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राष्ट्रपति ने G RAM G बिल को दी हरी झंडी, मनरेगा बना इतिहास

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB—G RAM G) बिल, 2025 को रविवार को मंजूरी दे दी. इसके साथ ही बिल अब कानून का रूप ले लिया और पूर्व की मनरेगा योजना अब इतिहास बन गई.

VB G RAM G बिल, 2025 ग्रामीण परिवारों के लिए वैधानिक मजदूरी रोजगार गारंटी को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिन तक बढ़ाता है. मनरेगा के नाम बदलने को लेकर विपक्ष लगातार मोदी सरकार पर हमलावर है. विपक्ष ने नये बिल को काला कानून बताया है.

VB G RAM G: 18 दिसंबर को संसद से पारित हुआ था जी राम जी विधेयक

संसद ने गुरुवार 18 दिसंबर को विपक्ष के विरोध के बीच विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025 को पारित कर दिया था. ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधेयक पर कहा था, कांग्रेस ने बापू के आदर्शों की हत्या की, जबकि मोदी सरकार ने उन्हें जिंदा रखा है.

100 दिन बदले 125 दिन मिलेगा रोजगार

मनरेगा कानून के तहत पहले 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है. ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद में कहा था कि इस विस्तार के लिए कुल 1,51,282 करोड़ रुपये की पर्याप्त धनराशि प्रस्तावित की गई है. इस राशि में केंद्र सरकार का हिस्सा 95,000 करोड़ रुपये से अधिक है.

नये कानून के पीछे सरकार की क्या है योजना?

चौहान ने बताया था कि नयी योजना के अनुसार, सरकार गारंटी देने के अलावा एक पूर्ण गांव, एक विकसित गांव, एक रोजगार संपन्न गांव और एक गरीबी मुक्त गांव बनाने की योजना बना रही है.

कांग्रेस ने नये कानून को लेकर मोदी सरकार पर बोला हमला

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर मनरेगा जैसे ऐतिहासिक कानून का अपमान करने का आरोप लगाया. कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने नये कानून पर हमला करते हुए कहा था, मोदी सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया है और करोड़ों किसानों, श्रमिकों एवं भूमिहीन ग्रामीण वर्ग के गरीबों के हितों पर हमला किया है. उन्होंने कहा था कि पार्टी नए काले कानून के खिलाफ लड़ाई को लेकर प्रतिबद्ध हैं. कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक वीडियो संदेश में कहा था कि पिछले 11 साल में मोदी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार, गरीबों और वंचितों के हितों को नजरअंदाज कर मनरेगा को कमजोर करने की हर कोशिश की, जबकि कोविड के समय यह गरीब वर्ग के लिए संजीवनी साबित हुआ.00

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