कोरबा

भूविस्थापितों ने खदान में घुसकर फहराया तिरंगा, आज फिर तीन घंटे खदान बंद
कोरबा, खास खबर, छत्तीसगढ़ प्रदेश

भूविस्थापितों ने खदान में घुसकर फहराया तिरंगा, आज फिर तीन घंटे खदान बंद

  कुसमुंडा (कोरबा)। प्रशासन द्वारा रोके जाने के बावजूद सैकड़ों भूविस्थापित किसानों ने आज कुसमुंडा कोयला खदान में घुसकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया तथा तीन घंटे तक खदान बंद रखा। भूविस्थापितों द्वारा जारी आंदोलन के दौरान यह तीसरी खदान बंदी थी। तीन घंटों की खदान बंदी से एसईसीएल को फिर करोड़ों रुपयों का नुकसान उठाना पड़ा है। वर्ष 1978-2004 के दौरान कोयला खनन के लिए इस क्षेत्र में हजारों किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है, लेकिन आज भी सैकड़ों किसानों के पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार के प्रकरण लंबित हैं। इसके खिलाफ रोजगार एकता संघ और छत्तीसगढ़ किसान सभा का पिछले तीन माह से धरना जारी है। आंदोलनकारी किसानों की मांग है कि वर्ष 2004 की पुनर्वास नीति के अनुसार सभी प्रभावित किसानों को स्थायी नौकरी दी जाए। एसईसीएल प्रबंधन द्वारा प्रभावितों को ठेका देने के प्रस्ताव को उन्होंने सिरे से ठुकरा दिया है। पूर...
पुनर्वास और रोजगार की मांग पर किसान सभा ने दिया एसईसीएल को ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी
कोरबा, खास खबर

पुनर्वास और रोजगार की मांग पर किसान सभा ने दिया एसईसीएल को ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी

    छत्तीसगढ़ किसान सभा ने आज भूविस्थापितों की मांगों के सकारात्मक समाधान के लिए एसईसीएल के गेवरा क्षेत्र के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा तथा पुनर्वासित गांवों में बुनियादी मानवीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और भूविस्थापितों को नियमित रोजगार देने की मांग की। आज यहां जारी एक बयान में छग किसान सभा के कोरबा जिला सचिव प्रशांत झा ने बताया कि एसईसीएल द्वारा पूर्व में अधिग्रहित गेवरा क्षेत्र के घाटमुड़ा, बरेली, बिंझरा, कोसमंदा और जुनाडीह आदि गांवों के लोगों को अभी तक बुनियादी मानवीय सुविधाओं के साथ बसाहट नहीं दी गई है और न ही यहां के लंबित रोजगार प्रकरणों का निराकरण किया गया है। इन समस्याओं की ओर कई बार प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन ग्रामीणों की इन समस्याओं के निराकरण के प्रति प्रबंधन गंभीर नहीं है। उन्होंने बताया कि किसान सभा ने अपने ज्ञापन में इन गांवों में बिजली और पा...
रेशमी धागों से जिंदगी संवारती बिहान की दीदियां, कोसा धागाकरण बना आय का जरिया
कोरबा

रेशमी धागों से जिंदगी संवारती बिहान की दीदियां, कोसा धागाकरण बना आय का जरिया

समूह की मासिक आय 70 हजार रूपये से ज्यादा कोरबा (IMNB). राष्ट्रीय आजीविका मिशन बिहान के तहत समूह की महिलाएं कोसा फल से धागे निकालकर उन्हें रेशम बैंक में बेच कर प्रत्येक माह 70 हजार रूपये से ज्यादा का लाभ अर्जित कर रही है। अच्छी आवक होने से समूह की महिलाओं का आजीविका संवर्धन हो रहा है। कभी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही यह ग्रामीण महिलाएं रेश्म के धागों से अपनी जिंदगी संवार रही है। ग्राम पंचायत सलोरा (क) कटघोरा की महिलाएं पहले आर्थिक तंगी से जूझ रही थी। इस समस्या में निदान के लिए महिलाओं ने आरती स्वसहायता समूह का गठन किया। समूह की अध्यक्ष श्रीमती संतोषी बाई तंवर ने बताया कि समूह की महिलाएं आपस में पैसा जमा करके बचत करने में जुट गईं। जननी महिला संकुल संगठन धवईपुर द्वारा समूह के विकास हेतु चक्रिय निधि के रूप मे 15 हजार रूपये प्रदान किया गया। कोसा धागा निकालने के लिए समूह को संकुल द्वारा सा...
कोरबा माकपा ने की पुनर्वास ग्राम मनगांव एवं भैसमाखार में बसाहट सुविधाएं प्रदान करने की मांग
कोरबा, खास खबर, छत्तीसगढ़ प्रदेश

