मनरेगा के पशु शेड निर्माण से नारायण को गौपालन में मिली नई राह हितग्राही को आमदनी का बना नया माध्यम

कोरबा 06 फरवरी 2026/ जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा यदि दृढ़ हो, तो सीमित साधन भी विकास का मार्ग खोल देते हैं। ग्राम पंचायत कोनकोना, विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा के निवासी और मनरेगा में रोज़ मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले हितग्राही  नारायण पिता श्री धर्मजीत की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। छोटा व्यवसाय शुरू करने और गौपालन से आमदनी बढ़ाने का सपना उनके मन में था, पर साधनों की कमी उन्हें आगे कदम बढ़ाने से रोक रही थी।
इन्हीं चुनौतियों के बीच महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ,मनरेगा उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। पंचायत से जानकारी मिली कि योजना के तहत पशुधन के लिए पक्का शेड निर्माण करवाया जा सकता है। नारायण की समस्या समझते हुए ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित किया और 77 हजार रुपये की लागत से पशु शेड निर्माण की स्वीकृति दी।
निर्माण के दौरान नारायण और उनके परिवार के सदस्यों को मनरेगा के माध्यम से रोजगार भी मिला। इससे उन्हें दोहरा लाभ मिला, एक ओर पक्का पशु शेड, दूसरी ओर अतिरिक्त आमदनी।
समस्याओं से समाधान तक का सफर
पशुशेड बनने से पहले नारायण कई परेशानियों से जूझ रहे थे, बारिश, ठंड और गर्मी से पशुओं को सुरक्षित रखना भारी पड़ता था। खुले में बंधे पशु अक्सर इधर-उधर चले जाते थे। गीली और कच्ची ज़मीन पर रहने से पशु बार-बार बीमार पड़ते थे, जिससे इलाज पर भारी खर्च करना पड़ता था। इसके साथ ही विषैले जीवों के खतरे के कारण पशुओं की जान पर भी संकट मंडराता था। पक्का शेड बन जाने के बाद यह सभी समस्याएं खत्म हो गईं। अब पशु सुरक्षित हैं, बीमारियां कम हुई हैं, और देखभाल भी आसान हो गई है।
गौपालन से बढ़ी आमदनी
नारायण के पिता  धर्मजीत बताते हैं कि पहले परिवार के पास केवल 2 मवेशी थे। अब संख्या बढ़कर 5 मवेशी हो गई है। आगे और गाय खरीदकर गौपालन को एक पूर्ण व्यवसाय के रूप में विकसित करने की उनकी योजना है। आज नारायण का परिवार मनरेगा के इस कार्य से आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है और गौ पालन उनके लिए स्थायी आय का नया स्त्रोत बनकर उभरा है।
मनरेगा-गांव की तरक्की और हितग्राहियों की उन्नति का आधार
पशुशेड निर्माण ने न केवल हितग्राही नारायण के पशुओं को सुरक्षित स्थान दिया, बल्कि उनके परिवार को आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ाया। मनरेगा ने उन्हें न सिर्फ रोजगार दिया, बल्कि अपने सपनों को साकार करने का मजबूत आधार भी दिया।
हितग्राही नारायण का कहना है कि मनरेगा से बने पशु शेड ने हमारे जीवन में व्यवसाय के नए अवसर दिए हैं। अब हम ज्यादा गौपालन करके अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। योजना ने हमारे परिवार को आर्थिक संबल दिया है। मनरेगा सिर्फ रोजगार नहीं देती, बल्कि ग्रामीणों के सपनों को भी हकीकत में बदलती है।

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