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वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रशेखर शर्मा की बात बेबाक,खाकी की गलती से जलता कबीरधाम,झुलसती जनता,सुलगते हिन्दू मुसलमान
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वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रशेखर शर्मा की बात बेबाक,खाकी की गलती से जलता कबीरधाम,झुलसती जनता,सुलगते हिन्दू मुसलमान

बात बेबाक चंद्र शेखर शर्मा (पत्रकार) 9425522015 0 खाकी की गलती से जलता कबीरधाम 0 धर्म व जातिवाद के चासनी में डूबती उतरती कबीरधाम की राजनीति कबीरधाम जिले की राजनीति में जातिवाद का प्रवेश साफ साफ दिखता है । योग्यता को दरकिनार कर जातिगत समीकरणों को आधार बना टिकटें बांटी गई । राजनीति में जातिवाद के हावी होने के चलते अब धर्म का राजनीति में प्रवेश ना हो इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। ऐसे में अगर धर्म व जातिवादी राजनीति का चक्कर गोल गोल जलेबी की तरह घूमने लगे तो कभी कभी नया ही ट्विस्ट भी देखने को मिलता है। कुछ ऐसी ही बानगी विगत दिनों कवर्धा में भगवा झंडे को निकालने और खाकी की बेचारगी को लेकर देखने को मिल रहा है। भगवा के अपमान का मामला स्वस्थ समाज व धार्मिक भावना के लिए कहीं से भी क्षम्य नहीं है। खादी और खाकी के गठजोड़ , वर्दीधारियों की बेचारगी ने धार्मिक भावना के मामले में दर्ज मुकदमे और ...
2 अक्टूबर गांधी जयंती पर वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रशेखर शर्मा की बात बेबाक, महात्मा गांधी का सपना उनके जन्म के 150 बरस बाद आज भी सपना बना हुआ है
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2 अक्टूबर गांधी जयंती पर वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रशेखर शर्मा की बात बेबाक, महात्मा गांधी का सपना उनके जन्म के 150 बरस बाद आज भी सपना बना हुआ है

2 अक्टूबर बोले तो गांधी जयंती राष्ट्रपिता , बापू , महात्मा गांधी का हैप्पी बर्थ डे । मुन्ना भाई एमबीबीएस के बाद गाँधी जी सिर्फ 2 अक्टूबर या काम कराने के एवज में दी जाने वाली रिश्वत के वक्त याद आते है कि गुलाबी गांधी ने मेरा काम आसानी से करवाया । वैसे गांधी जी का नाम सामने आते ही स्वच्छता , गांधी टोपी और पंचायती राज के जरिये दुबकी पड़ी राम राज की परिकल्पना भी दिमाग के किसी कोने से अचानक बाहर आ जाती है । पंचायती राज गांधी का स्वप्न था जिसे वे साकार होता देखना चाहते थे । गांधी के इस सपने और ग्रामीण विकास में जनता की भागीदारी के मद्देनजर मेहता समिति द्वारा मध्यप्रदेश के समय पंचायती राज का गठन किया गया था । छत्तीसगढ़ गठन के बाद पंचायती राज में कुछ परिवर्तन भी देखने को मिले, पर दशको गुजरने के बाद भी पंचायतो की बदहाली और भ्रष्टाचार के चलते गांधी का सपना उनके जन्म के 150 बरस बाद आज भी सपना बना हुआ...
हिंसक सोच समाधान नहीं हो सकती – राजेश बिस्सा
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हिंसक सोच समाधान नहीं हो सकती – राजेश बिस्सा