कोरबा माकपा ने की पुनर्वास ग्राम मनगांव एवं भैसमाखार में बसाहट सुविधाएं प्रदान करने की मांग

  कुसमुंडा (कोरबा)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने पुनर्वास ग्राम मनगांव एवं भैसमाखार में नियमानुसार बसाहट सुविधाएं प्रदान करने की मांग की है। इस संबंध में माकपा प्रतिनिधिमंडल ने एक ज्ञापन एसईसीएल के महाप्रबंधक को आज यहां सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि दोनों गांवों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाये रखने के लिए उनकी बसाहट को आपस में न मिलाया जाय तथा दोनों गांवों में पुनर्वास नियमों के अनुसार अलग-अलग अस्पताल, मनोरंजन गृह, श्मशान घाट, गौठान, बिजली, पानी, सड़क, देव स्थल व पार्क आदि की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। उल्लेखनीय है कि एसईसीएल कुसमुंडा अंतर्गत मनगांव की जमीन का वर्ष 1982 में एवं भैसमाखार की जमीन का वर्ष 1996 में अधिग्रहण किया गया था और दोनों गांवों को ग्राम कुचेना के पास बसाया गया था, किन्तु आज तक पुनर्वास नियमों के तहत भूविस्थापित परिवारों को दी जाने वाली...
कोरबा के अमन और धमतरी के शौर्य को मिलेगा राज्य वीरता पुरस्कार  मंत्री श्रीमती भेंड़िया की अध्यक्षता में ज्यूरी ने लिया निर्णय
कोरबा, खास खबर, छत्तीसगढ़ प्रदेश, धमतरी, रायपुर

कोरबा के अमन और धमतरी के शौर्य को मिलेगा राज्य वीरता पुरस्कार  मंत्री श्रीमती भेंड़िया की अध्यक्षता में ज्यूरी ने लिया निर्णय

  रायपुर 13 जनवरी 2022। कोरबा जिले के अमन ज्योति जाहिरे और धमतरी जिले के शौर्य प्रताप चंद्राकर का चयन राज्य वीरता पुरस्कार के लिये हुआ है। इन्हें राजधानी रायपुर में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में महामहिम राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उईके सम्मानित करेंगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद की ज्यूरी समिति ने वीरता पुरस्कारों के लिये दोनों के नामों की घोषणा की है। ज्यूरी समिति की अनुशंसा पर श्री शौर्य प्रताप चंद्राकर और े श्री अमन ज्योति जाहिरे का चयन किया गया है। इन बच्चों ने साहस का परिचय देते हुए अपनी जान की परवाह किये बगैर अपनी सूझबूझ से दूसरों की जान बचाई है। बच्चों को पुरस्कार में 15-15 हजार रूपए की नगद राशि (चेक द्वारा) प्रशस्ति पत्र और चांदी का मेडल प्रदान किया जाएगा। *अपनी जिंदगी दांव में लगा अमन ज्यो...
10 फरवरी को माकपा घेरेगी बिजली विभाग,गरीबों के बिल माफ करने एवं काटे गये कनेक्शन तत्काल जोड़ने की मांग ,प्रदर्शन को सफल बनाने गांव गांव में बैठक
कोरबा, खास खबर, छत्तीसगढ़ प्रदेश

10 फरवरी को माकपा घेरेगी बिजली विभाग,गरीबों के बिल माफ करने एवं काटे गये कनेक्शन तत्काल जोड़ने की मांग ,प्रदर्शन को सफल बनाने गांव गांव में बैठक

  कोरबा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने गरीबों के बिजली बिल माफ करने एवं काटे गये कनेक्शनों को तत्काल जोड़ने की मांग की है। पार्टी ने बिजली समस्या का समाधान न होने पर 10 फरवरी को बिजली विभाग के घेराव की भी चेतावनी दी है। आज यहां जारी एक बयान में माकपा के कोरबा जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा है कि ऐसे वक्त में, जब पूरे देश मे लॉकडाउन का सबसे बुरा असर किसानों, दिहाड़ी मजदूरों एवं गरीबों पर पड़ा है और पिछले दो सालों से वे अपनी जिंदगी को बचाने की लड़ाई लड़ रहे है, बिजली विभाग कई महीनों का एकमुश्त बिल गरीबों को थमा रहा है। बिल नहीं पटाने पर इन्हें नोटिस भेजा जा रहा है और घरों के कनेक्शन काट कर इस महामारी के समय उन्हें अंधेरे में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले लॉकडाउन में कई महीनों तक बिजली बिल के लिए रीडिंग नहीं की गई, जिसके लिए बिजली विभाग जिम्मेदार है। अब ...
एसईसीएल   भूविस्थापितों को नियमित रोजगार की मांग :  अर्धनग्न प्रदर्शन, 5 घंटा बंद रहा एसईसीएल का कुसमुंडा मुख्यालय
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एसईसीएल भूविस्थापितों को नियमित रोजगार की मांग : अर्धनग्न प्रदर्शन, 5 घंटा बंद रहा एसईसीएल का कुसमुंडा मुख्यालय

