स्वास्थ-ज्योतिष

भारत मे कोरोना से ज्याद करप्ट सिस्टम की वजह से मौतें ?
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भारत मे कोरोना से ज्याद करप्ट सिस्टम की वजह से मौतें ?

अस्पतालों में कही ज्यादा बिल तो कही आवश्यक दवाओं की कालाबाज़ारी सब कुछ सरकार और मीडिया की नज़र के सामने । अब ये अशुद्ध ऑक्सीजन से मौतों की खबर । सवाल यह कि क्या भारत मे कोरोना से ज्यादा भ्र्ष्ट सिस्टम की वजह से इतनी मौतें हुई ?? अगर ऐसा है तो हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना भी खर्च कर ले सरकार लेकिन ज्यादातर लोगो के दिलो से इन अस्पतालों के प्रति बैठ चुका ख़ौफ़ कैसे निकालेगी सरकार ? एक बात आप लोग माने या ना माने लेकिन इसी अज्ञात भय के कारण बड़े अस्पतालों में जाने से लोग कतराने लगे है चाहे शहर हो या कस्बा या गांव । सुनाई तो यह दे रहा इन ज्यादातर निजी अस्पतालों का रोज का खर्च निकलना मुश्किल हो रहा जिसका असर सीधे सीधे वहां काम करने वाले स्टाफ पर हो रहा । कही सेलरी के लाले पड़े है तो कही नोकरी को राम राम करना पड़ रहा किसी को घटी हुई सेलरी में काम करना पड़ रहा। जाहिर है यह जानते हुए कि इंड्रस्ट्री...
दाई-दीदी क्लीनिक,महिलाओं की बीमारी हो रही ठीक : 700 से अधिक कैंपो में 50 हजार से अधिक महिलाएं हुई लाभान्वित
रायपुर, स्वास्थ-ज्योतिष

दाई-दीदी क्लीनिक,महिलाओं की बीमारी हो रही ठीक : 700 से अधिक कैंपो में 50 हजार से अधिक महिलाएं हुई लाभान्वित

रायपुर (IMNB). महिलाओं के लिए शुरू की स्पेशल उपचार सुविधा दाई दीदी क्लीनिक योजना से जरूरतमंद और गरीब बीमार महिलाओं को समय पर उनके ही घर के आसपास निःशुल्क उपचार मिलने लगा है। दाई दीदी क्लीनिक के अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट में सभी प्रकार की सुविधाओं के साथ चिकित्सक सहित सभी स्टाफ महिलाएं होने की वजह से इलाज कराने वाली महिलाओं को अपनी समस्याएं बताने में किसी प्रकार की झिझक भी नहीं होती। यहीं वजह है कि रायपुर, बिलासपुर और भिलाई नगर पालिक निगम में शुरू हुई इस योजना से लगभग 700 कैम्पों में अब तक 50 हजार से अधिक महिलाएं दाई दीदी क्लीनिक योजना से लाभान्वित होकर ठीक हो चुकी है। अपने कामकाजों में व्यस्त रहने वाली संगीता यादव और सुशीला देवांगन भी उन्हीं महिलाओं में है जो अपने घर के नजदीक लगने वाली दाई दीदी क्लीनिक के शिविर में इलाज कराकर ठीक हुई है। रायपुर शहर के डंगनिया में रहने वाली श्रीम...
बस्तर आज से शुरू हुआ कृमिमुक्ति कार्यक्रम बस्तर सम्भाग में 15.46 लाख बच्चों को दी जाएगी
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बस्तर आज से शुरू हुआ कृमिमुक्ति कार्यक्रम बस्तर सम्भाग में 15.46 लाख बच्चों को दी जाएगी

    जगदलपुर 12 सितम्बर। कृमि से बचाव हेतु 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों के लिये आज 13 सितम्बर से 20 सितम्बर 2021 तक राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम शुरू हुआ है तथा छूटे हुए बच्चों को कृमिनाशक दवा 21 से 23 सितम्बर तक मॉप-अप दिवस पर खिलाई जाएगी। इस दौरान बस्तर संभाग के 7 जिलों में सर्वाधिक बस्तर में 3.69 लाख, बच्चों को यह गोली खिलायी जाएगी जबकि कांकेर में 3.68 लाख, कोंडागांव में 2.93 लाख, दंतेवाड़ा में 1.67 लाख, बीजापुर में 1.43 लाख, सुकमा में 1.28 लाख, वहीं नारायणपुर में 75,000 से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिलेगा। इस प्रकार बस्तर सम्भाग में 15.46 लाख बच्चों को कृमि नाशक एल्बेंडाजोल की गोली खिलाये जाने का लक्ष्य रखा गया है। मितानिन द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से अपने कार्यक्षेत्र के सभी घरों का भृमण कर कृमिनाशक दवा दी जाएगी। 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली (200...
बालोद जिला टीबी संभावितों की सघन खोज के लिए 2 लाख से अधिक घरों में डोर-टू-डोर सर्वे शुरु
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बालोद जिला टीबी संभावितों की सघन खोज के लिए 2 लाख से अधिक घरों में डोर-टू-डोर सर्वे शुरु

