Wednesday, December 7

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*गुजरात चुनाव और ‘2002 का सबक’!* *(आलेख : राजेंद्र शर्मा)*
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*गुजरात चुनाव और ‘2002 का सबक’!* *(आलेख : राजेंद्र शर्मा)*

  आखिरकार, अमित शाह ने सार्वजनिक रूप से 2002 के गुजरात के मुस्लिम-विरोधी नरसंहार के कर्ता या प्रायोजक के नाते, मोदी की भाजपा के लिए गुजरात के लोगों से वोट की मांग कर ही डाली। गुजरात के चुनाव के लिए प्रचार के अखिरी चरण में, मोदी के निर्विवाद नंबर-दो और देश के गृहमंत्री, अमित शाह ने खेड़ा जिले के महुधा शहर में एक चुनावी रैली में इसके श्रेय का दावा किया कि 2002 में मोदी जी के राज में ‘‘सबक सिखाया गया था’’, जिसके बाद से ‘उन’ तत्वों ने ‘वह रास्ता छोड़ दिया। वे लोग 2002 से 2022 तक हिंसा से दूर रहे। इस तरह मोदी के राज ने ‘गुजरात में स्थायी शांति कायम की है!’ कहने की जरूरत नहीं है कि वह इस ‘गर्वपूर्ण’ रिकार्ड के बल पर, दिसंबर के पहले सप्ताह में होने जा रहे मतदान में मोदी की भाजपा को एक बार फिर जिताने की गुजरात के लोगों से अपील कर रहे थे, ताकि 2002 के ‘‘सबक’’ से कायम हुई शांति को पांच साल औ...
वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की बेबाक कलम ,,,सीधे रस्ते की टेढ़ी चाल,,अवसरवादी नेता विचलित, बड़े बेकरार किसे मिले शिकस्त, किसे गले पड़ेंगे ‘हार’
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वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की बेबाक कलम ,,,सीधे रस्ते की टेढ़ी चाल,,अवसरवादी नेता विचलित, बड़े बेकरार किसे मिले शिकस्त, किसे गले पड़ेंगे ‘हार’

वरिष्ठ पत्रकार,चिंतक, लेखक             जवाहर नागदेव  सीधे रस्ते की टेढ़ी चाल अवसरवादी नेता विचलित, बड़े बेकरार किसे मिले शिकस्त, किसे गले पड़ेंगे ‘हार’ कुमारी शैलजा को कांग्रेस ने प्रभारी बनाया है। यानि कि चुनाव की पूरी तैयारी। छत्तीसगढ़ ही एकमात्र उम्मीद। यदि यहां हार गये तो पूरे देश ही नहीं, विश्व भर में कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगी कांग्रेस। किसी समय यत्र-तत्र सर्वत्र छाए रहने वाली कांग्रेस को एक-एक स्टेट बचाने के लिये भारी जद्दोजेहद करनी पड़ी है, फिर भी वो नाकामयाब है। आश्चर्य है कि ऐसी स्थिति मंे भी अपनी बची-खुची साख बचाने के लिये कांग्रेस ‘उतनी’ एक्टिव नहीं हो पा रही है ‘जितनी’ होनी चाहिये। पुराने ढर्रे में सुधार ‘उतना’ नहीं हो पा रहा है ‘जितना’ होना चाहिये। निस्संदेह छत्तीसगढ़ में कई अच्छे काम वर्तमान कांग्रेस सरकार ने किये है और इनका भरपूर प्रचार भी किया है। यहीे कारण है कि ...
ढाई दिन की बदशाहत क्या बदशाहत नहीं होती! (व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)
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ढाई दिन की बदशाहत क्या बदशाहत नहीं होती! (व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)

