
सेवा की कहानी
ईंट-सीमेंट का मकान नहीं, सुरक्षा और सम्मान का घर है श्याम बाई के लिए
धमतरी, 02 अक्टूबर 2026। बारिश की बूंदें कभी खुशी लेकर आती हैं, तो कभी किसी गरीब परिवार के लिए चिंता। कुरूद विकासखंड के ग्राम पंचायत जी जामगांव की श्रीमती श्याम बाई पटेल के लिए बारिश का मौसम लंबे समय तक राहत नहीं, बल्कि परेशानी का दूसरा नाम था। कच्ची दीवारों और जर्जर छत वाले छोटे से मकान में परिवार के चार सदस्यों के लिए हर बारिश एक नई चिंता लेकर आती थी। आज वही परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बने अपने पक्के मकान में सुरक्षित और सम्मान के साथ जीवन बिता रहा है।
श्रीमती श्याम बाई का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। परिवार के पास स्वयं की कृषि भूमि नहीं थी। पति-पत्नी दोनों मजदूरी कर परिवार की जरूरतें पूरी करते थे। सीमित आमदनी में बच्चों की पढ़ाई, भोजन और रोजमर्रा के खर्चों के बीच पक्का मकान बनाना उनके लिए वर्षों से केवल एक सपना था।
पुराना मकान परिवार की मजबूरी की तस्वीर था। मिट्टी की दीवारों वाला यह घर केवल एक कमरे का था, जिसमें पति-पत्नी और उनके बेटे-बेटी को साथ रहना पड़ता था। बारिश में कच्ची छत से पानी टपकता और दीवारों में सीलन भर जाती। मिट्टी की दीवारों में जगह-जगह चूहों के बिल होने से मकान की मजबूती भी प्रभावित हो गई थी। ऐसे में परिवार को बारिश के दिनों में सामान और बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए भी अतिरिक्त जद्दोजहद करनी पड़ती थी।
फिर योजना बनी उम्मीद की मजबूत नींव
सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत श्रीमती श्याम बाई के परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए पात्र पाया गया। ग्राम पंचायत जी जामगांव के माध्यम से उनका चयन हुआ और वर्षों से अधूरा पड़ा पक्के घर का सपना अब पूरा होने की दिशा में बढ़ा।
आवास निर्माण से पहले योजना की जानकारी और प्रक्रिया को समझने के लिए उन्होंने जनपद पंचायत कुरूद द्वारा आयोजित उन्मुखीकरण कार्यक्रम में भाग लिया। यहां उन्हें योजना के प्रावधानों, आवास निर्माण की प्रक्रिया, किस्तों के भुगतान और निर्धारित मापदंडों की जानकारी मिली। इस मार्गदर्शन से परिवार को आवास निर्माण को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने में मदद मिली।
योजना से मिली सहायता और परिवार की मेहनत ने मिलकर उस सपने को आकार दिया, जिसे कभी श्याम बाई दूर की चीज समझती थीं। धीरे-धीरे दीवारें उठीं, छत बनी और आखिरकार वह दिन आया जब परिवार ने अपने नए पक्के मकान में प्रवेश किया।
अब बारिश डराती नहीं, सुकून देती है
आज श्याम बाई का घर सिर्फ ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार बन गया है। अब बारिश में छत टपकने की चिंता नहीं होती, न ही सीलन भरी दीवारों के बीच रात गुजारने की मजबूरी है।
पक्के मकान ने परिवार को सुरक्षित छत देने के साथ ही बच्चों के लिए बेहतर वातावरण और परिवार के सदस्यों में आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। श्याम बाई के लिए यह मकान सरकारी योजना का लाभ भर नहीं, बल्कि वर्षों की चिंता के बाद मिली वह स्थायी राहत है, जिसने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है।
कभी जिस घर में बारिश की बूंदों से बचने की चिंता रहती थी, आज उसी परिवार के पास सुरक्षित छत है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने श्याम बाई के लिए सिर्फ मकान नहीं बनाया, बल्कि उनके परिवार के सपनों को एक मजबूत आधार दिया है।