बालोद, 10 सितंबर 2021। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में टीबी को खत्म करने के लिए एक बार फिर "टीबी हारेगा बालोद जीतेगा" अभियान का आज शुभारंभ किया गया। लोगों में जनजागरुकता लाने प्रचार-प्रसार के लिए संसदीय सचिव कुंवर सिंह निषाद, कलेक्टर जन्मेजय महोबे व सीएमएचओ डॉ.जेपी मेश्राम द्वारा हरी झंडी दिखाकर प्रचार रथ को रवाना किया गया। टीबी की सघन खोज एवं उपचार अभियान 10 सितंबर से 10 अक्टूबर-2021 तक चलाया जाएगा। अभियान के दौरान जिले की 702 गांवों में लगभग 10 लाख की जनसंख्या में टीबी संभावितों को खोजने घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा। दो लाख से अधिक घरों में डोर-टू-डोर सर्वे मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, टीबी चैम्पियन व ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों की टीम टीबी के लक्षण वाले मरीजों की पहचान करेगी। इस मौके पर जिला टीबी उन्न्मूलन अधिकारी डॉ. संजीव ग्लैड ने बताया: “जिले में टीबी मरीजों क...
तीज अविवाहित कन्या भी रख सकती है स्वामी राजेश्वरानंद
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तीज अविवाहित कन्या भी रख सकती है स्वामी राजेश्वरानंद

हरतालिका तीज व्रत 2021 9 सितंबर गुरुवार को है यह व्रत अविवाहित कन्या भी रख सकती है इसके लिए कुछ सावधानियां बरतने की आवश्यकता है स्वामी राजेश्वरानंद श्री सुरेश्वर महादेव पीठ संस्थापक के अनुसार हरतालिका व्रत रखना जो शुरू कर रहे हैं तो ध्यान दें कि यह व्रत को जीवन पर्यंत रखना अनिवार्य है हरतालिका तीज का व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती है पूजा करने के दौरान कुछ विशेष नियमों को अपनाना चाहिए स्वामी राजेश्वरानंद के अनुसार एक स्थिति में ही इस व्रत को छोड़ा जा सकता है जब व्रत रखने वाला गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए लेकिन यह भी ध्यान देना जरूरी है कि ऐसी स्थिति में व्रत रखने वाली महिला के पति या किसी दूसरी महिला को यह व्रत रखना पड़ेगा हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है महिलाएं इस दिन व्रत लगत...
25 से भोलेनाथ का अतिप्रिय श्रवण मास ,कोरोना संकट हर स्वामी राजेश्वरा नंद
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25 से भोलेनाथ का अतिप्रिय श्रवण मास ,कोरोना संकट हर स्वामी राजेश्वरा नंद

हर हर महादेव— भगवान भोलेनाथ को अतिप्रिय श्रावण मास 25 जूलाई 2021 दिन रविवार से प्रारंभ हो रहा है,जिसमें चार सोमवार व्रत होंगे । पहला सोमवार-26 जूलाई दूसरा सोमवार-2 अगस्त तीसरा सोमवार-9 अगस्त चौथा सोमवार-16 अगस्त और श्रावण शिवरात्रि व्रत 6 अगस्त शुक्रवार को मनायी जायेगी- शारीरिक पीड़ा एवं नवग्रहों से पीड़ा की शांति हेतु महामृत्युंजय का जाप आचार्यों के द्वारा विधि विधान से श्री सुरेश्वर महादेव पीठ में कराया जाता है एवं श्रावण माह में महामृत्युंजय का जाप करवाना अति सर्वश्रेष्ठ माना गया है इसलिए आप अपने एवं अपने परिवार के लिए महामृत्युंजय का जप अवश्य करवाएं अतः आप सभी भक्त इस श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना एवं रूद्राभिषेक मंत्र जाप कर इस महामारी के प्रकोप को शांत करने की प्रार्थना करें- स्वामी राजेश्वरानंद संस्थापक श्री सुरेश्वर महादेव पीठ रायपुर छत्तीसगढ़ मोबाइल नंबर 9...
मृत्यु महोत्सव के बाद टीका उत्सव : देश के साथ छल, छद्म और कपट की राजनीति
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मृत्यु महोत्सव के बाद टीका उत्सव : देश के साथ छल, छद्म और कपट की राजनीति

