Slow Living Diwali: शोर कम करें, सुकून बढ़ाएं
दिवाली रोशनी का त्योहार है, इसलिए इसे पटाखों के शोर और धुएं से जोड़ना जरूरी नहीं. दीये जलाएं, हल्का संगीत सुनें और घर के बुजुर्गों, बच्चों व पालतू जानवरों का भी ख्याल रखें. कम शोर और साफ हवा के साथ त्योहार का आनंद कहीं ज्यादा अच्छा लगता है.
खुद के लिए भी निकालें थोड़ा वक्त
त्योहार की भागदौड़ में खुद को भूल जाना आम बात है. इस बार कुछ समय अपने लिए भी रखें. सुबह की शुरुआत चाय के साथ करें, पसंदीदा किताब पढ़ें या छत पर बैठकर दीयों की रोशनी निहारें. हर पल को कैमरे में कैद करने के बजाय उसे महसूस करें.
इस दिवाली एक छोटा-सा बदलाव करके देखें. कम खरीदें, कम भागें और ज्यादा जिएं. आखिर त्योहार की खूबसूरती महंगी चीजों में नहीं, बल्कि उन पलों में है जिन्हें हम अपनों के साथ दिल से जीते हैं.