https://youtu.be/6BvaTepuomc *भूविस्थापितों को नियमित रोजगार की मांग : रोजगार एकता संघ और किसान सभा ने मिलकर किया अर्धनग्न प्रदर्शन, 5 घंटा बंद रहा एसईसीएल का कुसमुंडा मुख्यालय गेट* कोरबा। भूविस्थापित किसानों को नियमित रोजगार देने की मांग पर कुसमुंडा में चल रहा आंदोलन एसईसीएल मुख्यालय पर जबरदस्त अर्धनग्न प्रदर्शन के साथ ही 62वें दिन में प्रवेश कर गया है। प्रदर्शन के दौरान मुख्यालय के दोनों गेटों को आंदोलनकारियों ने जाम कर दिया था, जिसके कारण 5 घंटे तक मुख्यालय में आवाजाही बंद रही। पूरे प्रदर्शन में आज महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी की, जिसके कारण गेट खुलवा पाने में प्रबंधन नाकाम रहा। उल्लेखनीय है कि किसान सभा के सहयोग से रोजगार एकता संघ के बैनर पर पिछले दो माह से भूविस्थापित किसानों द्वारा आंदोलन किया जा रहा है और दो बार खदान बंदी भी की जा चुकी है। इस आंदोलन के दबाव में एसईसीएल प्...
कोरबा रोजगार की मांग पर भू विस्थापित किसान करेंगे 1 जनवरी को जंगी प्रदर्शन, किसान सभा भी होगी शामिल
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कोरबा रोजगार की मांग पर भू विस्थापित किसान करेंगे 1 जनवरी को जंगी प्रदर्शन, किसान सभा भी होगी शामिल

कोरबा। कुसमुंडा क्षेत्र के भू-विस्थापित किसान नियमित रोजगार देने की मांग पर एसईसीएल के कुसमुंडा मुख्यालय पर 1 जनवरी को जंगी प्रदर्शन करेंगे। यह जानकारी भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के सचिव दामोदर कौशिक और छत्तीसगढ़ किसान सभा के सचिव प्रशांत झा ने आज यहां दी। उल्लेखनीय है कि भूविस्थापितों को नियमित रोजगार देने की मांग पर पर पिछले दो माह से धरना दिया जा रहा है। इस बीच दो बार खदान बंदी भी की गई और आंदोलनकारी गिरफ्तार भी किये गए हैं। एसईसीएल प्रबंधन ने एक माह में उन्हें रोजगार देने का लिखित वादा किया था, लेकिन इसमें असफल रहा। रोजगार के बदले भूविस्थापितों को ठेकेदारी देने के प्रबंधन के प्रस्ताव को उन्होंने पूरी तरह ठुकरा दिया है। दामोदर कौशिक और प्रशांत झा ने कहा कि इस क्षेत्र में वर्ष 1978-2004 के मध्य भूमि का अधिग्रहण किया गया है, इसलिए तब की पुनर्वास नीति के तहत रोजगार देने की उनकी ...
कोरबा किसान आंदोलन ने बदला देश का राजनैतिक एजेंडा — तपन सेन
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कोरबा किसान आंदोलन ने बदला देश का राजनैतिक एजेंडा — तपन सेन

  कोरबा। किसान आंदोलन ने देश का राजनैतिक एजेंडा बदल दिया है। इस आंदोलन ने दिखा दिया है कि कॉर्पोरेट लूट को रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए मजदूर-किसान एकता को मजबूत बनाते हुए वर्ग संघर्ष तेज करना होगा। वर्ग संघर्ष ही समाज में बुनियादी परिवर्तन का हथियार है। पूर्व में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ भी हमने लड़ाई जीती है।                                                     अब इस लड़ाई को उसके राजनैतिक अंजाम तक पहुंचाना होगा और आगामी हर चुनाव में आरएसएस नियंत्रित भाजपा की हार सुनिश्चित करनी होगी। उक्त बातें माकपा पोलिट ब्यूरो सदस्य तपन सेन ने आज यहां पार्टी के 7वें राज्य सम्मेलन का उदघाटन करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जब शासक वर्ग अपनी जन विरोधी नीतियों के कारण अलगाव की स्थिति में जाता है, तो वह आम जनता को विभाजित करने की कोशिश करती है। आज यही खेल सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करके भाजपा-आरएसएस खेल ...