उमस भरी गर्मी के बाद हल्की हल्की पानी की फुहारें मिट्टी की सौंधी सौंधी खुशबू का लुफ्त उठाते बैठा ही था कि एक के बाद एक मच्छर आकर कान में भिनभिनाने लगे । उनकी भिनभिनाहट को ध्यान लगा कर सुनने लगा तो नालायक कह रहे थे बॉस “पुलिस विभाग में मस्त वसूली चल रयेला , गृह मंत्री के गृह जिला भी नाही छुटल बा इनसे और आप हो कि खाली पीली मौसम का मजा लो कलम की इज्जत का भी तनिक ख्याल कर लिया करो । जबरन के भिनभिनाते मच्छरों को मसल कर रख दिया मैने भी मजाल है कोई पुलिस विभाग की ईमानदारी पर सवाल उठाए ?
मौसम का लुफ्त उठाते खुशनुमा शाम में खलल से दिमाग गरम हो गया था मच्छरों की बढ़ती आबादी को लेकर नंगरा पालिका को कोसता इसके पहले गोबरहिंन टुरी और लपरहा टुरा टपक पड़ते है । गोबरहिंन कहती है महराज सरोधा में खड़खड़िया खेलाय बर 30000 हफ्ता लागथे सुने हावव लपरहा बर कुछु सेटिंग कर देतेस । कुछ बोलता इसके पहले लपरहा बीच मे बोल पड़ता है महराज पुलिस में भारी सेटिंग चलत हावय जी 10 किलो गांजा 8 लाख नगदी के छोटटकुंन वजन में सेट हो गए जय हो सरोधा दाई के । बांधा में मछली के साथ साथ ऊपरी कमाई घलो हो जाते पुलिस के । उसकी बातों को सुन गुस्सा तो बहुत आया फिर समझाया बेटा पुलिस का दर्द समझना आसान नहीं है वसूली करना इतना आसान नही होता , बहुत मुश्किल से होती है वसूली ? असल मे ये दुनिया दुखी लोगों से भरी पड़ी हैं जो किसी को खुशी देखकर अंदर से सुलगने लगते हैं। दूसरे की कामाई देखकर पेट में मरोड़ होने लगता है। उनकी वसूली की जानकारी मिली नई की पुलिस खेलने का सामान हो जाती है। लोगों को तो बस दरोगा सिपाही और हवलदार के हिस्से के नोटों के बंडल दिखने लगते हैं, लेकिन ये नोट कितने मुश्किल से वसूली हुए होंगे, इससे किसी को कोई लेना देना नहीं है।
का है न गोबरहिंन पैसे पेड़ पे नई उगते मेहनत लगती है । अब खड़खाड़िया , गांजा , सट्टा , जुआँ हो या चोर से पैसा कमाने के लिए दरोगा से लेकर सिपाही तक को कितना दिमाग दौड़ाना पड़ता है बड़े साहब से सेटिंग करनी पड़ती है । दिमाग के शैतानी कीड़े के जगाना पड़ता है । कई बार अपना जमीर बेचकर बेचारे सटोरिये , जुआरियों , खड़खड़िया , गांजा तस्करों जलील करना पड़ता होगा, कई बार फर्जी रपट करके फंसाने की धमकी देकर वसूली करनी पड़ती होगी, कई बार मोटा आसामी देख कर गलत को सही और सही को गलत भी बताना पड़ता होगा इतना करने के लिए आत्मा को मारने का हुनर भी होना चाहिए तब कही हफ्ता , महीना या केश रफा दफा करने के एवज में वसूली में चंद गड्डियां मिल पाती है । तुम लोगो को साहब लोगो की मेहनत नहीं दिखती दिखती है तो बस नोटों की गड्डियां ।
पुलिस की मेहनत देखो व्ही व्ही आई पी , व्ही आई पी ड्यूटी , नाइट गस्त , नेताओ की सुरक्षा , ट्रैफिक ड्यूटी , धरना प्रदर्शन में नेताओ के पुतले जलने से बचाने की ड्यूटी साहब के बंगले की ड्यूटी , सब्जी तरकारी से गिफ्ट तक के इंतजाम की ड्यूटी इतने जरूरी व्यस्तताओं के बाद हम पुलिस की कौन सी मदद करते हैं? कभी किसी ने स्वेच्छा से पुलिस को पैसा दिया है क्या ? एक बार भी नहीं न , उन्हें मेहनत करके खुद वसूली करनी पड़ती है। अब बेचारे इतनी मेहनत करके कुछ लाख कमा ले तो उनकी कमाई में नजर नही लगाना चाहिए । पुलिस का दर्द समझना आसान नहीं है गोबरहिंन बहुत मुश्किल से होती है वसूली! कुछु जुगाड़ कर और खड़खड़िया सट्टा जुआँ बिंदास खेला ।
चलते चलते :-
1 . गांजे के खेल को शिकायत की गूंज मंत्री दरबार तक पहुंची किस किस पर गिरेगी गाज ?
2 . सरोधा के खड़खड़िया के खेल में हफ्ता वसूली की चर्चा जोरों पर ?
3 . बेमेतरा जिले के लोहारा थाना क्षेत्रान्तर्गत आ कर जुआँ खेलने वालो की जानकारी के बावजूद क्यों नही पकड़ पा रही पुलिस ?
और अंत में :-
बेबी को बेस पंसद है साहब को एसी पसंद है ।
#जय_हो 12 जुलाई 2024 कवर्धा (छत्तीसगढ़)