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एआई कवर आर्ट ने मचाया हड़कंप, न्यूजीलैंड बुक अवॉर्ड से दो बड़े लेखकों की किताबें हुईं बाहर

न्यूजीलैंड के प्रतिष्ठित ओखम बुक अवॉर्ड्स ने इस वर्ष एक ऐसा फैसला लिया जिसने साहित्यिक दुनिया में हंगामा मचा दिया है। देश के दो प्रमुख लेखकों स्टेफनी जॉनसन और एलिजाबेथ स्मिदर, को पुरस्कार की रेस से बाहर कर दिया गया क्योंकि उनकी किताबों की कवर डिजाइन में एआई-जेनेरेटेड इमेजरी शामिल पाई गई।

 

यह घटना उस समय सामने आई जब न्यूजीलैंड बुक अवॉर्ड्स ट्रस्ट की ओर से दिए जाने वाले अवॉर्ड की कमेटी ने अगस्त 2025 में अपने नियम अपडेट किए और साफ कर दिया था कि किताब के कवर पर किसी भी तरह की एआई-जनित सामग्री स्वीकार नहीं की जाएगी। नई पॉलिसी लागू होने के बाद यह पहला मामला था जिसने साहित्य और तकनीक के रिश्ते पर गंभीर चर्चा को हवा दे दी।

स्टेफनी जॉनसन की किताब ‘ऑब्लिगेट कार्निवोर’ के कवर पर एक बिल्ली की तस्वीर है जिसके दांत असामान्य रूप से मानवीय दिखते हैं। जॉनसन का कहना है कि उन्हें लगा यह महज फोटो एडिटिंग का मामला है, लेकिन बाद में पता चला कि डिजाइनर ने एआई टूल का उपयोग किया था। जॉनसन के अनुसार, उन्हें पुस्तक के कवर में इस तरह की तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी नहीं थी। उन्होंने नाराजगी जताई कि लोग अब यह गलतफहमी पाल सकते हैं कि उनकी पूरी किताब एआई से बनाई गई है, जबकि वास्तविकता में समस्या सिर्फ एक डिजाइन तक सीमित है। जॉनसन ने ये बातें आरएनजी से कहीं।

उधर, एलिजाबेथ स्मिदर की किताब ‘एंजिल ट्रेन’ का कवर डिजाइन भी इसी कारण विवाद में फंस गया। स्मिदर ने ‘न्यूजरूम’ मीडिया आउटलेट से बताया कि उनकी डिजाइनर टीम ने घंटों मेहनत करके कलाकृति तैयार की थी, जो फ्रांसीसी-रूसी कलाकार मार्क शागल के रंग-संयोजन और शैली से प्रेरित थी। लेकिन अवॉर्ड्स कमेटी ने जब बताया कि इमेज जनरेशन में एआई की आंशिक भूमिका थी, तो किताब को तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया गया। स्मिदर ने कहा कि यह निर्णय कलाकारों और लेखकों की मेहनत को कमतर दिखाता है, खासकर तब जब उन्हें इस तकनीकी उपयोग की जानकारी तक नहीं थी।

अवॉर्ड्स ट्रस्ट की अध्यक्ष निकोला लेगाट ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि नियमों को कड़ा बनाना जरूरी था ताकि साहित्य और कला में मानव रचनात्मकता तथा कॉपीराइट की रक्षा की जा सके। उनका तर्क है कि एआई का अनियंत्रित इस्तेमाल न केवल रचनात्मक श्रम का अवमूल्यन करता है बल्कि कला की मौलिकता पर भी सवाल खड़े करता है। इसलिए, प्रतियोगिता को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाना ही एकमात्र विकल्प था।

यह पूरा प्रकरण एक व्यापक बहस को जन्म दे रहा है—क्या एआई सिर्फ एक उपकरण है, या यह मानव कला के मूल मूल्य को चुनौती दे रहा है? एआई एक आधुनिक साधन है जिसका इस्तेमाल फोटो एडिटिंग, रंग सुधार और प्रयोगात्मक कला में अब आम हो चुका है।

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