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मत्स्य पालन शुरू करने का फैसला जीवन बदल देने वाला रहा, बसंत की कमाई भी लाखों में

बेटे की शादी की बड़ी जिम्मेदारी भी आसानी से निभा सके, सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता और विभागीय सहयोग ने दिखाई प्रगति की राह
अम्बिकापुर । विकासखण्ड उदयपुर के ग्राम कलचा के निवासी बसंत लाल मेहनत- मजदूरी कर अपनी आजीविका चलाते थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और 5 बच्चे हैं, बसंत का जीवन बहुत ही मुश्किल भरा था। बच्चों की पढ़ाई, राशन, दैनिक जरूरतों के लिए पैसों की कमी हमेशा बनी रहती थी। वहीं शारीरिक समस्या के कारण मजदूरी कार्य भी ठीक से नहीं हो पा रहा था। तब उन्होंने मछली पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया और आर्थिक रूप से सशक्त हुए।
0.709 हेक्टेयर में कर रहे हैं मत्स्य पालन-
बसंत ने पखना तालाब 0.709 हेक्टेयर लीज पर लेकर मत्स्य पालन शुरू किया था। शुरुआती समय में यह कार्य उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। बसंत के बड़े बेटे अमरजीत ने मत्स्य पालन में प्रशिक्षण लिया और तकनीकों का उपयोग कर उन्हें बेहतर परिणाम मिलने शुरू हुए। मेहनत और तकनीक के बलबूते मछलियों में काफी वृद्धि आई और मछलियों का वजन लगभग 900 ग्राम से 1.50 किलोग्राम तक पहुंच गया।
शासकीय योजनाओं का भी मिला लाभ-
बसंत ने बताया कि मत्स्य बीज एवं मछली के चारे हेतु पैसों की कमी के कारण अच्छी किस्म के मछली बीज संचयन में परेशानियां हुईं,परन्तु मछली पालन विभाग में शासन द्वारा चलाई जा रही किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लगभग 10 लाख रुपए का लोन मिला। जिससे मछली बीज, मछली भोजन सहित अन्य सामग्रियां ख़रीदीं। वहीं बसंत ने बताया कि उन्हें मछली पालन विभाग द्वारा संचालित नाव-जाल योजनांतर्गत 01 नग जाल भी प्रदाय किया गया है, जिसकी मदद से वे प्रत्येक माह तालाब में जाल चलाकर मछलियों में हो रही वृद्धि एवं बिमारियों का नियमित देखभाल करते हैं।
अब लाखों में हो रही है कमाई-
बसंत ने बताया कि गत वर्ष उन्हें उत्पादन में लगभग 1.50 लाख रुपए की लागत आई। 3.74 टन मत्स्य का उत्पादन हुआ, जिसके विक्रय से उन्हें 7.50 लाख रूपये तक कि आमदनी हुई। उन्होंने बताया कि वे उदयपुर, लखनपुर, महंगई, लटोरी सहित आस-पास के गांवों में साप्ताहिक बाजारों में मछलियां विक्रय हेतु भेजते हैं। इस तरह कम लागत से बसंत लाखों की कमाई कर रहे हैं।
धूमधाम से की बेटे की शादी, बच्चों के भविष्य की चिंता भी हुई दूर-
बसंत ने गत वर्ष अपने बड़े पुत्र का विवाह धूमधाम से किया। बड़ी बात है कि बिना किसी कर्ज के वे इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभा पाए। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें बच्चों की पढ़ाई उनके आगे के जीवन के लिए सोचना पड़ता था। लेकिन आज मछली पालन उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया है। उन्होंने बताया कि मेहनत मजदूरी से होने वाली आय से बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर उनका भविष्य उज्ज्वल करना केवल सपना था। लेकिन आज ये समस्या भी दूर हो गई है और बच्चे बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई कर रहे हैं।

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