*(आलेख : बादल सरोज)* महामारी की तीसरी लहर के आने की आशंकाओं, जिसकी अब डेल्टा वैरिएंट के नाम पर पहचान तथा अधिकृत पुष्टि भी हो गयी है, के बीच जनता को किसी भी तरह की राहत देने से मोदी सरकार ने सीना ठोंक के मना कर दिया है। जो खुद किसी राष्ट्रीय आपदा से कम नहीं है, वह मोदी सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन क़ानून के बाध्यकारी प्रावधानों से भी मुकर गयी है। कोरोना को बाहर से आयी और लगातार आने वाली विपदा बताकर एक तरह से उसने इसे महामारी या राष्ट्रीय आपदा तक मानने से भी इंकार कर दिया है। जिस देश में इस महामारी के कालखण्ड में करीब 50 लाख से ज्यादा मौतें हुयी हों, (गुजरात से मध्यप्रदेश तक मौतों की असली संख्या को छुपाने के आपराधिक धतकरम हर रोज उजागर हो रहे हैं, किन्तु इसके बाद भी सरकारी आंकड़ा अभी 4 लाख तक भी नहीं पहुंचा है।) घर के कमाने वालों की मौतों के चलते लाखों परिवारों को दो जून के खाने और जिंदगी बच...
अंतराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर विशेष लेख नियमित योग से सँवारे अपना जीवन
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अंतराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर विशेष लेख नियमित योग से सँवारे अपना जीवन

इस जीवन में हर मनुष्य चाहता कि वह स्वथ्य रहे निरोग रहे। पर वर्तमान समय में मनुष्य निरंतर भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में उलझकर रह गया है। मनुष्य अपने दैनिक दिनचर्या में सही वक्त में वो हर काम नहीं कर पाता जो उसे करना चाहिए। वह केवल अपने जीविका के लिए निरंतर दिन रात दौड़ते भागते रहते हैं। पर क्या उसकी जीवनशैली में परिवर्तन आते है और उसका जीवन खुशमय हो जाता है। नहीं वे धनोपार्जन करते-करते वह अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो रहे हैं। आज के समय में किसी के पास स्वयं के लिए वक्त नहीं है। आप अधिकतर लोगों से सुनते है कि मेरे पास वक्त नहीं है। वक्त तो किसी के पास नहीं होता पर वक्त निकालना पड़ता है। व्यक्तियों ने अपने आप को सीमित कर लिया है। निरोगी लिए एक श्लोक प्रचलित है- व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखं। आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥ इसका भावार्थ है- व्यायाम ...
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून।। विशेष लेख। औद्योगिक विकास व सुविधा भोगी संसार के चलते योग दिनचर्या का एक आवश्यक अंग बन गया है
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून।। विशेष लेख। औद्योगिक विकास व सुविधा भोगी संसार के चलते योग दिनचर्या का एक आवश्यक अंग बन गया है

 लेखक  भिखारी प्रजापति                                     प्रदेश अध्यक्ष विश्व हिंदू महासंघ उत्तर प्रदेश। सदस्य राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उत्तर प्रदेश भारत ऋषि , कृषि प्रधान देश है । औद्योगिक विकास के पूर्व साधु ,संत, सन्यासी ,ऋषि , महर्षि आसन, ध्यान ,प्राणायाम के द्वारा यौगिक क्रियाएं करते रहे । खेती, किसानी, मजदूरी करने वाले लोग दिनभर हल के पीछे पीछे चलते, फावड़ा ,कुदाल चलाते , कामकाजी महिलाएं गेहूं पीसने के लिए चक्की चलाने से लेकर ओखली में मूसल से कूटने निकाई, गुड़ाई , कटाई जैसे कार्य करती थीं। सभी लोग शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ थे । अलग से योग करने की कोई जरूरत नहीं थी और अब औद्योगिक विकास व सुविधा भोगी संसार के चलते योग दिनचर्या का एक आवश्यक अंग बन गया है । स्कूली पाठ्यक्रम में भी योग को शामिल करना जरूरी हो गया है। स्वस्थ जीवन जीने की कला को योग कहते हैं। योग का अर्थ है जोड...