संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा बृजमोहन अग्रवाल को जीएसटी कानून असफल होने पर याद आई संघीय ढांचे की बात

रायपुर। शासन में संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने जीएसटी को लेकर एक बार फिर से केन्द्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के इसके बचाव में दिए बयान का विरोध करते हुए कहा है, पूर्व मंत्री को संघीय ढांचे की याद आज क्यों आ गई जो कहते हैं इसके तहत ये पैसा आज नहीं तो कल मिल जाएगा।

विकास उपाध्याय ने कहा मोदी सरकार की स्व रचित गुड्स एंड सर्विस टैक्स क़ानून के तहत राज्यों को जीएसटी लागू करने के बाद पांच साल तक राजस्व में होने वाले नुक़सान के बदले मुआवज़ा देने का प्रावधान है। तो फिर अपने ही कानून का पालन क्यों नहीं कर पा रही है। विकास ने कहा महामारी के इस संकट काल में राज्यों को इस पैसे की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा है।सिर्फ़ राज्य ही नहीं बल्कि आम व्यवसायी भी परेशान हैं। जिन व्यवसायों ने जीएसटी रिटर्न भरे थे, उनको भी भुगतान नहीं हो पाया है।

विकास उपाध्याय ने कहा कोरोना महामारी के कारण राज्यों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुक़सान हुआ है और केंद्र सरकार को इसका मुआवज़ा देना चाहिए। पीएम केयर फंड में  केन्द्र ने अपने प्रभाव का उपयोग कर उन संस्थानों से भी डोनेशन ले ली है जहाँ राज्यों का भी हिस्सेदारी है और तो और राज्यों के सांसदों का पैसा भी राज्यों को नहीं मिला बावजूद केन्द्र ने इस महामारी से लड़ने राज्यों को पर्याप्त राशि नहीं दी ऊपर से जीएसटी की वाजिब राशि भी नहीं दे रही है।

विकास उपाध्याय ने कहा केन्द्र की गलत नीति व कानून के लिए राज्य सरकारें जिम्मेदार नहीं हो सकतीं और पूरे देश भर से राज्य सरकारें एक स्वर में इस बात की मांग कर रही हैं कि उनको इसके मुआवजा की राशि सही समय में मिलना चाहिए। पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के बयान पर तंज कसते हुए विकास उपाध्याय ने कहा इनको आज याद आया कि संघीय ढांचे में राज्य और केंद्र सरकार मिलकर काम करते हैं, जी एस टी का पैसा आज नहीं मिलेगा तो बाद में मिल जाएगा। उन्होंने कहा क्या राज्य सरकारें केन्द्र में ठेके में काम करती हैं जो आज नहीं तो कल सरकारी पैसा है तो मिल जाएगा। जरूरत के वक्त पैसे नहीं मिलेंगे तो क्या राज्य सरकारें इस गलत कानून की वाहवाही के लिए कर्ज लें। ये काम तो केन्द्र को बहुत पहले कर लेनी चाहिए थी कि वह कर्ज लेकर इसकी क्ष्यतिपूर्ती कर लेती। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी केंद्रीय वित्त मंत्री को इस बाबत पत्र लिख कर कहा है इस गलती के लिए राज्य सरकार कर्ज क्यों ले।

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