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12 वर्ष के शिवम सुरेश नांदवाल के लिए दुनिया उसका कैनवास है
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12 वर्ष के शिवम सुरेश नांदवाल के लिए दुनिया उसका कैनवास है

( हिसार की रहने वाली लेखिका और रेडियो एंकर उनकी माँ बिदामो देवी ने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों में रचनात्मकता को सही माहौल प्रदान करके और उनके जुनून में शामिल होने की अनुमति दें। “हर छोटे से प्रोत्साहन से बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है। हमें अपने बच्चों के लिए घर में सकारात्मक माहौल बनाना चाहिए। शिवम के चित्रों से मुझे उम्मीद है कि समय बेहतर होगा, ”उन्होंने कहा। ) कई छात्रों की तरह लार्ड शिवा हाई स्कूल, लुदास, हिसार के एक छात्र शिवम सुरेश नांदवाल (12) को भी अपने मित्रों और स्कूल से अलग होना पड़ा जब स्कूल लगातार दूसरी बार नहीं खुले। वह उन अनगिनत बच्चों में से एक है जिन्हें स्कूल जाने वाले छात्रों के साथ-साथ परस्पर मित्रता एवं विश्‍वास की भावना पर भी हारना पड़ा है। लेकिन उन्होंने एक अंतर बनाने के लिए चुना और लॉकडाउन की गिनती को चैलेंज कर दिया। शिवम, एक प्रतिभाशाली कलाक...
देश को आज फिर एक सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता है।
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देश को आज फिर एक सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता है।

  (भारत अब सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की चपेट में है। भीड़ वाले कब्रिस्तानों में कोविड के अंतिम संस्कार के वीडियो के साथ सोशल मीडिया फीड भरा हुआ है, हांफते हुए मरीजों को ले जाने वाली एंबुलेंस की लंबी कतार, मृतकों के साथ बहने वाले मोर्टार, और अस्पतालों के गलियारों और लॉबियों में कभी-कभी मरीज़, दो से ज्यादा एक बिस्तर पर। ) भारत महामारी की दूसरी लहर के साथ जूझ रहा है जिसने दुनिया भर में 2020 तक पूरी तरह तबाह कर दिया है। हमारे देश में कई संकट देखे गए जिनमे बड़े पैमाने पर अंतर और अंतर-प्रवासन, खाद्य असुरक्षा, और एक ढहता हुआ स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा। अब दूसरी लहर ने मध्यम और उच्च वर्ग के नागरिकों को भी अपने घुटनों पर ला दिया है। आर्थिक पूंजी, सामाजिक पूंजी के अभाव में, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँचने में अपर्याप्त साबित हुई है। आज बीमारी सार्वभौमिक है, लेकिन स्वास्थ्य सेवा नहीं है। ...
वामपंथी छात्र राजनीति के नींव के पत्थर,पत्रकार कामरेड गणेश तिवारी,याद रहेगा मुस्कराता चहेरा
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वामपंथी छात्र राजनीति के नींव के पत्थर,पत्रकार कामरेड गणेश तिवारी,याद रहेगा मुस्कराता चहेरा

  *(आलेख : संजय पराते)* कॉ. गणेश तिवारी नही रहे। 27 अप्रैल की रात को कोरोना ने उन्हें भी ग्रस लिया। यह समाचार स्तब्धकारी है और उनका मुस्कुराता चेहरा हमेशा के लिए जेहन में बस गया। वे नवभारत, बिलासपुर में उपसंपादक थे और अगस्त 2019 में सेवानिवृत्त हुए। वे बेबाकी से लिखते थे और बेलाग बोलते थे।एक पत्रकार के रूप में समाचार चयन और उनकी प्रस्तुति में उनका यह रूप झलकता था। उनकी पत्रकारिता जन पक्षधर पत्रकारिता थी। लेकिन पत्रकार से पहले वे एक कॉमरेड थे और आखिरी सांस तक कॉमरेड बने रहे। वामपंथ से उनका जुड़ाव छात्र संगठन एसएफआई के जरिये हुआ। वे बेहद मिलनसार थे और अदभुत संगठन क्षमता के धनी। उनकी इस खासियत को संगठन के नेताओं ने पहचाना। एसएफआई के निर्माण में उनका अभूतपूर्व योगदान था। आपातकाल के बाद 1980 के दशक में बिलासपुर में एसएफआई एक प्रमुख और मजबूत छात्र संगठन था। शासकीय महाविद्यालय के ...
सार्वभौमिक टीकाकरण की विदाई
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सार्वभौमिक टीकाकरण की विदाई