देखा ना, मोदी विरोधियों की एंटीनेशनलता खुलकर सामने आ ही गयी। इनसे दुनिया पर भारत की बादशाहत तक नहीं देखी जा रही। उसमें भी पख लगाने लगे। बताइए, जब तक जी-20 की अध्यक्षता नहीं आयी थी, तब तक तो कह रहे थे कि अपना नंबर कब आएगा। इंडोनेशिया तक का नंबर आ गया, अपना नंबर कब आएगा? और अब मोदी जी दुनिया की बादशाहत ले आए हैं, तो भाई लोग कह रहे हैं कि जी-20 की अध्यक्षता तो इकदम्मे टेंपरेरी है। अग्निवीर से भी ज्यादा टेंपरेरी -- सिर्फ एक साल के लिए। और वह भी रोटेशन से। आज टोपी एक के सिर, तो कल वही टोपी किसी और के सिर। टोपी मत देखो, टोपी के नीचे का सिर देखो, जो हर साल बदलता रहता है। वह भी अपने आप। न ज्यादा जोश से सिर लगाने से टोपी, उसी सिर से चिपकी रह जाएगी और न लापरवाही से पहनने से, टैम पूरा होने से पहले उडक़र टोपी किसी और के सिर पर जाकर बैठ जाएगी। अव्वल तो टोपी है, उसे किसी का बादशाहत मानना ही गलत है। फिर भ...
*राम जी अकेले ही भले*  *(व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)*
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*राम जी अकेले ही भले* *(व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)*

  विरोधियों ने क्या हद्द ही नहीं कर दी। कह रहे हैं, बल्कि भगवा-भाइयों से पूछ रहे हैं और अकेले-दुकेले में नहीं, सारी पब्लिक को सुनाकर पूछ रहे हैं कि सीता जी को क्यों भुला दिया? जय सिया राम में से सिया को बाहर का रास्ता क्यों दिखा दिया? सिया को हटाकर, सिर्फ राम को ही जैकारे के लायक कैसे बना दिया! पहले तो हमेशा जुगल जोड़ी का ही जैकारा होता था, जोड़ी तोडक़र राम जी को अकेला क्यों करा दिया? और यह भी कि अगर सीता को बाहर ही करना था, अकेले-अकेले राम जी को ही याद रखना था, तो भी श्रीराम ही क्यों? मुसीबत में राम को ही पुकारना है, तो गांधी की तरह, हे राम कहकर क्यों नहीं पुकारते! जब यूपी वाले पाठक जी और मौर्या जी ने एक ही बात कही है, तो उनका जवाब तो एकदम मुंहतोड़ ही होगा। फिर जवाब देने वाले सिर्फ पाठक जी और मौर्या जी ही थोड़े ही हैं, राम जी की अपनी यूपी के डिप्टी सीएम लोग हैं। और दो डिप्टी मिल...
गंगा किनारे हिलोरें लेता तमिल प्रेम का पाखंड (आलेख : बादल सरोज)
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गंगा किनारे हिलोरें लेता तमिल प्रेम का पाखंड (आलेख : बादल सरोज)

पिछले सप्ताह बनारस में गंगा किनारे, तमिलनाडु से चुन–चुनकर बुलाये गए 2500 अपनों के बीच बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि "काशी भारत की सांस्कृतिक राजधानी है, जबकि तमिलनाडु और तमिल संस्कृति भारत की प्राचीनता और गौरव का केंद्र है।" उन्होंने बताया कि "संस्कृत और तमिल दोनों सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक हैं, जो अस्तित्व में हैं। तमिल की विरासत को संरक्षित करने और इसे  समृद्ध करना 130 करोड़ भारतीयों की जिम्मेदारी है। अगर हम तमिल की उपेक्षा करते हैं तो हम राष्ट्र का बहुत बड़ा नुकसान करते हैं और अगर हम तमिल को प्रतिबंधों में सीमित रखते हैं, तो हम इसे बहुत नुकसान पहुंचाएंगे। हमें भाषाई मतभेदों को दूर करने और भावनात्मक एकता स्थापित करने के लिए याद रखना होगा।" वे वाराणसी में एक महीने तक चलने वाले 'काशी तमिल संगमम'' का उद्घाटन करते हुए यह सब अच्छी बातें बोल रहे थे। इतना ही नहीं, इसी ...
राजधानी दिल्ली को लीलता पर्यावरण प्रदूषण) बुजुर्गों और बच्चों के लिए सर्वाधिक खतरनाक प्रदूषणl
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राजधानी दिल्ली को लीलता पर्यावरण प्रदूषण) बुजुर्गों और बच्चों के लिए सर्वाधिक खतरनाक प्रदूषणl

