Thursday, February 29

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कुछ करने भी दो यारो! (व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)
खास खबर, छत्तीसगढ़ प्रदेश, रायपुर

कुछ करने भी दो यारो! (व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)

मोदी जी गलत नहीं कहते हैं। इन विरोधियों का बस चले, तो ये तो मोदी जी को कुछ करने ही नहीं दें। यहां तक कि बोलने भी नहीं दें, न टेलीप्राम्प्टर से और न उसके बिना। सिर्फ कुर्सी पर बैठाए रखें, अच्छे-अच्छे कपड़ों में सज-धज कर फोटो खिंचाने के लिए। बताइए, एप्पल वालों ने विपक्ष वालों के फोन में जासूस बैठाए जाने की जरा-सी चेतावनी क्या जारी कर दी, भाई लोगों ने इसी बात पर हंगामा खड़ा कर दिया। डेमोक्रेसी का मर्डर बता दिया। पब्लिक की जासूसी के राज का कायम होना बता दिया। संविधान में दिए गए अधिकारों का अंत और भी न जाने क्या-क्या बता दिया। और इल्जाम, बेचारी सरकार के सिर पर, सिर्फ इसलिए कि एप्पल के एलर्ट में बस इतना कहा गया था कि कोई सरकार का लहकाया हमला करने वाला आपके फोन में घुसने की कोशिश कर रहा था। सरकार का लहकाया कहने की देर थी कि भाई लोग पड़ गए सरकार के पीछे कि वही विपक्ष की जासूसी करा रही है। पुरान...
गरीबी तो मिटाने दो यारो! (व्यंग्य : राजेन्द्र शर्मा)
खास खबर, छत्तीसगढ़ प्रदेश, रायपुर, लेख-आलेख

गरीबी तो मिटाने दो यारो! (व्यंग्य : राजेन्द्र शर्मा)

ये लो कर लो बात। अब क्या मोदी जी गरीबी भी नहीं मिटाएं। सीबीएसई की किताबों में से गरीबी का चैप्टर जरा-सा हटा क्या दिया‚ भाई लोगों ने हटा दिया‚ मिटा दिया का मार तमाम शोर मचा रखा है। बताइए‚ इन्हें गरीबी मिटाने में भी दिक्कत है। अब मोदी जी की हर बात का विरोध करने वालों को कौन समझाए कि बच्चों की किताबों से हटेगी गरीबी‚ तभी तो नये इंडिया से मिटेगी गरीबी! शुक्र है कि मोदी जी विरोधियों की नहीं सुनते हैं। वैसे कहने वाले कहते हैं कि मोदी जी समर्थकों की भी नहीं सुनते हैं‚ मोदी–मोदी की पुकारों के सिवा। खैर! समर्थकों की बात उनके घर की है‚ हम उसमें टांग क्यों अड़ाएं‚ पर मोदी जी विरोधियों की नहीं सुनते हैं‚ ये बात पक्की है। इसीलिए‚ पचहत्तर साल में जो नहीं हुआ, अब होगा; अमृतकाल वाले नये इंडिया में फाइनली गरीबी का अंत होगा। बेशक‚ पहले वालों ने भी गरीबी हटाने/मिटाने के बहुत सपने दिखाए थे। उद्योग–धंधे खोल...