
प्रशिक्षण में संयुक्त संचालक डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने तम्बाकू नियंत्रण नीतियों, तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्था एवं तम्बाकू मुक्त ग्राम पंचायत जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रभावशाली ढंग से मार्गदर्शन प्रदान करते हुए सभी ज़िलों को ज़मीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई हेतु प्रेरित किया। संयुक्त संचालक लोक शिक्षण हेमंत उपाध्याय ने शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों को शैक्षणिक संस्थाओं में तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्था के दिशा निर्देश अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित कर संभाग के शत-प्रतिशत स्कूलों को तम्बाकू मुक्त घोषित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसर में अब तंबाकू खाना या सिगरेट पीना शिक्षकों के लिए महंगा पड़ सकता है। जांच के दौरान ऐसा करते पाए गए तो उन्हें जुर्माना भरना पड़ेगा। कार्यक्रम में सरगुजा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी.एस. मार्को द्वारा तम्बाकू नियंत्रण कानून का कड़ाई से अनुपालन कराए जाने सुझाव दिए गए। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति तम्बाकू एवं धूम्रपान के सेवन की आदत को पूर्ण रूप से छोड़ने हेतु स्वयं दृढ़संकल्प लेकर भी कर सकता है, उसके दुष्परिणाम तुरंत नहीं दिखते किन्तु भविष्य में अनेक प्रकार की बिमारी शरीर में प्रवेश कर जाती है।
जिला नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता द्वारा तम्बाकू नशा मुक्ति केंद्र की सेवाएं, तम्बाकू के हानिकारक प्रभावों एवं राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम में अन्य विभागों की भूमिका से अवगत कराया गया। उन्होंने बताया कि तम्बाकू चबाने से कई तरह के कैंसर हो सकते हैं। भारी मात्रा में तंबाकू का सेवन करने वालों को यह भी महसूस हो सकता है कि चबाने वाले तंबाकू की वजह से उनके दांत घिसने और दागदार होने लगे हैं, जिससे मसूड़े भी पीछे हट सकते हैं। जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ पुष्पेंद्र राम ने सभी शैक्षणिक संस्थाओं सहित ग्राम पंचायतों को तम्बाकू मुक्त किए जाने की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। इस संभाग स्तरीय प्रशिक्षण में ब्लूमबर्ग परियोजना के संभागीय समन्वयक प्रकाश श्रीवास्तव, संभाग के समस्त खण्ड चिकित्सा अधिकारी , समस्त करारोपण अधिकारी, समस्त ग्राम पंचायत सचिव उपस्थित थे।








