
(दरारों में दबा भ्रष्टाचार? बेमेतरा ओपन जेल पर बड़ा खुलासा)
गोपाल शर्मा
बेमेतरा 11फरवरी — 18 करोड़ 69 लाख 41 हजार रुपये की लागत से बन रही 200 बंदी क्षमता वाली ओपन जेल अब शुरू होने से पहलेवो ही सवालों के घेरे में आ गई है। जेल की मजबूत बताई जा रही सुरक्षा दीवारों में जगह-जगह पड़ी बड़ी दरारों ने निर्माण गुणवत्ता और विभागीय निगरानी की पोल खोल दी है।
लोक निर्माण विभाग द्वारा अनुबंध क्रमांक 239/DL 2022-23 के तहत “A” क्लास ठेकेदार श्री अमित जैन को यह कार्य सौंपा गया था। निर्माण कार्य लगभग पूर्ण बताया जा रहा है, केवल इलेक्ट्रिकल कार्य शेष है, लेकिन हैंडओवर से पहले ही दीवारों का इस तरह दरकना गंभीर अनियमितता की ओर संकेत करता है।
* निरीक्षण के बाद भी खामियां —
उप अभियंता योगेश शुक्ला, भाई राम मरकाम, अनुविभागीय अधिकारी भावेश सिंह, आर.के. शर्मा, राजेश कुमार बाजपेयी और कार्यपालन अभियंता डी.के. चंदेल के निरीक्षण के बावजूद दरारों का सामने आना कई सवाल खड़े करता है। क्या निरीक्षण महज औपचारिकता बनकर रह गया? या फिर निर्माण में हुई लापरवाही को नजरअंदाज किया गया?
*नियमों की अनदेखी —
करोड़ों की इस परियोजना स्थल पर निर्माण संबंधी अनिवार्य सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया। पारदर्शिता के अभाव ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
*तत्काल कार्रवाई हो–
अब स्थानीय नागरिकों और जागरूक लोगों ने निम्न मांगें उठाई हैं:
1. संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल विभागीय जांच एवं निलंबन की कार्रवाई हो
2. ठेकेदार के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए शेष एवं लंबित भुगतान तत्काल प्रभाव से रोका जाए
3. हैंडओवर से पहले थर्ड पार्टी तकनीकी जांच कराई जाए
4. निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र एजेंसी से संरचनात्मक ऑडिट कराया जाए

*कथन — इस संबंध में जब लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदारों से बात की गई तो अनुविभागीय अधिकारी राजेश कुमार बाजपेयी को मामला बताने पर उन्होंने कहा कि वे बाहर है जबकि उसी समय वे अपने कार्यालय परिसर में टहलते हुए संवाददाता से मोबाइल पर बात कर रहे थे , भी उप अभियंता योगेश शुक्ला ने कहा कि वे शासन का पक्ष रखने के लिए सक्षम नहीं है , उन्हें विभाग से निर्देश मिला है कि किसी भी समाचार में अपना वर्सन नहीं देना है …








