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महिला विरोधी सोच का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार यदि सत्ता में रहेगी, तो प्रशासन क्यों संवेदनशील होगा?
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महिला विरोधी सोच का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार यदि सत्ता में रहेगी, तो प्रशासन क्यों संवेदनशील होगा?

शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान 2021 में बोलते हुए अखिल भारतीय जनवादी की केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुश्री संध्या शैली ने अनेक संवैधानिक प्रावधानों और संरक्षणों के बावजूद महिलाओं और दलितों पर बढ़ते अत्याचारों की वजहें गिनाई। मध्यप्रदेश में दलितों और महिलाओं के साथ हुए अत्याचारों की कोई दर्जन भर ताज़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार केवल लैंगिक ही नहीं होते हैं, बल्कि एक खास सामंती महिला विरोधी विचारधारा को व्यवहार में लाया जा रहा होता है। इसी तरह दलितों का उत्पीड़न भी उसी विचारधारा के अभिषेक के लिए होता है। इसके लिए सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने को अधूरा और अपर्याप्त बताते हुए उन्होंने कहा कि जब सरकार की ही मंशा कानूनों के सही क्रियान्वयन की नहीं होती, तो बनावट से ही दमनकारी और प्रशिक्षण से निरंकुश बनाई गयी नौकरशाही भी उन्हें लागू करने में दिलच...
28 जुलाई पूण्यस्मृति के अवसर पर विशेष लेख   म प्र–छ ग में आधुनिक खेती के प्रणेता, सरबदा वाले— कृषि रत्न दाऊ कल्याण सिंह सोनवानी
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28 जुलाई पूण्यस्मृति के अवसर पर विशेष लेख म प्र–छ ग में आधुनिक खेती के प्रणेता, सरबदा वाले— कृषि रत्न दाऊ कल्याण सिंह सोनवानी

  मध्यभारत में स्थित छत्तीसगढ़ का यह क्षेत्र, पुराने समय से ही सारे संसार मे *धान के कटोरा* के नाम से प्रसिद्ध है। *यहाँ विश्व मे सबसे ज्यादा, 21--22 हजार धान की किस्मे पायी जाती हैं।।* छ ग के धरतीपुत्र किसानों के मेहनत से उत्पादित धान-चावल से देश के अन्य भागों के अतिरिक्त विदेशों में भी लोग अपनी क्षुधा शांत करते हैं।। फिर भी यह दुर्भाग्य ही था कि इस धान के कटोरे, छ ग प्रदेश में भुखमरी थी, लाखों लोग देश के विभिन्न भागों में पलायन करते थे ।। इसके कई कारण थे।। खेती योग्य जमीन का असमान वितरण, खेती के पुराने तरीके, उन्नत खाद - बीज, मशीनों और तकनीकों का प्रचलन में नही होना, सिंचाई के साधनों का अभाव आदि आदि....।। यही स्थिति कमोबेश देशभर में थी।। जब पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी शासन में आयीं, तो उन्होंने इस स्थिति से निपटने के लिये- *सुप्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक और देश मे ह...
बघेल,बाबा, बृहस्पति ये तीन बी का विवाद गर्भ में है क्या विवाद रूपी नवजात गर्भ से बाहर जन्मेगा या फिर गर्भ में ही पात हो जाएगा
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बघेल,बाबा, बृहस्पति ये तीन बी का विवाद गर्भ में है क्या विवाद रूपी नवजात गर्भ से बाहर जन्मेगा या फिर गर्भ में ही पात हो जाएगा

वरिष्ठ पत्रकार अमित मिश्रा राजनीतिक विश्लेषक है राजस्थान और पंजाब के बाद सियासी घमासान छत्तीसगढ़ पहुंच गया है और प्रदेश की राजनीति का सियासी पारा हाई है टी एस सिंहदेव और बृहस्पत सिंह का विवाद सदन के रास्ते भूपेश और दिल्ली हाईकमान तक जा पहुंचा है , क्योंकि पिछले कुछ महीनों से ढाई-ढाई साल का सत्ता हस्तांतरण को लेकर भूपेश बघेल और बाबा के बीच लम्बी खाई बन गई है जिसपर कल विधानसभा में टी एस सिंहदेव ने यह कहकर सदन को चोंका दिया कि "बस बहुत हो गया मैं भी इंसान हूँ मेरे चरित्र को सब जानते हैं, लेकिन कुछ ऐसी बातें बताने की कोशिश की गई,जो लोगों के सामने नहीं है, मेरे बारे में जब तक शासन की तरफ से इश्पष्ट जवाब नहीं आता मैं इस पवित्र सदन में रहने के लायक खुद को नहीं मानता और सदन से बाहर निकल गए और यहां तक अपने सरकारी बंगले को ताला जड़ दिया इसका मतलब यही है कि लड़ाई अब खुलकर दोनो के बीच होते हुए जनता के...
मखौल बनाना काफी नहीं, झूठ के सांड को सींग से पकड़ना होगा
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मखौल बनाना काफी नहीं, झूठ के सांड को सींग से पकड़ना होगा