समूह की शक्ति का जीवंत उदाहरण देश की आजादी प्रिय युवा साथियों, आजादी का हीरक जयंती वर्ष चल रहा हैं। देश आजादी के 75 वें वर्ष को धूमधाम से मना रहा है। इसकी सार्थकता तब संभव होगी जब युवा एक मजबूत समाज को निर्मित करने की ओर अग्रसर होंगे। युवाओं को एक बार गांधीवाद की ओर जरुर पलट कर देखना चाहिये। इसके लिये महात्मा गांधी की जीवनी रटने की जरूरत नहीं। उनके दृष्टिकोण को समझना जरूरी है। युवाओं को समझना होगा की गांधीवाद अपने जीवन को सीमित कर लेना या वर्तमान परिस्थितियों व आधुनिकीकरण से दूर रहकर जीना नहीं है। गांधीवाद है परस्पर सहयोग से अपनी व अपनों ताकत बढ़ाना। हमारी ताकत बढ़ेगी तो समाज की ताकत बढ़ेगी। समाज की ताकत बढ़ेगी तो राष्ट्र की ताकत बढ़ेगी। राष्ट्र की ताकत बढ़ेगी तो हम उस विश्व शक्ति की ओर अग्रसर होंगे जो हमारा लक्ष्य है। युवाओं को समझना होगा की महात्मा गांधी राजनीतिक लाभ औ...
2 अक्टूबर गांधी जयंती, बादल सरोज का विशेष आलेख  “गाँधी का देशकाल”
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2 अक्टूबर गांधी जयंती, बादल सरोज का विशेष आलेख “गाँधी का देशकाल”

  *एक* किसी भी व्यक्ति या विचार का मूल्यांकन करने का सही तरीका उसे उसके देश-काल में - टाइम एंड स्पेस में - बांधकर समझना है। गांधी को समझना है, तो उन्हें भी उस समय की परिस्थितियों के साथ जोड़कर देखना होगा। गांधी की एक मुश्किल यह है कि उन्हें समग्रता में ही समझा जा सकता है। टुकड़ों में देखने का एक झंझट उनके एकांगी हो जाने का है। ऐसा करने से हरेक अपनी पसंद या नापसंद के गांधी को तो ढूंढ सकता है - मगर गांधी को नहीं समझ सकता। सामाजिक विकास की प्रत्येक अवस्था एक युगांतरकारी उथलपुथल का नतीजा होती है। ऐसी हर उथलपुथल और संक्रमणकारी प्रक्रिया/इतिहास के चरणों को बदलने के संघर्ष अपने-अपने नायकों को जन्म देते हैं और प्रकारांतर में वे नायक उस युग के प्रतिनिधि - आइकॉन - बन जाते हैं। भारतीय ऐतिहासिक अवस्था के ऐसे दो निर्णायक प्रस्थान/परिवर्तन बिंदु हैं। एक वह समय है, जब खेती परिपक्व और समृद्ध ...
तैयारी अफसर की और प्रश्न मंत्रियों के निजी जीवन के, सब इंस्पेक्टर पुलिस का पेपर बना मजाक, रद्द होना चाहिए
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तैयारी अफसर की और प्रश्न मंत्रियों के निजी जीवन के, सब इंस्पेक्टर पुलिस का पेपर बना मजाक, रद्द होना चाहिए

(चेयरमैन की माफ़ी से क्या युवाओं के सपने पूरे हो जायेंगे, किसी ने आत्म हत्या कर ली तो जिम्मेवार कौन ? तैयारी अफसर की और प्रश्न मंत्रियों के निजी जीवन के....शर्म भी नहीं आई ?) हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन दुनिया का एक अद्भुत बोर्ड है जहां मनमाने तरीके से सवाल पूछकर अभ्यर्थियों के सपनों से खेला जाता है. चेयरमैन साहब बहुत अच्छी बात है 3 पेपर छपवाए थे.लेकिन सबका एक ही पेपर लेना चाहिए था. महिला कांस्टेबल की संख्या तो सब इंस्पेक्टर से कहीं ज़्यादा थी. वो भी तो करवाया है, एक ही शिफ्ट में 3 प्रश्न पत्र तो नहीं दिए ! इस सारी बयानबाज़ी में आप ये क्यूँ छुपा गए कि अभ्यर्थियों को 20-20 मिनट बाद तो कहीं पूरे समय बाद दूसरा या तीसरा पेपर दोबारा तिबारा सॉल्व करने के लिए दिया ! 2-3 OMR जो एक ही candidate की फिल हुई हैं वो? गलती तो हुई है बियॉन्ड डाउट लेकिन कुछ चीज़ें छुपाकर उसे कामयाबी कहकर पेश करना भी हुनर है! और...
भारत मे कोरोना से ज्याद करप्ट सिस्टम की वजह से मौतें ?
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भारत मे कोरोना से ज्याद करप्ट सिस्टम की वजह से मौतें ?

