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जज को टीआई बनने की दुआ, सब ऑनलाईन आसान हुआ धन्यवाद मुख्यमंत्रीजी वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी…. खरी…

बेहद मजेदार मगर दुखद कहानी है। आजकल दुख में भी मजा ढूंढ लेने की प्रवृति पनप रही है क्योंकि और कुछ तो आप कर नहीं सकते।

सिस्टम इतना क्रूर है कि आपके दुख, परेशानी, अपमान, यहां तक कि आपकी मौत से भी उसके कान पर जूं नहीं रेंगती। सरकारी आपकी किसी आपदा में अपने लिये अवसर तलाश लेते हैं। तो ये कहानी जब सुनी तो सभी खूब हंसे मगर सबको पता था कि अंदर से विचलित हो गये हैं सभी।

एक किसान की जमीन के एक भाग पर किसी ने कब्जा कर लिया। मध्यमवर्गीय परिवार न्याय के लिये दर-दर भटकता रहा। अंततः भारी मशक्कत के बाद दस साल कोर्ट में लड़ने के बाद उस ने केस जीता। जब जज ने किसान के हक में फैसला सुनाया तो किसान ने हाथ जोड दिये और आंखो मे आंसू भरकर बोला ‘बहुत मेहरबानी साहब, आपका बहुत धन्यवाद।

भावुक किसान ने जज साहब को ढेरों दुआएं दीं ‘भगवान आपको और तरक्की दे साहब।

भगवान आपको और बड़ा आदमी बनाए।

भगवान आपको टीआई बनाए’।

सब चौंके ‘टीआई’ बनाए ? वकील ने समझाया कि जज साहब बहुत बड़े होते हैं। टीआई तो इनके सामने बहुत छोटा होता है।

किसान बोला ‘नहीं साहब। टीआई बहुत बड़ा होता है। मेरी ही जमीन मेरे नाम कर वापस दिलाने में जज साहब ने दस साल लगा दिये और दो लाख रूपये मेरे खर्च हो गये।

जबकि उसी जमीन को दस साल पहले टीआई साहब मात्र पांच हजार में मेरे नाम करने को तैयार थे। मैं ही मूर्ख था नहीं माना। टीआई बहुत बड़ा होता है साहब। टीआई बहुत बड़ा होता है….

कोर्ट में उपस्थित सभी के मुंह बंद हो गये। सच तो है अपने इलाके का राजा होता है टीआई, जो मर्जी कर ले। सबके दिलों में कही न कहीं हाहाकार मच रहा था।

देश-प्रदेश में बदलेगा सिस्टम….

खबर आई कि रजिस्ट्री कराने के बाद तत्काल नामांतरण हो जाया करेगा। समझे न। पहले नामांतरण के लिये तहसीलदार के यहां आवेदन देकर चक्कर काटकर, प्रताड़ित होकर और पैसे खिलाकर जमीन या मकान अपने नाम चढ़ाया जाता था।

अब लेकिन देन एण्ड देयर नाम ट्रांसफर हो जाएगा। यानि रजिस्ट्री और नामांतरण के बीच जमीन का पुराना मालिक यानि जमीन बेचने वाला किसी और को भी जमीन बेचने की धोखाधड़ी कर सकता था, क्योंकि नमांतरण तक रिकॉर्ड में जमीन उसी के नाम दिखती थी।

लेकिन अब उसे ये धोखा करने का अवसर ही नहीं मिलेगा। और खरीददार व्यर्थ के कोर्ट कचहरी और प्रताड़ना से मुक्ति पा लेगा, क्योंकि रजिस्ट्री के साथ-साथ नामांतरण हो जाएगा।

जानकारी है कि भविष्य में रजिस्ट्री के लिये भी कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा। घर बैठे काम हो जाया करेगा।

इसके अलावा तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज का भुगतान ऑनलाईन किया जाएगा। समझ में ये आता है कि ऑनलाईन होने से ‘जाकर पेमेन्ट लेने’ वाली परेशानियों, चक्कर काटने और पैसे लेने के लिये चाय-पानी देने की बेईमानी से बचा जा सकेगा।

धन्यवाद मुख्यमंत्रीजी

छत्तीसगढ़ में भी बहुत सारी सुविधाओं को ऑनलाईन करने से बेईमानी और ठसन से आम आदमी को अपमानित करने और रिश्वत लेने वाले कर्मियों को भारी ठेस लगी है।

जैसे हम मंत्रालय की बात करें तो रिश्वत कितने लोग लेते थे ये तो पता नहीं पर मंत्रालय में सारी फाईलों को ऑनलाईन करने से बाबूओं के चक्कर काटकर चिरौरी करने वालों को बड़ी राहत मिली है अन्यथा अच्छे-अच्छे तुर्रम खां बाबूओं के आगे उठक-बैठक कर यानि उनकी टेबलों पर आकर बार-बार बैठने और हाथ जोड़कर फाईल आगे सरकाने का निवेदन करते दिखते थे।

गति शायद धीमी हो सकती है मगर नीयत और लक्ष्य साफ है।

धन्यवाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी। बहुत-बहुत धन्यवाद।


जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक

मोबा. 9522170700

‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’

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