
अद्भुत, दिलचस्पः- जितनी भी फिल्में जुड़वा बच्चों के बारे में देखी हैं उनमें हमेशा मजेदार ये रहा है कि एक को मजा आता है तो दूसरे को भी मजा आता है। एक को दर्द होता है तो दूसरे को भी दर्द होता है।

एक फिल्म में मजेदार ये दिखाया गया कि हीरो हीरोईन से रोमैंटिक बातें करता है तो हीरो का जुड़वा भाई भी रोमैंटिक बातें करने लगता है…. अब उसके पास हीरोईन तो थी नहीं लिहाजा एक पेड़ से ही बातें करता है। उसे ऐसा प्रतीत होता है जैसे वो पेड़ नहीं, हीरोईन खड़ी है।
ये एक तथ्य है कि दुनियां के किन्ही भी दो लोगों की हाथ की लकीरें कभी भी एक जैसी नहीं होतीं। लेकिन एक अद्भुत और दिलचस्प खगर ये आई है जिसने साईंस को भी झिंझोड़ दिया है।
कानपुर के पवन मिश्रा के जुड़वा पुत्रों प्रबल और पवित्र के फिंगर प्रिन्टस ही नहीं आंखों की रैटीना तक सेम टू सेम हैं। ये बात तब सामने आई जब दोनांे के आधार कार्ड बनाये जाने लगे। एक के बनने के बाद जब दूसरे का बनता था तो पहले वाले का स्वतः ही निरस्त हो जाता था। है न अद्भुत। फिलहाल जांच जारी है।}
रिश्वत ली, पकड़ा
रिश्वत दी, छूट गये
हमारे यहां एक कहावत है, जो सैकड़ों बार कही-सुनी जाती रही है, कि ‘वो रिश्वत लेते पकड़ा गया और रिश्वत देकर छूट गया’। लगता है इसे फिर चरितार्थ किया है बिलासपुर के डीईओ ने। शिक्षा विभाग एक रिश्वतखोर बाबू को इन महाशय ने सस्पेण्ड कर दिया।
पर ऐसा लगा कि सस्पेण्ड भी दिल पर पत्थर रखकर किया। क्योंकि मामला कलेटर के संज्ञान में आ गया था। लेकिन ये क्या किया, बिना मामले का निराकरण हुए ही, बिना किसी सजा के उस बाबू की पदस्थापना कर दी, वो भी उसी स्थान पर ।
दरअसल खपरी स्कूल के टीचर संतोष साहू का मेडीकल बिल पास करने के एवज में सीएस नौरके ने दस प्रतिशत कमीशन मांगा। जिसकी शिकायत कलेक्टर से करने पर उसे सस्पेण्ड कर दिया गया और फिर डीईओ ने पुनः तैनात भी कर दिया।
हां से सजा के नाम पर उसे पुचकार कर कहा ‘भविष्य में दोबारा ऐसी गलती करता है तो कार्रवाई होगी।’ भाई आम आदमी का भी एक गुनाह माफ करने का नियम बनवा देते तो कितना अच्छा होता… हा… हा… ।
वैसे ये हंसने की नहीं दुख की बात है कि रिश्वत के मामले को बिना अदालत भेजे घर के घर में निपटा दिया।
कितना हिस्सा मिलता है डीईओ साहब ? अफसोस है सरकार के लोगों की ऐसी ढीठता और बेशर्मी पर… ।
इनको जेल क्यों
इनको भी पुचकारो
मौका दो
दरभा, बस्तर में सांप के काटने से मृत महिला को मुआवजा देने के लिये पच्चीस हजार की रिश्वत लेने वाले दरभा तहसील के बाबू को एंटी करप्शन ब्युरो ने पकड़ लिया।
एसीबी ने ही चांपा के पटवारी और आॅपरेटर को रिश्वत के मामले में दबोच लिया। साथ ही पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर को इक्कीस हजार की रिश्वत लेने के लिये पकड़ लिया गया।
सरकार से अनुरोध है कि इन सभी रिश्वतखोरों को पुचकार कर डांटकर एक और मौका दे कि भविष्य में ऐसा न करें।
श्रम निरीक्षक सुरेश कुर्रे को रिश्वत के मामले में अदालत से 3 साल की कैद और पचास हजार जुर्माना किया गया। सरकार को ये मामला अदालत न ले जाकर कुर्रे को नसीहत देकर आॅफिस में ही निपटा देना था।
इनके मामले में ऐसा क्यों नहीं कहा गया कि ‘भविष्य में दोबारा ऐसी गलती करता है तो सजा मिलेगी’ ? इन सबसे हिस्सा नहीं मिलता था क्या ? हिस्सा तो इनसे भी मिलता ही होगा न। ————————–
जवाहर नागदेव,
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700








