गर्मी से बेहाल ताल और अस्पताल, जनता त्रस्त, अफसर मस्त, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…
अस्पताल और ताल यानि तालाब दोनों ही जीवन के लिये अति आवश्यक हैं मगर शासन दोनों के साथ अन्य विभागों की तुलना मे कोई पक्षपात् नहीं करता। अन्य विभागों की…
Read moreलैंगिक समानता की राह में भारत की गिरावट: एक चिंताजनक संकेत -प्रियंका सौरभ
विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम) की वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट 2024 में भारत को 148 देशों में 131वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। यह न केवल दो पायदान की गिरावट…
Read moreलोकतंत्र? (संपादकीय स्थान रिक्त है) “जब कलम चुप हो जाए: लोकतंत्र का शोकगीत”
आपातकाल के दौरान अख़बारों ने विरोध में अपना संपादकीय कॉलम ख़ाली छोड़ा था। आज औपचारिक सेंसरशिप नहीं है, लेकिन आत्म-सेन्सरशिप, भय और ‘राष्ट्रभक्ति’ के नाम पर विचारों का…
Read moreदुर्घटना पीड़ितों के लिए “कैशलेस” उपचार : नीयत नेक, व्यवस्था बेकार
इस देश में जब कोई सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त होता है, तो सबसे पहले यह नहीं पूछा जाता कि ज़ख्म कितना गहरा है — पहले यह पूछा जाता है कि…
Read moreपिता का पस्त मन और पुत्रों की पश्चिमी व्यस्तता
एक पिता की विदाई, और समाज की परीक्षा” लखनऊ के एक रिटायर्ड कर्नल ने अपने बेटों को एक मार्मिक पत्र लिखकर आत्महत्या कर ली। दोनों बेटे अमेरिका में बसे…
Read moreयोग: मन की शुद्धि से मोक्ष तक का मार्ग
यदि शांति, संतोष, करुणा और संयम बोए जाएँ, तो जीवन सुंदर हो उठता है। योग हमें यह विवेक देता है कि हम क्या सोचें, क्यों सोचें, और कैसे सोचें। यही…
Read moreविकास उपाध्याय के नेतृत्व मे शराबियों का स्वागत, चखना मुफ़्त, ज़ुर्म करने वाले-सामान्यजन को सजा, सरकारी से सौहार्द्र, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी….
शराब हर दल के लिये वरदान है। इसलिये हर कोई इसके आगे दण्डवत रहता है। बस जो सत्ता में है वो इस पर प्रायः मौन समर्थन में दिखता है और…
Read moreकोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?
शिक्षा कभी एक बाज़ार नहीं थी। वह एक संबंध था – गुरु और शिष्य का। लेकिन जब से शिक्षा के क्षेत्र में कोचिंग संस्थानों का वर्चस्व बढ़ा है, तब से…
Read moreइंदिराजी 54 सैनिकों का क्या दोष था ‘पग-पग’ पर उछली ‘पग’ और गिरा ‘पग’ पर वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी…. खरी….
पग-पग (हर कदम) पर पग (पगड़ी) उछलती है और बार-बार पग (पैरों) पर गिरता है, फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आता। तात्पर्य ये है कि हमेशा दुश्मनी का…
Read moreविशेष आलेख : कॉरपोरेट जगत में व्हिसलब्लोअर्स की दयनीय स्थिति
(लेखकद्वय : परंजॉय गुहा ठाकुरता और आयुष जोशी, अनुवाद : संजय पराते) अपने कामों को उजागर करने के लिए संरक्षित और प्रशंसित होने के बजाय, भारतीय व्हिसलब्लोअर को प्रतिशोध, कानूनी…
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