*(आलेख : बादल सरोज) "ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुयी।" सरकार ने संसद में सीना तानकर बोला। "पेगासस से जासूसी!! हमे नहीं पता -- कब, किसने, क्यों और किसकी कराई।" हर बड़कू और छुटकू यही जवाब पेले पड़ा है। इस जासूसी के कालखण्ड में सूचना प्रौद्योगिकी के मंत्री रहे नकफुलेजी ने कहा कि "आतंकवाद से बचाव के लिए किये गए उपायों पर संसद में चर्चा करना देशहित में नहीं !!" मतलब? क्या सुप्रीम कोर्ट के जज, खुद मोदी के मंत्री, दो-चार महामहिम और गोगोई पर यौन दुराचरण का आरोप लगाने वाली स्त्री आतंकवादी मामलों में संदिग्ध थे? आप चौंकते रहिये इन झूठों पर - उन्हें इनकी कारगरता पर पक्का भरोसा है। तभी तो ज़रा सी बारिश में ही घुटनों-घुटनों डूबी वाराणसी में मोदी जी "यूपी के यशस्वी, उर्जावान और कर्मठ मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी" का गुणगान और स्तुति करते हुए उनकी ऐसी-ऐसी "उपलब्धियाँ" गिना रहे थे...
आपदा को अवसर में बदला कोरोनाकाल की कैद में सौरभ दम्पति ने रची तीन पुस्तकें
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आपदा को अवसर में बदला कोरोनाकाल की कैद में सौरभ दम्पति ने रची तीन पुस्तकें

(डॉ सत्यवान सौरभ एवं प्रियंका सौरभ आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है, एक दोहाकार के रूप में जहां उनकी दोहा सतसई ‘तितली है का खामोश’ के अलावा हजारों दोहे प्रकाशित हो चुके हैं, वह दैनिक स्तंभकार के रूप में राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में समसामयिक विषयों संपादकीय पृष्ठों पर पर प्रमुखता से प्रकाशित हो रहे हैं। ) कोरोनाकाल की कैद ने उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर स्तंभ लेखन के लिए प्रेरित किया, जिसमें उनकी पत्नी प्रियंका तथा परिजनाें का बहुमुखी योगदान रहा। दोहा संग्रह तितली है खामोश , व्यंग्य आंध्या की माख़ी राम उड़ावै और निबंध नए पंख डॉ सत्यवान सौरभ एवं प्रियंका सौरभ की कोरोना काल में रची नयी कृतियाँ है जिनके अंश आये दिन देश-विदेश की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं. माता कौशल्या तथा पिता रामकुमार के आदर्शों से प्रेरित होकर रचनात्मक लेखन में पदार्पित हुए डॉ.सौरभ मानते क...
मृत्यु महोत्सव के बाद टीका उत्सव : देश के साथ छल, छद्म और कपट की राजनीति
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मृत्यु महोत्सव के बाद टीका उत्सव : देश के साथ छल, छद्म और कपट की राजनीति

*(आलेख : बादल सरोज)* महामारी की तीसरी लहर के आने की आशंकाओं, जिसकी अब डेल्टा वैरिएंट के नाम पर पहचान तथा अधिकृत पुष्टि भी हो गयी है, के बीच जनता को किसी भी तरह की राहत देने से मोदी सरकार ने सीना ठोंक के मना कर दिया है। जो खुद किसी राष्ट्रीय आपदा से कम नहीं है, वह मोदी सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन क़ानून के बाध्यकारी प्रावधानों से भी मुकर गयी है। कोरोना को बाहर से आयी और लगातार आने वाली विपदा बताकर एक तरह से उसने इसे महामारी या राष्ट्रीय आपदा तक मानने से भी इंकार कर दिया है। जिस देश में इस महामारी के कालखण्ड में करीब 50 लाख से ज्यादा मौतें हुयी हों, (गुजरात से मध्यप्रदेश तक मौतों की असली संख्या को छुपाने के आपराधिक धतकरम हर रोज उजागर हो रहे हैं, किन्तु इसके बाद भी सरकारी आंकड़ा अभी 4 लाख तक भी नहीं पहुंचा है।) घर के कमाने वालों की मौतों के चलते लाखों परिवारों को दो जून के खाने और जिंदगी बच...
अकादमिक स्वतंत्रता की आड़ में अपने ही देश के खिलाफ युद्ध
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अकादमिक स्वतंत्रता की आड़ में अपने ही देश के खिलाफ युद्ध

