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केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने नीलांबुर स्थित अमल कॉलेज ऑफ एडवांस्ड स्टडीज में कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन किया

एआई, मेडिकल कोडिंग, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता सहित आधुनिक पाठ्यक्रमों का शुभारंभ किया
उन्होंने जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) के लाभार्थियों को 1,800 प्रमाणपत्र और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित 300 लाभार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए
जन शिक्षण संस्थान केवल कौशल विकास केंद्र ही नहीं अपितु समुदायों के लिए आशा की किरण भी हैं: जयंत चौधरी

नई दिल्ली । कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के अंतर्गत कार्यरत जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) मलप्पुरम ने कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी की उपस्थिति में एक जीवंत लाभार्थी सम्मेलन और प्रदर्शनी के माध्यम से मंत्रालय की 10वीं वर्षगांठ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में समावेशी, जमीनी स्तर के कौशल विकास और सामुदायिक परिवर्तन के एक दशक का उत्सव मनाते हुए 50,000 से अधिक व्यक्तियों को नवीन, आजीविका-केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से लाभान्वित किया गया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में, श्री जयंत चौधरी ने जेएसएस मलप्पुरम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह समुदाय-आधारित सशक्तिकरण का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने लघु, सूक्ष्म, सूक्ष्म और ग्रामीण उद्यमों को भारत के आर्थिक विकास की प्रेरक शक्ति के रूप में देखा है। इस दृष्टिकोण का परिवर्तनकारी प्रभाव इस बात में स्पष्ट है कि हम देश के कुछ सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में कारीगरों और समुदायों को सशक्त बना रहे हैं। जन शिक्षण संस्थान योजना का मूल दर्शन जमीनी स्तर की वास्तविकताओं का समाधान निकालना और स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं को पूरा करना है।
उन्होंने कहा कि जेएसएस मलप्पुरम इस दृष्टिकोण का एक ज्वलंत उदाहरण है। चाहे जनजातीय बस्तियों तक पहुंचना हो या दिव्यांग नागरिकों का समर्थन करना हो, यह गरिमा, समावेशिता और स्थिरता का प्रतीक है। ये केवल कौशल विकास केंद्र नहीं हैं- ये आशा के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ रहे हैं, जेएसएस मलप्पुरम जैसे मॉडल हमें समुदाय-आधारित परिवर्तन की वास्तविक शक्ति दिखाते हैं।
2006 में अपनी स्थापना के बाद से, जेएसएस मलप्पुरम ने क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप पहलों में अग्रणी भूमिका निभाई है। विद्या पहल ने जनजातीय आबादी में साक्षरता बढ़ाने के लिए एक विशेष रूप से डिज़ाइन की गई संवाद करने वाल पैन, खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण और चश्मे व टॉर्च वितरण जैसी स्वास्थ्य सहायता प्रदान की। उल्लासम- जॉब विद प्लेज़र ने विधवाओं, 40 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं और तलाकशुदा महिलाओं को पांच दिन काम के साथ योग और स्वास्थ्य के लिए एक समर्पित दिन जोड़कर सार्थक रोज़गार और भावनात्मक सहारा प्रदान किया है। स्पर्श, विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों के लिए एक प्रशिक्षण और उद्यम पहल, ने एक स्व-संचालित उत्पादन इकाई के गठन का मार्ग प्रशस्त किया है जो अब जिला प्रशासन के सहयोग से उपलब्ध बाज़ार संपर्कों से लाभान्वित हो रही है।
जेएसएस मलप्पुरम की क्षमता इसके अभिसरण मॉडल में निहित है- स्थानीय सरकारों, सीएसआर भागीदारों, नाबार्ड, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज के साथ मिलकर कार्य करना ताकि स्थायी प्रभाव उत्पन्न किया जा सके। इस संस्थान ने डीडीयूजीकेवाई, एनयूएलएम, पीएमकेवीवाई, नई मंज़िल, नई रोशनी आदि सहित कई राष्ट्रीय पहलों के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण भागीदार के रूप में कार्य किया है। वर्ष 2021 से, यह नाबार्ड केरल के साथ साझेदारी में एक एकीकृत जनजातीय विकास कार्यक्रम कार्यान्वित कर रहा है, जिससे 400 परिवारों को लाभ हुआ है। अब इसकी योजना आने वाले वर्ष में एक एकीकृत तटीय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ करके इस मॉडल का विस्तार करने की है।
इस केंद्र की उल्लेखनीय यात्रा को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। इसे 2014 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा साक्षर भारत पुरस्कार, 2016 में यूनेस्को कन्फ्यूशियस साक्षरता पुरस्कार और 2017 में टैगोर साक्षरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2021-22 के लिए मंत्रालय की ग्रेडिंग में, जेएसएस मलप्पुरम ने 98 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जो देश में सर्वोच्च अंकों में से एक है। स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) के पूर्ण रूप से शामिल भागीदार के रूप में, यह संस्थान ग्रामीण कौशल विकास में डिजिटल एकीकरण और पारदर्शिता में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जिसमें रीयल-टाइम निगरानी और आधार-आधारित उपस्थिति प्रणाली शामिल हैं।
इस समारोह में जेएसएस लाभार्थियों को 1,800 प्रमाणपत्र और पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित 300 लाभार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। डिजिटल अंतर को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में, इस कार्यक्रम में नैसकॉम के सहयोग से ग्रामीण लाभार्थियों के लिए एआई साक्षरता मॉड्यूल का शुभारंभ भी किया गया।
इससे पहले, श्री चौधरी ने नीलांबुर स्थित अमल कॉलेज ऑफ एडवांस्ड स्टडीज में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के अंतर्गत स्थापित कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन किया। माननीय मंत्री ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा प्रदान किए जाने वाले कुछ नए पाठ्यक्रमों, जिनमें एआई, मेडिकल कोडिंग, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता शामिल हैं, का भी शुभारंभ किया।
7.92 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह केंद्र एक अत्याधुनिक सुविधा है, जिसे अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में रोजगारोन्मुखी शिक्षा के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण अवसंरचना प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।
समर्पित प्रयोगशालाओं, सेमिनार हॉल और नवाचार केंद्रों के साथ, यह केंद्र क्षेत्रीय असमानताओं को समाप्त करने और युवाओं—विशेषकर महिलाओं और वंचित वर्गों—को आधुनिक कार्यबल में सफल होने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मंत्री महोदय ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे शिक्षा और रोजगारपरकता के बीच समन्वय का एक आदर्श मॉडल बताया, जो समावेशी विकास और विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

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