
नई दिल्ली । स्वर्ण मौद्रिकरण योजना (जीएमएस) की घोषणा 15 सितंबर, 2015 को की गई थी। इसका उद्देश्य दीर्घकाल में सोने के आयात पर देश की निर्भरता को कम करना तथा घरों और संस्थाओं के पास उपलब्ध सोने का उत्पादक प्रयोजनों के लिए उपयोग को सुविधाजनक बनाना था।
जीएमएस में 3 घटक शामिल थे:
लघु अवधि बैंक जमा (1-3 वर्ष)
मध्यम अवधि सरकारी जमा (5-7 वर्ष), और
दीर्घावधि सरकारी जमा (12 – 15 वर्ष)
स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (जीएमएस) के निष्पादन की जांच और बाजार परिस्थितियों में परिवर्तन के आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि जीएमएस के मध्यावधि और दीर्घावधि सरकारी जमा (एमएलटीजीडी) घटकों को 26 मार्च, 2025 से बंद कर दिया जाए।
इसके अनुसार, नामित संग्रह और शुद्धता परीक्षण केंद्र (सीपीटीसी) या जीएमएस मोबिलाइजेशन, कलेक्शन एंड टेस्टिंग एजेंट (जीएमसीटीए) या जीएमएस के उक्त घटकों के अंतर्गत नामित बैंक शाखाओं में जमा किए गए किसी भी सोने को 26 मार्च, 2025 से स्वीकार नहीं किया जाएगा। लेकिन, एमएलटीजीडी के अंतर्गत मौजूद जमाराशियां रिजर्व बैंक के दिनांक 10-10-2008 के मास्टर निदेश सं. डीबीआर.आईबीडी. 45/23.67.003/2015-16 दिनांक 22 अक्टूबर 2015 (अद्यतन) के अंतर्गत जारी जीएमएस के वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार प्रतिदान होने तक जारी रहेंगी।
इसके अलावा, जीएमएस के अतर्गत बैंकों द्वारा प्रस्तावित अल्पावधि बैंक जमाराशियां (एसटीबीडी) अलग-अलग बैंकों के विवेक पर उनके द्वारा किए गए मूल्यांकन के अनुसार वाणिज्यिक व्यवहार्यता के आधार पर जारी रहेंगी। इस संबंध में रिज़र्व बैंक के विस्तृत दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा।