अब सिर्फ इसी की कसर रह गई थी कि भारत का दिल, दिल्ली विश्व में सर्वाधिक प्रदूषित शहर माना जा रहा है l इसके बाद बांग्लादेश का ढाका शहर आता है l दिल्ली का वायु प्रदूषण करोना से भी ज्यादा स्थाई खतरा माना जा रहा है। बच्चे और बुजुर्गों के लिए खासकर उनकी स्वास नलियों तथा फेफड़ों में प्रदूषण के छोटे-छोटे कणों से उनके वायु तंत्र को अवरुद्ध कर कर उन्हें बीमार बना देते हैं। यह एक गंभीर समस्या हैl पर्यावरण प्रदूषण खासकर वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मुंबई, कोलकाता और अन्य राज्यों की राजधानी में खासकर शीतकाल में अत्यंत चिंताजनक स्थिति पैदा हो जाती है। गर्मियों में प्रदूषण तथा गर्मी लोगों को बुरी तरह संक्रमित करती है। दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश के 8 बड़े शहर का पर्यावरण प्रदूषण खासकर वायु प्रदूषण खतरे के निशान से काफी ऊपर जा चुका है, अस्थमा तथा फेफड़े की बीमारियों के मरीज की संख्या म...
आरती श्री संविधान जी की … (आलेख : राजेंद्र शर्मा)
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आरती श्री संविधान जी की … (आलेख : राजेंद्र शर्मा)

राष्ट्रपति जी ने यह ठीक नहीं किया। संविधान दिवस का मौका था तो क्या हुआ, उन्हें मोदी की बात नहीं काटनी चाहिए थी। संविधान में उनकी कुर्सी सबसे ऊंची होने से क्या हुआ, उन्हें पीएम जी के कहे से बाहर नहीं जाना चाहिए था। बताइए, मोदी जी ने संविधान दिवस पर पब्लिक को उसके असली कर्तव्यों की याद दिलायी। पब्लिक को उसके कर्तव्यों की याद ही नहीं दिलायी, उसे इसका ज्ञान भी दिया कि अब जब अमृतकाल चल निकला है, पब्लिक का एक ही सबसे बड़ा काम है –कर्तव्यों का पालन करना। और कर्तव्यों में सबसे बड़ा कर्तव्य है, जय-जयकार करना और ऐसे जय-जयकार करना कि दुनिया सुने और कहे कि देश हो, तो ऐसा। सारी दुनिया के राज करने वाले सुनकर रश्क करें -- राज हो, तो मोदी जी जैसा। अब कामन सेंस की बात है कि मोदी जी के कर्तव्य का महत्व बताने से भी कोई सब तो अपने आप कर्तव्य का पालन नहीं करने लग जाएंगे। उल्टे पहले की तरह बहुत से तो अमृत काल म...
करेंगे तो कहोगे कि करता है! (व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)
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करेंगे तो कहोगे कि करता है! (व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)

