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समावेशी शिक्षा अंतर्गत क्षमता निर्माण एवं गैप एनालिसिस प्रशिक्षण का हुआ आयोजन

समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत समावेशी शिक्षा कार्यक्रम के तहत क्षमता निर्माण एवं गैप एनालिसिस (आउट ऑफ स्कूल) विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यालय से वंचित बच्चों की पहचान करना, उनके शैक्षणिक स्तर का मूल्यांकन करना तथा उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना था।
कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी के निर्देश एवं जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में कार्यक्रम का शुभारंभ विकासखंड स्रोत समन्वयक  मनोज अग्रवाल द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा का मूलभाव यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा, चाहे वह शारीरिक, मानसिक या सामाजिक किसी भी प्रकार की चुनौती से जूझ रहा हो-शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि समान अवसर एवं सम्मान के साथ प्रत्येक बच्चे को शिक्षित करना ही शासन की प्राथमिकता है। प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर सुमित्रा चंद्रा (बीआरपी) एवं स्पेशल एजुकेटर दीपक रात्रे ने सामान्य एवं दिव्यांग विद्यार्थियों को एकीकृत कक्षाओं में शिक्षण प्रदान करने के व्यवहारिक तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने समावेशी कक्षा संचालन, व्यक्तिगत आवश्यकता-आधारित शिक्षण, गतिविधि-आधारित अधिगम तथा विभिन्न व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया।
इस अवसर पर डॉ.रागनी (फिजियोथैरेपिस्ट) ने दिव्यांग बच्चों के लिए थेरेपी के महत्व, उनके शारीरिक विकास के उपायों तथा घर पर किए जा सकने वाले सरल अभ्यासों के बारे में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि नियमित व्यायाम और सकारात्मक वातावरण बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों को समावेशी शिक्षा में शामिल 21 प्रकार की दिव्यांगता, उनके लक्षण, शैक्षणिक आवश्यकताएँ, उपलब्ध सरकारी सुविधाएँ और अधिकारों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) के प्रभावी उपयोग से दिव्यांग विद्यार्थियों को सरल तथा रुचिकर तरीके से पढ़ाने के विभिन्न उपायों का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में पालकगण, शिक्षक, विशेष शिक्षक एवं शिक्षण स्टाफ की भागीदारी रही। सभी प्रतिभागियों ने समावेशी शिक्षा को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प व्यक्त किया। प्रशिक्षण के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने बच्चों की सीखने की कठिनाइयों, व्यवहार संबंधी समस्याओं और उनके समाधान से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनके विशेषज्ञों ने संतोषजनक उत्तर प्रदान किए। दो दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 300 छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

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