  (आलेख : संजय पराते) प्रधानमंत्री मोदी के हालिया संदेश से अब यह स्पष्ट हो गया है कि आजादी के बाद से अब तक किसी भी महामारी से लड़ने के लिए मुफ्त सार्वभौमिक टीकाकरण की सुपरीक्षित नीति को अब अलविदा कह दिया गया है। अब टीकाकरण के दायरे में वही लोग आएंगे, जिनकी अंटी में पैसे होंगे। कोरोना के खिलाफ जंग में अब टीकाकरण कितने वर्षों में पूरा होगा, यह देश मे टीकों के निर्माण और उसकी जन उपलब्धता से ज्यादा इस पर निर्भर होगा कि आप में इन टीकों को खरीदने की ताकत है या नहीं। मानव जाति के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह बने कोरोना जैसी महाआपदा में भी ऐसी कॉर्पोरेटपरस्ती वही दिखा सकता है, जिसके खून में व्यापार हो। कोरोना की यह दूसरी लहर पहले से भी ज्यादा सांघातिक और जानलेवा है। पहली लहर में हमारे देश में पहले 10 लाख लोगों को संक्रमित होने में जहां 8.5 माह लगे थे, दूसरी लहर में केवल 3 माह ही लगे हैं।...
पुलिस में महिलाओं की भूमिका
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पुलिस में महिलाओं की भूमिका

( महिला पुलिस महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा और अपराध का जवाब देने और उसे रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पुलिस में पूर्वाग्रह से मुक्त अवसर की समानता से उनकी संख्या बढ़ सकती है अन्यथा उनकी भूमिका का प्रभाव नहीं होगा पुलिस में पूर्वाग्रह से मुक्त अवसर की समानता से उनकी संख्या बढ़ सकती है अन्यथा उनकी भूमिका का प्रभाव नहीं होगा।) भारत में ज्यादातर लोग पुलिस को पुरुष संरक्षण के रूप में देखते हैं। फिर भी धीमी गति से पुलिस में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। आज की महिला पुलिसकर्मी अपने पेशेवर दायित्वों को निभाने के अलावा भी कार्य कर रही हैं, इसलिए ये जरूरी है कि महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा दे, जिससे धीरे-धीरे आधुनिकता का बीज बोया जा सके और समाज में सकारात्मक बदलाव आये। आधुनिक दौर में पुलिस में महिलाओं की भूमिका अपनी अलग पहचान रखती है चूंकि महिलाएं लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा ह...
हरियाणा का कौशल विकास और नौकरी को तरसते युवा
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हरियाणा का कौशल विकास और नौकरी को तरसते युवा

( हरियाणा के मुख्यमंत्री पता नहीं किस के दम पर हरियाणा में कौशल विकास की बात पर आये दिन अखबारों में छाने की कोशिश करते है मगर सच तो ये है कि सालों से नौकरी की बाट देख रहें है हरियाणा के बीटेक आई.टी.आई. अनुदेशक. ट्विटर ट्रेंड में बेरोजगार युवाओं के ट्वीट्स ने नौकरी के गुहारों की झड़ी देखने को मिल रही है, खट्टर का कौशल विकास और भर्ती को तरसते आई.टी.आई. अनुदेशक पिछले कई माह से ट्विटर ट्रेंड में छाया हुआ है. राजधानी से सटे हरियाणा राज्य में पिछले छह माह से भर्ती प्रक्रिया बंद ही समझी जाये. हरियाणा सरकार ने कोरोना लॉक डाउन से पहले जो भर्ती विज्ञापन जारी किये थे उन पर कोई काम नहीं किया है, नई भर्ती की बात तो दूर की बात. यही नहीं मार्च माह में यहाँ राज्यभर के आईटीआई संस्थानों यानि राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में अनुदेशकों के पदों के लिए जारी किये गए परिणाम के बाद डॉक्युमनेट वेरिफिकेशन ...
लोकतंत्र वेंटीलेटर पर : भाजपा के शिवराज में मध्यप्रदेश बना मृत्युप्रदेश
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लोकतंत्र वेंटीलेटर पर : भाजपा के शिवराज में मध्यप्रदेश बना मृत्युप्रदेश

*(आलेख : बादल सरोज)* 🔴 पिछले चार-पांच दिन से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ये दो तस्वीरें भाजपा राज में मध्यप्रदेश जिस दशा में पहुँच गया है, उसकी प्रतिनिधि तस्वीरें है। मौतें धड़ाधड़ हो रही हैं; इंदौर, भोपाल और कुछ अन्य शहरों के मरघटों में 16 से 18 घंटे तक की वेटिंग लिस्ट है; कब्रिस्तान में कब्र खोदने वालों के हाथों में छाले पड़ गए हैं। लगभग आधा प्रदेश लॉकडाउन में है, महाराष्ट्र के बाद दूसरे नंबर पर पहुँच गया है कोरोना संक्रमण - तेजी से पहले नंबर की ओर बढ़ रहा है। ठीक इस बीच विधानसभा सीट - दमोह - का उपचुनाव जीतने के लिए पूरी सरकार भीड़-भड़क्के के साथ न सिर्फ मैदान में कूदी हुयी है, बल्कि इसके बीच शाही स्वागत सत्कार और छप्पनभोग भोजों का पूरी तरह से लुत्फ़ ले रही है। एक प्रतिष्ठित कवि ने इस तस्वीर को गिद्धों के मृत्युभोज का शीर्षक दिया है। 🔴 यह मध्यप्रदेश की प्रतिनिधि तस्वीर है। पिछले 16 वर्षों...
मनोचिकित्सक साफ कह रहे कोरोना फ़ोबिया फैल चुका है कोरोना से लड़े डरे नही
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मनोचिकित्सक साफ कह रहे कोरोना फ़ोबिया फैल चुका है कोरोना से लड़े डरे नही