अब क्या सुप्रीम कोर्ट को भी क्या मोदी विरोधियों वाली बीमारी लग गयी है। बताइए, मोदी जी जो भी करें, उसी से दिक्कत है। चुनाव आयोग में सीट छ: महीने से ज्यादा खाली रखी, तो प्राब्लम कि सीट इतने दिन खाली क्यों रखी। अब जब ताबड़तोड़ अरुण गोयल साहब को चुनाव आयोग में बैठाया है, तो कहते हैं कि ऐसी बिजली की–सी तेजी कैसे? इसमें कोई गड़बड़ी तो नहीं है! सरकार से अपाइंटमेंट की फाइल तलब कर के माने। पीएम जी करेंगे, तो भी कहेंगे कि करता है! खैर! जब देसी विपक्ष वाले ही नहीं, दुनिया भर के विरोध करने वाले भी, मोदी जी को करने से नहीं रोक पाए, तो सुप्रीम कोर्ट क्या ही रोक लेगा। मोदी जी न रुकेंगे, न झुकेंगे और करने के पथ से पीछे कभी नहीं हटेंगे। और भाई जब करने वाला करता है, तो जाहिर है कि अपने मन की ही करेगा। आखिर, 130 करोड़ लोगों ने और किस लिए चुना है; दूसरों के मन की करने के लिए! दूसरों की मुंहदेखी करने की उम्...
वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक,गुजरात की राजनीति में चाणक्यो और उनके प्यादों की बन्दर गुलाटी , पप्पू की पदयात्रा , गप्पू की गप्प ,
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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक,गुजरात की राजनीति में चाणक्यो और उनके प्यादों की बन्दर गुलाटी , पप्पू की पदयात्रा , गप्पू की गप्प ,

चंद्र शेखर शर्मा 【पत्रकार 】9425522015 गुजरात की राजनीति में चाणक्यो और उनके प्यादों की बन्दर गुलाटी , पप्पू की पदयात्रा , गप्पू की गप्प , केजरी की चाल के ख्वाबो में खोया ही था कि - “ सुनते हो जी आप पहले जैसे नहीं रह गए ...!” श्रीमती जी की मधुरवाणी सुन तंद्रा टूटी । श्रीमती जी ने एक वाक्य में अविश्वाश प्रस्ताव ला दिया । घर की सरकार संकट में देख हम घबराए हड़बड़ाए फिर सम्हलते हुए कहा “पगली हमारी सरकार के गठबंधन के 25 साल बाद ऐसा क्यूं कर महसूस हुआ ..? " हमारी गठबंधन की सरकार के मिनिमम प्रोग्राम में आखिर कमी क्या रह गई । शिवसेना की तरह थोड़ी तल्खी क्या दिखाई दाम्पत्य जीवन की शांति सीमा खतरे में पड़ गई , बात चचा भतीजे सरीखी बिगड़ती इसके पहले ही हमने बात सम्हालते हुये थोड़ी चापलूसी भरे अंदाज़ में कहा “ देख प्रिये मैं गाय जैसा सीधा सादा घर से ऑफ़िस , ऑफिस से घर तक का वास्ता रखने वाला बैल सरीखा दौड़ ल...
श्रद्धा के गिद्ध-भोज के लिए जुटान (आलेख : बादल सरोज)
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श्रद्धा के गिद्ध-भोज के लिए जुटान (आलेख : बादल सरोज)

दिल्ली के महरौली में 27 वर्ष की युवती श्रद्धा वाल्कर के साथ हुयी वीभत्सता ने पूरे देश के इंसानों को सन्न और स्तब्ध करके रख दिया है। उसकी पहले निर्ममता के साथ हत्या की गयी, उसके बाद उसके शरीर टुकड़े–टुकड़े करके अलग–अलग दिन इधर–उधर फेंक दिए गए। हत्यारा - जो श्रद्धा का लिव इन पार्टनर - था, गिरफ्तार कर किया जा चुका है। श्रद्धा नहीं हैं "यत्र नारी पूज्यन्ते तत्र रमन्ते देवता" का जाप करने वाले देश में अकेलीl केवल नवम्बर महीने में, अभी तक, इस तरह की 5 वारदातें घट चुकी हैं। इसी दिल्ली के बदरपुर में एक 22 साल की लड़की आयुषी की पहले निर्ममता से पिटाई की गयी और उसके बाद सीधे सीने में गोली मारकर हत्या करके लाश को ठिकाने लगाने के लिए लाल रंग के सूटकेस में बंद कर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना एक्सप्रेस वे पर छोड़ दिया गया। आयुषी का अपराध अपनी पसंद का जीवन साथी चुनना था और उसके साथ यह वारदात अंजाम...