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कृषक उन्नति योजना बनेगी फसल विविधीकरण की आधारशिला

*दलहन, तिलहन, मक्का, कपास एवं लघु धान्य फसलों को मिलेगा प्रोत्साहन*

रायपुर 17 जुलाई 2025/छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, किंतु वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए दलहन, तिलहन, मक्का, कपास एवं लघु धान्य फसलों के क्षेत्र विस्तार की दिशा में ठोस पहल की गयी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की आय में वृद्धि एवं खेती को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना के दायरे में विस्तार और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।

कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा धान के अतिरिक्त अब अन्य खरीफ फसलों जैसे मक्का, तिलहन, दलहन, कोदो-कुटकी, रागी एवं कपास की खेती को बढ़ावा देने हेतु कृषकों को प्रति एकड़ 10,000 रुपये की दर से आदान सहायता राशि प्रदाय की जाएगी। यह सहायता राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में अंतरित की जाएगी।

राज्य के अधिकांश कृषक वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर हैं, ऐसे में जलवायु की अनिश्चितता एवं आदान लागत में वृद्धि के कारण किसानों को उत्पादन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक एवं आधुनिक कृषि तकनीकों में निवेश की सीमित क्षमता के चलते उनकी आय प्रभावित होती है। इन चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कृषक उन्नति योजना के माध्यम से कृषि में निवेश को बढ़ावा देने तथा किसानों को राहत पहुंचाने की प्रभावी पहल कृषक उन्नति योजना के माध्यम से की गई है।

इस योजना का लाभ उन्हीं कृषकों को मिलेगा, जिन्होंने एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन कराया है। विगत खरीफ सीजन में धान उत्पादन करने वाले और सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले ऐसे पंजीकृत कृषकों को, यदि वे आगामी खरीफ में धान के स्थान पर कोई अन्य फसल लें, तो प्रमाणित गिरदावरी के आधार पर 11,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता प्रदान की जाएगी।

इसी प्रकार, खरीफ सीजन 2025 में मक्का, कपास, दलहन, तिलहन एवं लघु धान्य फसलें (कोदो-कुटकी, रागी) उगाने वाले कृषकों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

नवीन दिशा-निर्देशों के अनुसार विधिक निकाय जैसे ट्रस्ट, मंडल, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां, समितियां, शासकीय/अर्धशासकीय संस्थाएं इस योजना के लाभ के पात्र नही हैं। बीज उत्पादक कृषकों द्वारा राज्य बीज निगम को विक्रय किए गए धान बीज पर भी नियत प्रावधानों के अनुरूप सहायता प्रदान की जाएगी। ऐसे मामलों में सहायता की मांग बीज निगम द्वारा कृषि संचालक को प्रस्तुत की जाएगी।

आदान सहायता राशि का भुगतान छत्तीसगढ़ कृषि भूमि सीलिंग अधिनियम के प्रावधानों के अधीन किया जाएगा। बीज उत्पादन करने वाले कृषकों के कुल विक्रय की मात्रा, उनके धारित कृषि भूमि रकबे से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसकी निगरानी राज्य विपणन संघ एवं राज्य बीज विकास निगम द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी।

प्रदेश सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर इस साल उपार्जित होने वाले धान (कॉमन) पर 731 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 15,351 रुपये प्रति एकड़ तथा धान (ग्रेड-ए) पर 711 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 14,931 रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि निर्धारित की गई है।

योजना के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारियों या विकासखंड स्तरीय कृषि विभाग कार्यालयों से संपर्क किया जा सकता है।कृषक उन्नति योजना न केवल कृषकों की आय में वृद्धि का माध्यम बनेगी, बल्कि प्रदेश के कृषि परिदृश्य में विविधता लाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं किसानों को जोखिम से बचाने में भी मील का पत्थर साबित होगी।

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