अस्पतालों में कही ज्यादा बिल तो कही आवश्यक दवाओं की कालाबाज़ारी सब कुछ सरकार और मीडिया की नज़र के सामने । अब ये अशुद्ध ऑक्सीजन से मौतों की खबर । सवाल यह कि क्या भारत मे कोरोना से ज्यादा भ्र्ष्ट सिस्टम की वजह से इतनी मौतें हुई ?? अगर ऐसा है तो हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना भी खर्च कर ले सरकार लेकिन ज्यादातर लोगो के दिलो से इन अस्पतालों के प्रति बैठ चुका ख़ौफ़ कैसे निकालेगी सरकार ? एक बात आप लोग माने या ना माने लेकिन इसी अज्ञात भय के कारण बड़े अस्पतालों में जाने से लोग कतराने लगे है चाहे शहर हो या कस्बा या गांव । सुनाई तो यह दे रहा इन ज्यादातर निजी अस्पतालों का रोज का खर्च निकलना मुश्किल हो रहा जिसका असर सीधे सीधे वहां काम करने वाले स्टाफ पर हो रहा । कही सेलरी के लाले पड़े है तो कही नोकरी को राम राम करना पड़ रहा किसी को घटी हुई सेलरी में काम करना पड़ रहा। जाहिर है यह जानते हुए कि इंड्रस्ट्री...
निर्माण की जगह ध्वंसों और हादसों का इतिहास? : भारत की वैचारिक परम्परा के निष्कासन और बहिष्करण की संघी परियोजना!! (आलेख : बादल सरोज)
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निर्माण की जगह ध्वंसों और हादसों का इतिहास? : भारत की वैचारिक परम्परा के निष्कासन और बहिष्करण की संघी परियोजना!! (आलेख : बादल सरोज)

*(आलेख : बादल सरोज)* मध्यप्रदेश में एमबीबीएस के छात्रों को अब आरएसएस संस्थापक हेडगेवार और जनसंघ के संस्थापक नेता पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचार पढाए जाएंगे। चिकित्सा शिक्षामंत्री ने इस घोषणा के लिए तारीख सरकारी शिक्षक दिवस - 5 सितम्बर - की चुनी। बकौल उनके ये विचार एमबीबीएस के फाउंडेशन कोर्स में मेडिकल एथिक्स - नैतिक शिक्षा - के टॉपिक का हिस्सा होंगे। मंत्री का दावा है कि "इससे अच्छे डॉक्टर तैयार होंगे।" वैसे "अच्छे डॉक्टर्स तैयार करने" के मामले में मध्यप्रदेश भाजपा के राज में आने के बाद से पूरे प्राणपण के साथ जुटा हुआ है। इसके लिए वह न जाने कितने व्यापमं कर चुका है। अभी भी - भले नाम बदल गया है - मगर हर सप्ताह कोई-न-कोई नया व्यापमं उजागर होता ही रहता है। भाजपा सरकार का अपने इन दोनों "कुल गुरुओं" को मेडिकल शिक्षा (कहते हैं कि किसी प्रदेश में इन्हे इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम में भी शामिल ...
हिंदी के हिस्से की लड़ाई, शशि मोहन सिंह (IPS) की कलम से
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हिंदी के हिस्से की लड़ाई, शशि मोहन सिंह (IPS) की कलम से

