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टीएस सिंहदेव ने की नितिन गडकरी की तारीफ 0 नियम विरूद्ध टोल प्रदेश में O छत्तीसगढ़ में स्मार्ट भ्रष्टाचार,00 वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी….

 

 

 

गडकरी की तारीफ की सिंहदेव ने

नितिन गडकरी एक अच्छे नेता हैं। प्रधानमंत्री स्तर के। कहा भी जाता है कि आरएसएस का एक तबका गडकरी को प्रधानमंत्री बनाने के कयास लगा रहा है। इस नेता ने जो कहा दमदारी से कहा और दमदारी के साथ इसे पूरा भी किया।

उन्होंने काम न करने वाले अधिकारियों को पीटने की धमकी सरेआम देकर देश को चैंकाया भी।

यहां तक कि छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने विगत दिनों एक टीवीे चैनल को दिये इंटरव्यू में भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी की खुलकर तारीफ की।

जब उनसे पूछा गया कि नरेन्द्र मोदी के बाद भाजपा के किस नेता को इस लायक समझते हैं तो उन्होंने तत्काल नितिन गडकरी का नाम ले लिया।

नियम विरूद्ध टोल
प्रदेश में

इस बार लेकिन सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ढाई साल पहले लोकसभा में जो आश्वासन दिया था उस पर खरे नहीं उतरे। गडकरी ने कहा था कि टोल नाकों को नियमानुसार बनाया जाएगा।

सरकारी नियम ये कहता है कि एक टोल प्लाजा से दूसरे की दूरी 60 किलोमीटर से कम नहीं होनी चाहिये, जबकि छत्तीसगढ़ मे मनमाने ढंग से टोल बनाए गये हैं। यहां मात्र 13 किलोमीटर की दूरी पर ही टोल देखे जा सकते हैं। प्रदेश में लगभग दस ऐसे मामले हैं जहां नियमों की अनदेखी करते हुए केवल बीस, तीस और चालीस किलोमीटर पर ही टोल बना दिये गये हैं।

लोकसभा में वायदा करके भी मंत्रीजी इस काम को पूरा करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
क्या ऐसे किसी नियम का उल्लंघन करने की छूट सामान्य नागरिकों को भी दी जाए सकती है ? ये आमजन के लिये कष्टदायक और दुखद है।

उच्च स्तर पर ऐसी नियमों की अनदेखी करने के कारण ही निम्न स्तर पर भी नियमों को उल्लंघन किया जाता है।

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट भ्रष्टाचार

ऐसे ही नियम विरूद्ध खरीदी का मामला सामने आया है जिसमें साफ तौर पर करोड़ों का भ्रष्टाचार दिखता है।

छत्तीसगढ़ में स्कूलों को स्मार्ट बनाने के लिये वाईफाई सिस्टम और एलईडी टीवी लगाने की घोषणा की गयी। इस पर आनन-फानन मे खरीदी की गयी।

मजेदार बात ये है कि जहां वाई फाई नहीं है वहां भी टीवी खरीद ली। यहां तक कि बिना कमेटी की अनुमोदन के ही फर्नीचर, कंप्यूटर संबंधी सामान आदि अनावश्यक सामान भी खरीद लिया गया।

जानकारी के अनुसार ये सारा सामान बार-बार एक ही फर्म से खरीदा गया। कहा जा सकता है कि सरकारी धन की लूट है, लूट सके तो लूट।

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