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मेहनत और आत्मविश्वास से हीराबाई बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

*मालगांव की हीराबाई ने बकरी पालन से लिखी सफलता की नई कहानी*

*बिहान समूह से जुड़कर हीराबाई ने बदली अपनी आर्थिक स्थिति*

*रायपुर, 06 मार्च 2026 (IMNB NEWS AGENCY) गरियाबंद जिले के ग्राम मालगांव की निवासी श्रीमती हीराबाई निषाद ने अपने साहस, दृढ़ निश्चय और निरंतर मेहनत के बल पर महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हुए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया और आज वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
वर्ष 2011 में हीराबाई ने गांव की महिलाओं को संगठित कर स्व-सहायता समूह की शुरुआत की। इसके बाद वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ते हुए उन्होंने “माता कृपा महिला स्व-सहायता समूह” की स्थापना की और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया। समूह के माध्यम से आरएफ फंड से 60 हजार रुपये का ऋण प्राप्त कर उन्होंने बकरी पालन का कार्य प्रारंभ किया। शुरुआत में उन्होंने 8 बकरियां खरीदीं और उनकी देखभाल के साथ समय-समय पर बिक्री कर अच्छी आय अर्जित करने लगीं। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी। एक बकरी को लगभग 15 हजार रुपये तक में बेचकर वे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने लगीं। आज स्थिति यह है कि उनकी बकरियों की संख्या 8 से बढ़कर लगभग 50 तक पहुंच चुकी है और वे नियमित रूप से बकरियों की बिक्री कर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं।
आय में वृद्धि होने के साथ ही हीराबाई ने अपने कार्यों का विस्तार किया। त्यौहार के समय कुछ बकरियों की बिक्री से प्राप्त आय से उन्होंने 1 लाख 50 हजार रुपये की दोना-पत्तल बनाने की ऑटोमैटिक मशीन खरीदी, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होने लगी। इसके बाद उन्होंने 1 लाख 80 हजार रुपये की लागत से अगरबत्ती बनाने की मशीन भी खरीदी, जिससे उनकी आय के नए स्रोत तैयार हुए।
हीराबाई ने गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया। उन्होंने 1 लाख रुपये का डाउन पेमेंट कर लगभग 6 लाख रुपये की छोटी मालवाहक गाड़ी भी खरीदी। इस गाड़ी के माध्यम से उनका बेटा आसपास के गांवों में दैनिक उपयोग की वस्तुएं लेकर जाकर बिक्री करता है, जिससे परिवार की आमदनी में निरंतर वृद्धि हो रही है।
लगातार बढ़ती आय और मेहनत के बल पर हीराबाई ने आगे चलकर ट्रैक्टर, ट्रॉली और थ्रेसर भी खरीदे, जिससे कृषि कार्यों में सुविधा मिली और उनकी आमदनी पहले से कई गुना बढ़ गई।
आज हीराबाई निषाद सच मायनों में अपने परिवार की ‘हीरा’ बनकर चमक रही हैं। उनकी लगन, मेहनत और आत्मविश्वास ने न केवल उनके परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा प्रदान की है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प और परिश्रम से कोई भी महिला आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ सकती है।

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