Thursday, February 29

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उद्घाटन नयी संसद का या रेंगती धार्मिक राजशाही का! (आलेख : राजेंद्र शर्मा)
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उद्घाटन नयी संसद का या रेंगती धार्मिक राजशाही का! (आलेख : राजेंद्र शर्मा)

नरेंद्र मोदी के राज के नौ साल की एक अनोखी उपलब्धि है। कथनी और करनी में अंतर तो संभवत: हरेक राज में ही होता है, पर मोदी राज में इस अंतर को बढ़ाते-बढ़ाते इतनी ऊंचाई पर पहुंचा दिया गया है, जहां कथनी और करनी विरोधी ध्रुव ही बन गए हैं। मोदी राज जो करता है, उससे ठीक उल्टा बोलता है। हैरानी की बात नहीं है कि मौजूदा राज की कथनी और करनी का यह बैर, नये संसद भवन के कथित लोकार्पण (वास्तव में गृह प्रवेश) के मौके पर, सामान्य से भी ज्यादा मुखर रूप से देखने को मिल रहा था। बाईस विपक्षी पार्टियों के विरोध तथा अंतत: बहिष्कार के बावजूद और राष्ट्रपति का साफ तौर पर अनादर करते हुए तथा तमाम संसदीय नियम-कायदों को सत्ता के मद में पांवों तले कुचलते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने, हठपूर्वक खुद ही नये संसद भवन का उद्घाटन किया। इसके ऊपर से इस लंबे आयोजन के पूरे के पूरे पूर्वार्द्घ को पूजापाठ का ऐसा सरकारी आयोजन बनवा दिया गया, ...