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बांग्लादेश आम चुनाव रोकने का क्या हो सकता है दुष्परिणाम?

बांग्लादेश में इन दिनों राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। एक तरफ हसीना को मौत की सजा सुनाई गई है, और दूसरी ओर यूनुस के साथी ही उनके खिलाफ होते नजर आ रहे हैं। जमात और बीएनपी ने यूनुस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। देश में अगले साल आम चुनाव होने जा रहा है। इन सबके बीच में अवामी लीग ने आगामी चुनाव ब्लॉक करने की चेतावनी दे दी है। आइए जानते हैं कि चुनाव रोकने का क्या दुष्परिणाम हो सकता है।

बांग्लादेश में चुनाव रोकने से कई राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। विपक्षी दल और सत्तापक्ष में तनाव बढ़ने की उम्मीद है। हालात देखते हुए हिंसा की उम्मीद भी की जा सकती है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वनीयता के साथ ही बांग्लादेश की छवि को भी नुकसान पहुंचेगा। आर्थिक रूप से भी इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है।

कोई भी विदेशी कंपनी या दूसरा देश व्यापार करने के लिए निवेश करने से कतराएगा। इसकी वजह से अंतर्राष्ट्रीय दबाव के साथ ही सामाजिक तनाव भी देखने को मिल सकता है।

दरअसल, यूनुस की अंतरिम सरकार ने अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर रखा है। ऐसे में अवामी लीग के सदस्य और शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने चुनाव ब्लॉक करने की चेतावनी दी है।

बांग्लादेशी मीडिया ने दावा किया है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके परिवार के कई सदस्य अगले साल होने वाले चुनाव में वोट नहीं डाल सकेंगे। उनके राष्ट्रीय पहचान पत्र (एनआईडी) कार्ड ब्लॉक कर दिए गए हैं।

कुछ समय पहले निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने मीडिया को जानकारी दी थी कि जिन लोगों का राष्ट्रीय पहचान पत्र (एनआईडी) ब्लॉक है, वे विदेश से वोट नहीं डाल सकेंगे। जिन लोगों ने मुकदमों या अन्य कारणों से देश छोड़ा है, वे वोट डाल सकते हैं, बशर्ते उनका एनआईडी ब्लॉक न हो।

उन्होंने कहा कि विदेश से वोट देने के लिए एनआईडी नंबर के साथ ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा। पासपोर्ट से यह काम नहीं होगा। अगर किसी का एनआईडी ब्लॉक है, तो वे रजिस्टर नहीं कर सकते और वोट नहीं डाल पाएंगे। केवल एनआईडी के साथ रजिस्टर करने वालों को ही यह मौका मिलेगा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या शेख हसीना वोट दे पाएंगी, तो उन्होंने कहा, “वह वोट नहीं दे पाएंगी, क्योंकि उनका एनआईडी ब्लॉक कर दिया गया है।”

दूसरी ओर जुलाई चार्टर को चुनाव से पहले लागू करने को लेकर बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी पार्टी और बीएनपी ने यूनुस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। गाजीपुर सीट बहाल करने को लेकर भी अलग-अलग विरोध प्रदर्शन देखे गए।

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