डा समन्वय नंद हैदराबाद स्थित टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेस (टीस) की एक छात्रा का शोध पत्र इन दिनों विवादों में हैं । इस शोध पत्र के शीर्षक पर दृष्टि डालें । शीर्षक इस प्रकार का है – “एंजेंडरिंग कनफ्लिक्ट अंडरस्टैंडिग द इंपैक्ट आफ मिलिटाराइजेशन, कनफ्लिक्ट एंड पैंडेमिक- इंड्युस्ड लाक डाउन आन डोमेस्टिक वायोलैंस इन इंडिया आकुपायेड कश्मीर ”। इस शोध पत्र के शीर्षक में ‘कश्मीर’ को ’भारत अधिकृत कश्मीर’ के रुप में उल्लेख किया गया है । इस शोध पत्र का शीर्षक तो चौकाने वाला है ही लेकिन इसके अंदर जो लिखा गया है और उसके बारे में  जो जानकारियां  मिल रही हैं,वह और भी चौकाने वाली हैं ।  इस शोध पत्र में  स्वतंत्रता के बाद जम्मू कश्मीर में किये गये हमले को स्वतत्रता संग्राम बताया गया है । इसमें कहा गया है कि जम्मू कश्मीर में स्वतंत्रता संग्राम में स्वतंत्रता सेनानियों को पाकिस्तान का सहयोग प्राप्त हुआ ...
अंतराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर विशेष लेख नियमित योग से सँवारे अपना जीवन
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अंतराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर विशेष लेख नियमित योग से सँवारे अपना जीवन

इस जीवन में हर मनुष्य चाहता कि वह स्वथ्य रहे निरोग रहे। पर वर्तमान समय में मनुष्य निरंतर भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में उलझकर रह गया है। मनुष्य अपने दैनिक दिनचर्या में सही वक्त में वो हर काम नहीं कर पाता जो उसे करना चाहिए। वह केवल अपने जीविका के लिए निरंतर दिन रात दौड़ते भागते रहते हैं। पर क्या उसकी जीवनशैली में परिवर्तन आते है और उसका जीवन खुशमय हो जाता है। नहीं वे धनोपार्जन करते-करते वह अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो रहे हैं। आज के समय में किसी के पास स्वयं के लिए वक्त नहीं है। आप अधिकतर लोगों से सुनते है कि मेरे पास वक्त नहीं है। वक्त तो किसी के पास नहीं होता पर वक्त निकालना पड़ता है। व्यक्तियों ने अपने आप को सीमित कर लिया है। निरोगी लिए एक श्लोक प्रचलित है- व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखं। आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥ इसका भावार्थ है- व्यायाम ...
हरियाणा में सरकारी भर्ती परीक्षा में 5-10-20 नम्बर देना सीधा अत्याचार है.
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हरियाणा में सरकारी भर्ती परीक्षा में 5-10-20 नम्बर देना सीधा अत्याचार है.

( सभी रिजर्वेशन के बाद मेरिट ही एकमात्र आधार होना चाहिए चयन का लेकिन जब ओपन केटेगरी में भी 5-10-20 अंक सोसिवेकनोमिक के आ जाएं तो मेरिट कहाँ जाए? पति नौकरी पर है तो क्या पत्नी की प्रतिभा को नोच लिया जाये अगर वो गरीब घर से पढ़- लिखकर आई हो और नौकरी वाले आदमी से शादी कर ली तो उसको कोई हक नहीं कि वो भी अपनी मेहनत से नौकरी लगे. आपका भाई नौकरी पर है तो क्या आप उसकी सैलरी पर क्लेम करके अपना खर्चा पानी ले सकते हो कोर्ट में? आपका उत्तर नहीं होगा। अगर नहीं तो वो भाई पहले से अलग है या नौकरी के बाद अलग हो गया क्या वो आपके बच्चो का पालन पोषण कर देगा? अगर नहीं तो फिर बाकी को क्यू नुकसान हो रहा है?) हमारे सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि मेरिट का उल्लघन कर सरकारी नौकरी देना संविधान का सीधा उल्लघन है और नाजायज है लेकिन दिल्ली से लगे हरियाणा में तो यह हर पल हो रहा है (आर्थिक)आधार पर रिजर्वेशन होने के बावज...
अजब गजब मध्यप्रदेश : जिंदगी में कभी शुमार नहीं हुये, अब मौत में भी गिनती में नहीं
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अजब गजब मध्यप्रदेश : जिंदगी में कभी शुमार नहीं हुये, अब मौत में भी गिनती में नहीं

    *(आलेख : बादल सरोज)* भाजपा और उसकी सरकारों का सचमुच में कोई सानी नहीं है। आप एकदम अति पर जाकर इनके द्वारा किये जाने वाले खराब से खराब काम की कल्पना कीजिये, वे अगले ही पल उससे भी ज्यादा बुरा कुछ करते हुए नजर आएंगे। आप उनके आचरण की निम्नतर से निम्नतम सीमा तय कीजिये, वे पूरी ढिठाई के साथ उससे भी मीलों नीचे का बर्ताव करते पाए जायेंगे। लगता है जैसे इस पार्टी ने झूठ, फरेब और छल की सारी सीमाएं लांघना और इस मामले में अपने ही रिकार्ड्स को तोड़ना अपना लक्ष्य बनाकर रखा हुआ है। संसदीय लोकतंत्र या सूचित, लोकतांत्रिक, सभ्य समाज के हर नियम, हर परम्परा को तोड़ना जैसे इनका सबसे प्राथमिक मिशन है। यह सिर्फ एक तरह की लत भर नहीं है, वह तो है ही, सैडिस्ट - परपीड़क - सिंड्रोम भी है ; इन्हे जनता को दुखाने में ही सुख मिलता है। इस मामले में वे अखाड़े में पूर्णतः आश्वस्त होकर उतरते है, क्योंकि फ़िल...