 *आनंदराम साहू*   _"कोरोना है खतरनाक संक्रामक बीमारी, आज उसकी कल मेरी बारी।"_ यह सोंच-सोंचकर बहुत से लोगों की धड़कनें बढ़ी हुई है। मनोवैज्ञानिक और चिकित्सा विशेषज्ञ भी अब यह स्वीकार कर रहे हैं कि कोरोना फोबिया जैसी स्थिति निर्मित हो गई है। मनोचिकित्सक बारंबार यह सलाह दे रहे हैं कि कोरोना से कहीं ज्यादा खतरनाक इसका भय है। इसलिए भयभीत न हों। कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है। कुछ सावधानियां बरतकर कोरोना को हम सब हरा सकते हैं। महामारी से रोज हो रही मौतें और मरने का जन-जन के मन में समाया हुआ भय। आखिर क्यों ? मौत से इतना भय क्यों ? आप मरना नहीं चाहते हैं न ? कोई भी नहीं मरना चाहता है। यह जानते हुए भी कि *"मौत शास्वत और अंतिम सत्य है। सभी का एक न एक दिन मरना तय है। जो जन्म लिया है, उसकी मृत्यु भी निश्चित है। यही प्रकृति का नियम है। इसे कोई नहीं नकार सकता है।"*  यह बातें निश्चय ही आप भी कहीं न ...
अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) के लिए विशेष  डा अंबेडकर के व्यक्तित्व का समग्र मूल्यांकन जरुरी  
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अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) के लिए विशेष डा अंबेडकर के व्यक्तित्व का समग्र मूल्यांकन जरुरी  

डा समन्वय नंद लेखक,चिंतक,विचारक डा भीमराव अंबेडकर के व्यक्तित्व व कार्य का अभी तक समग्र मूल्यांकन नहीं किया गया है । उन्हें आज भी अनुसूचित जाति वर्ग के नेता के रुप में  प्रचारित  किया जाता रहा है । वास्तव में यह उनके व्यक्तित्व व कार्य के प्रति घोर अन्याय है । यह बात काफी कम लोगों को जानकारी होगी कि वह मूल रुप से एक अर्थशास्त्री थे । अर्थशास्त्र में उनका चिंतन मौलिक था । जब वह कलंबिया विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे थे तब उन्होंने वहां जो शोध प्रबंध लिखे उससे उनकी आर्थिक विषय में पकड कितनी थी वह स्पष्ट होता है । कलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के स्नातकोत्तर की पढाई कर रहे थे तब इस डिग्री के लिए एक शोध निबंध लिखा था । यह शोध निबंध भारत पर उस समय शासन करने वाले अंग्रेज किस ढंग से भारत का आर्थिक शोषण कर रहे थे उस पर था । इसका विषय था – इस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन व वित्तीय प्रब...
डॉ अम्बेडकर की 130 वीं सालगिरह पर विशेष आलेख : *बाबा साहब,भारतीय संविधान और मौजूदा खतरे
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डॉ अम्बेडकर की 130 वीं सालगिरह पर विशेष आलेख : *बाबा साहब,भारतीय संविधान और मौजूदा खतरे

*(आलेख : बादल सरोज)* *संविधान सभा के लिए दो बार चुने गए थे बाबा साहब* आजादी के लिए हुए समझौते और तिथि तय हो जाने के बीच ही संविधान सभा के लिए चुनाव हुए थे। जुलाई 1946 में करीब 10 लाख पर एक के हिसाब से एक सदस्य के साथ 292 सदस्य चुने गए। इनके अलावा 93 प्रतिनिधि रियासतों के थे और 4 प्रतिनिधि दिल्ली, अजमेर-मेवाड़. कूर्ग और ब्रिटिश बलोचिस्तान से थे। बाबा साहब संविधान सभा के लिए बंगाल की जैसोर खुलना सीट से जीते। इस सीट से लड़ने के लिए उन्हें मुस्लिम लीग के बड़े नेता और नमोशूद्र आंदोलन से जुड़े समाज सुधारक जोगेंद्र नाथ मंडल ने न्यौता देकर बुलाया था। मगर विभाजन में जैसोर और खुलना पाकिस्तान (अब के बांग्लादेश) में चला गया। ऐसी स्थिति में नेहरू की पहल पर उन्हें कांग्रेस और कम्युनिस्टों के समर्थन से बॉम्बे प्रेसीडेंसी के एक कांग्रेसी सदस्य की सीट खाली करवा कर वहां से चुनवाकर लाया गया। इस तरह डॉ. अम्बे...