
संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेसी सांसद रेणुका चौधरी ने नये विवाद को जन्म दे दिया। वे अपने साथ एक कुत्ते को ले आईं। जब सुरक्षा की दृष्टि से इस पर आपत्ति की गयी तो वे बोलीं ‘रास्ते में एक स्कूटर और कार की टक्कर हुई। वहां कुत्ते का पिल्ला घूम रहा था जिसे मैने रख लिया। यहां आकर गाड़ी भी गयी, कुत्ता भी गया।
इसी तारतम्य में उन्होंने बेहद आपत्तिजनक बात कही कि ‘असली डसने वाले और काटने वाले तो पार्लियामेन्ट में बैठे हैं, सरकार चला रहे हैं। उसका कोई ऐतराज नहीं है… ’
रेणुका चैधरी की हंसी

ये वही रेणुका चैधरी हैं जिन्होंने कुछ वर्ष पहले संसद मे अभद्र तरीके से हंसकर विवाद पैदा कर दिया था। उस समय वे संसद के अंदर प्रधानमंत्री जी के भाषण के दरम्यान किसी बात पर जोर-जोर से व्यंग्यात्मक ढंग से हंसीं और काफी देर तक लगातार हंसती रहीं, जिससे तत्कालीन सभापति वेंकेया नायडू सख्त नाराज हो गये।
तब मोदीजी ने कहा कि रामायण सीरियल के बाद अब जाकर…. ऐसी हंसी सुनने का सौभाग्य मिला है। उनके इस बयान से संसद में ठहाका गूंज गया और कांग्रेसी तिलमिला उठे। कांग्रेसी बोले ‘मोदीजी ने रेणुकाजी की तुलना शूर्पणखा से की है। मोदीजी को माफी मांगनी चाहिये’।
इस संबंध मे एक कवियित्री ने मजाक किया कि कांग्रेसियों की नाराजगी पर मोदीजी बोले ‘मैं तो इनकी हंसी की तुलना माता सीता से कर रहा था तो कांग्रेसी बोले ‘मूर्ख मत बनाईये मोदीजी जैसे हमें पता ही नहीं कि रेणुका जी की हंसी किससे मिलती है।

बात रेणुका चैधरी के संयम की करें तो कुत्ता लाने के ताजा प्रकरण पर वे एक बार फिर असंयमित हो गयीं। क्योंकि भाजपा द्वारा विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने के बारे में जब पत्रकारों ने पूछा तो रेणुका चैधरी बोलीं ‘भौं… भौं… ।
मुझे नहीं बुलाया: नाराज राहुल

राहुल गांधी कहते हैं कि परम्परा रही हैं आमतौर पर प्रधानमंत्री लीडर आॅफ आॅपोजिशन यानि नेता प्रतिपक्ष को भी विदेशी मेहमानों से मिलवाते हैं। मोदीजी मुझे रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से मिलने क्यांे नहीं दे रहे हैं।
राहुलजी ये भूल गये कि आमतौर पर तो बहुत सी परम्पराएं निभाई जाती हैं, आमतौर पर नेतागण प्रधानमंत्री के साथ उस स्तर की बत्तमीजी नहीं करते जैसी आप करते हैं, आप कहते हैं ‘उसे’ ‘डण्डे’ मारेगी जनता। उसे और डण्डे ?
आम तौर पर झूठे मामलों को बार-बार नहीं उठाया जाता, आप झूठे मामलों को उठाते हैं, माफी मांगते हैं फिर कोई और झूठा मामला उठाते हैं। आमतौर पर विदेश जाकर अपने देश को गाली नहीं दी जाती, झूठ नहीं फैलाया जाता आप ऐसा करते हैं।
आमतौर पर विदेशियों से अपने देश की सरकार पलटाने के लिये गिड़गिड़ाया नहीं जाता, आप और आपके बाशिंदे गिड़गिड़ाते हैं….. विदेशियों के सामने। वो विदेशी जो मोदीजी का लोहा मानने लगे हैं। आमतौर पर सभ्यता और सलीके की परम्परा रही है लेकिन आप नहीं निभाते।
तो परम्पराएं तो बहुत सी हैं, आप कितनी निभाते हैं ?
एलओपी को मिलवाना परम्परा है हक नहीं
लीडर आॅफ आॅपोजिशन को मिलवाने की परम्परा है। परम्परा है… कोई संवैधानिक अधिकर नहीं कानूनी हक नहीं। यदि रागा को इतनी ही पीड़ा है तो वे कोर्ट जाएं। मगर वे कोर्ट जाएंगे नहीं। वे तो पत्थर उछालकर भाग जाने वालों में से हैं।
कई बार ये बात सामने आई है कि आप अपनी बात के लिये कोर्ट में शपथ पत्र दें पर आप नहीं देते। शायद इसलिये कि आप जानते हैं कि आप गलत हैं।
आप प्रधानमंत्री को चोर कहते हैं। पहले चैकीदार चोर कहा माफी मांगी अब वोट चोर कहते हैं। इसी चुनाव आयोग के रहते आपने 99 सीटंे जीतीं, तब सरकार को या चुनाव आयोग को वोटचोर क्यों नहीं कहा। पूरा देश, पूरा अवाम जानता है कि केन्द्र सरकार अपने कामों से जीतती है।
स्ंासद में कुत्ता लाने पर राहुल गांधी
संसद परिसर में पेट्स यानि पालतू जानवर अलाउ नहीं हैं। अंदर तो पेट्स अलाॅउ हैं। एक वरिष्ठ पत्रकार ने प्रश्न किया है कि ‘क्या उनकी मां पेट्स हैं, उपकी बहन पेट्स हैं आपकी पार्टी के सांसद पेट्स हैं’।
सभी सांसद सम्मानीय हैंै करोड़ों लोगों की पसंद हैं। 140 करोड़ के नेता हैं। क्या इन माननीयों को इस तरह का संबोधन आपको शोभा देता है। ————————–
जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700







