
वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर रायपुर लोकसभा क्षेत्र में ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा एवं राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा तथा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सुभाष स्टेडियम, रायपुर में दस हजार से अधिक विद्यार्थियों ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की, जबकि शेष विद्यार्थियों ने अपने-अपने विद्यालय एवं महाविद्यालय परिसरों में एक साथ सामूहिक रूप से वंदे मातरम का गायन किया। इस प्रकार एक ही समय पर कुल पांच लाख से अधिक विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन कर राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।
मुख्य अतिथि श्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि युवाओं को वंदे मातरम केवल कंठस्थ ही नहीं, बल्कि उसके भाव और अर्थ को भी समझना चाहिए। यह हमारा राष्ट्रीय गीत है, जो देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करता है। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल के नेतृत्व में पांच लाख विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक गायन एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने आयोजन के लिए सभी को बधाई दी।
मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि वंदे मातरम गीत हमारे इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह गीत देश के लिए ऊर्जा और शक्ति का स्रोत है। यदि विद्यालयों में सप्ताह में एक दिन इसका नियमित गायन किया जाए, तो निश्चित रूप से विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना विकसित होगी। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं।
रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम को केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों का प्रेरक मंत्र बताया है। मातृभूमि की वंदना का यह गीत आज पूरे देश में गाया जा रहा है। इसी क्रम में रायपुर लोकसभा क्षेत्र के लगभग 3000 विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में एक साथ पांच लाख से अधिक विद्यार्थियों ने एक समय पर सामूहिक गायन कर इतिहास रच दिया।
छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने वंदे मातरम् गीत के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा की वंदे मातरम् का रचना बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1876 में किया गया था। जब भारत परतंत्र था, इस राष्ट्रीय गीत ने युवाओं में एक ऊर्जा का संचार किया और वे भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी और हमें स्वतंत्रता दिलाई।
कार्यक्रम के दौरान सेना दिवस के उपलक्ष्य में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों डॉ. हीरेंद्र त्रिपाठी, किशोरी लाल, संतोष कुमार, देवेंद्र कुमार एवं योगेश कुमार को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।