*हिंदी के हिस्से की लड़ाई* ----------- हिंदी ! अब तुमको भी लड़नी होगी अपने हिस्से की लड़ाई स्वयं इस बाज़ारवादी व्यवस्था में जैसे लड़ता है हर कोई अपने-अपने हिस्से की लड़ाई टकराना होंगा तुमको भाषायी साम्राज्यवाद के नुकीले प्रस्तरों से तोड़ना होंगा अवरोधों की ऊँची दीवार को जो खड़ी की गई है तुम्हारी राहों में उखाड़ने होंगे वो तमाम खूँटे जिसमें षड़यंत्रों के खूँखार श्वान बाँधे गए हैं जो भोंकते रहते हैं लगातार तुम्हारी उपस्थिति के बरक्स मैं तुम्हारी दुर्दशा पर न आँसू बहाऊँगा न लिखूँगा कोई शोक गीत तुम्हारी दशा पर बस इतना ही कहूँगा कि तुम इन उफ़नती लहरों में अपनी नाव को खेते रहना आत्मविश्वास के पतवार से परिस्थितियों के घातक प्रहार पैदा कर देगा तुम्हारे भीतर ही एक प्रतिरोधक क्षमता तुम्हारे निखरते रूप और बिखरती कांति से झिलमिलाता बाज़ार का विज्ञापन तुम्हारी अपनी ...
सुपर विलेन ने संस्कृति विभाग पर लगाया उपेक्षा का आरोप, फ़िल्म नीति बनाये जाने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को दी बधाई,बताया अपना ही दिया प्रस्ताव
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सुपर विलेन ने संस्कृति विभाग पर लगाया उपेक्षा का आरोप, फ़िल्म नीति बनाये जाने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को दी बधाई,बताया अपना ही दिया प्रस्ताव

छःत्तीसगढ़ी सिनेमा के सुपर विलेन गिरधारी पांडे ,,..बनवारी ,,,मुरारी, गब्बर ,गदगद ,एटीएम भाई, रमेशर, प्रताप दाऊ वगैरा ओर ना जाने कितने फिल्मी नाम से पुकारे जाने वाले मनमोहन ठाकुर ने IMNB. NEWS AGENCY को अपने भेजें गए सन्देश में बताया किे ख़ुशी की बात है केि...दो वर्ष पूर्व माननीय दाऊ जी को दिया गया मेरा आईडिया संशोधित रूप में सही,धरातल पर नजर आया l लेकिन दुःख की बात भी है,की संस्कृति विभाग ने निति निर्धारण के दरमियान छालीवुड से जुड़े तमाम लोगों को मीटिंग में बुलाया किन्तु मुझे सूचित करना भी जरुरी नहीं समझा...संस्कृति विभाग मेरे साथ इस तरह का भेदभाव आज से नहीं विगत 20 से करता रहा है...क्यों???ये भी लिखूंगा लेकिन अभी नहीं...फ़िलहाल इस शानदार फिल्म निति का क्रियान्वयन सही ढंग से हो और प्रॉपर मोनिटिरिंग होती रहे तभी इस योजना का लाभ हम सबको मिल पायेगा l बहरहाल भूपेश सरकार को पुनः साधुवाद...
है हिंदी यूं हीन ,,डॉo सत्यवान सौरभ की कलम से
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है हिंदी यूं हीन ,,डॉo सत्यवान सौरभ की कलम से

है हिंदी यूं हीन ।। -------------------------- बोल-तोल बदले सभी, बदली सबकी चाल । परभाषा से देश का, हाल हुआ बेहाल ।। जल में रहकर ज्यों सदा, प्यासी रहती मीन । होकर भाषा राज की, है हिंदी यूं हीन ।। अपनी भाषा साधना, गूढ ज्ञान का सार । खुद की भाषा से बने, निराकार, साकार ।। हो जाते हैं हल सभी, यक्ष प्रश्न तब मीत । निज भाषा से जब जुड़े, जागे अन्तस प्रीत ।। अपनी भाषा से करें, अपने यूं आघात । हिंदी के उत्थान की, इंग्लिश में हो बात ।। हिंदी माँ का रूप है, ममता की पहचान । हिंदी ने पैदा किये, तुलसी ओ" रसखान ।। मन से चाहे हम अगर, भारत का उत्थान । परभाषा को त्यागकर, बांटे हिंदी ज्ञान ।। भाषा के बिन देश का, होता कब उत्थान । बात पते की जो कही, समझे वही सुजान ।। जिनकी भाषा है नहीं, उनका रुके विकास । परभाषा से होत है, हाथों-हाथ विनाश ।। ✍ डॉo सत्यवान सौरभ...