
सारे देश में उत्साह की लहर है विशेषतौर पर भाजपाईयों में। भाजपा से सहानुभूति रखने वाले भी अंदर से आनंदित हो रहे हैं। इस बीच कई लोग आशंकित भी हैं। आशंका इसलिये कि कहीं लालच, भ्रम या दबाव में आकर हम कोई ऐसा कदम न उठा लें कि ये आनंद की वजह ही न रहे।
इससे पहले पं जवाहर लाल नेहरू ने 12 वर्ष 14 दिन कुल 4398 दिन प्रधानमंत्री पद पर लगातार काम किया। उनका रिकाॅर्ड तोडा़ है मोदीजी ने, 4399 दिन पूरे करने का रिकाॅर्ड बनाया।

एक टीवी डिबेट मे कांग्रेस प्रवक्ता ने हिकारत से निंदा करते हुए कहा कि जनता त्राहि-त्राहि कर रही है और ये अपनी वाहवाही करने में लगे हुए हैं।
अगर जनता त्राहिमाम करती तो फिर भाजपा की जीत का सिलसिला जारी क्यों रहता ? ताजा-ताजा पश्चिम बंगाल में बंगाली शेरनी ममता बैनर्जी का किला ढहा दिया। ये क्या कम उपलब्धि है ? बहरहाल विपक्ष का काम सरकार की भत्र्सना करना है सो कर रहे हंै।
सब समझते हुए
कुतर्क करता है विपक्ष
मगर ये एटीट्यूड कि कहां नेहरूजी और कहां ये, खुद को धोखा देना है ? वैसे ये सच है कि मोदीजी की तुलना नेहरूजी से कभी की ही नहीं जा सकती। मोदीजी ने जो-जो काम किये हैं और जो उनकी सोच है, नीयत है वो अपने आप में लाजवाब है।

नेहरूजी 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार प्रधानमंत्री रहे। 4398 दिन। मोदीजी ने 10 जून को 4399 दिन पूरे किये। मोदीजी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की पहली बार शपथ ली और फिर अनवरत् यात्रा जारी है। बिना ब्रेक।
हालांकि सबसे अधिक समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने का रिकाॅर्ड स्व इंदिरा गांधी के नाम है। लेकिन ये समयावधि खण्डित है यानि टुकड़ों-टुकड़ो मे वे प्रधानमंत्री रहीं, लगातार इतना समय एक साथ नहीं।
असल बात है
नीयत और क्षमता की
दरअसल परिस्थितियों की तुलना करें तो तमात शिकायतों के बावजूद, महंगाई, रिश्वतखोरी, रसूखदारों की मनमानी सहने के बाद भी जनता को मोदीजी की नीयत और निर्णय क्षमता पर पूरा भरोसा है। छोटे-छोटे तो कई काम हैं जो भाजपा सरकार ने निपटाए हैं पर कुछ विशेष उल्लेखनीय काम, जो लगभग नामुमकिन समझे जाते थे मोदीजी ने करके दिखा दिये।
जिन कामों के लिये ‘मोदी को दूसरा जनम लेना पड़ेगा’ कहता था विपक्ष या ‘देश में आग लग जाएगी, खून की नदियां बह जाएंगी’ जैसी धमकियां और आशंकाएं व्यक्त करता था, बिना किसी को खरोच आए ही अमली जाता पहना चुके हैं मोदीजी।
आज मोदीजी की कार्यक्षमता और प्रतिभा से सारे भारत ही नहीं सारे विश्व ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं।
देश मजबूत हुआ, दुश्मन हमारे प्रहारों से, बदला लेने की क्षमता से आहत और भयभीत हुआ। रामायण मंे लिखा है ‘भय बिन प्रीत न होई गोसाईं’। मोदीजी ने इसे साबित कर भारत का डंका बजा दिया है। आज विश्व की बड़ी से बड़ी ताकत हमारा सम्मान करती है।
स्वाभिमान जगाया
हिंदुओं का
उपलब्धियों की ऐसी लंबी सूची है पर सबसे बड़ा जो काम किया वो हिन्दुओं में स्वाभिमान जगा दिया। पहले हिन्दु बहुसंख्यक होने के बावजूद शोषित, पीड़ित, सहमा सा और छितराया हुआ रहता था। अनायास ही मोदीजी ने आने वाली हिन्दु पीढ़ियों के लिये सुरक्षा, स्वाभिमान, सम्मान और इंसाफ के रास्ते प्रशस्त कर दिये।
लंबे समय के बाद ऐसा शासक मिला है। देश का सौभाग्य है। हमें अवसर मिला है इस अवसर को पकड़ के रखें। इस अवसर को खोएं नहीं। किसी भ्रम में पड़कर भाजपा का विरोध कर अपने पैर पर ही नहीं अपने सर पर कुल्हाड़ी न मार लें।
गलतियां स्वाभाविक हैं, गलतियां तो होना अवश्यंभावी है, पर गलतियों की सजा देने के चक्कर में हम उन बड़े फायदों से वंचित न हो जाएं जिनसे हमारी आजादी और जीवन प्रभावित हो सकता है।
1076

1076 ये एक संख्या मात्र नहीं है। ये है छत्तीसगढ़ के लिये उम्मीद की किरण। ये है सिस्टम की तानाशाही, नाइंसाफी और प्रताड़ना से मुक्ति का मार्ग। जनता की तकलीफों को दूर करने के लिये पहले भी कई मंच बनाए गये हैं। सबको पता है इनका हश्र क्या होता आ रहा है। इन मंचों के माध्यम से शिकायत की जाती है और वह शिकायत घूम फिर कर उन्ही हाथों मंे पहुंचती है जिनसे जनता पहले निराश हो चुकी होती है।
जवाबदारी तय
अब संभलेंगे अधिकारी
1076 और पहले के मंचों में फर्क ये है कि अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने काम न होने पर अधिकारियों की जवाबदारी तय करने की घोषणा की है। अभी तक काम न होने पर किसी को किसी प्रकार का दण्ड देने की परम्परा नहीं थी, लिहाजा छोटा हो या बड़ा किसी भी विभाग का कोई भी अधिकारी खौफ नहीं खाता था क्योंकि अधिकारियों द्वारा ढाले गये इस सिस्टम से अधिकारी आशान्वित था। उसे पता था कि कोई उसका कुछ बिगाड़ेगा नहीं।
पर अब 1076 यानि मुख्यमंत्री हेल्पलाईन से अधिकारियों की जवाबदारी तय होगी। यदि ऐसा हुआ तो निश्चित जानिये ‘रामराज’ की परिकल्पना साकार होने में देर नहीं लगेगी। इसके लिये मुमं विष्णुदेव साय को जितनी बधाई दी जाए कम है। बस इस दिशा में अध्किारियों को गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’





