
– 0 गोपाल शर्मा – की रिपोर्ट
बेमेतरा 17 मार्च 26 :-
बेमेतरा जिले में एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ कलेक्टर, सांसद, विधायक और मंत्री मंचों से पेयजल संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, सोखता पिट बनाने का प्रचार हो रहा है और किसानों को गर्मी में धान नहीं लगाने की हिदायत दी जा रही है। लेकिन दूसरी तरफ पूरे जिले में खेतों के बीच खुलेआम अवैध ईंट भट्टों की “फसल” उगाई जा रही है।
जिले के ग्रामीण अंचलों में अब गेहूं, तिवरा और चना की जगह सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि पर ईंट भट्टे धधक रहे हैं। हजारों की संख्या में संचालित ये भट्टे न सिर्फ जमीन की उर्वरता खत्म कर रहे हैं बल्कि पर्यावरण और जल संसाधनों को भी तेजी से निगल रहे हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि कई भट्टे मुख्य मार्गों, राष्ट्रीय और राजकीय सड़कों के किनारे तक खुलेआम चल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये भट्टे राजस्व और खनिज विभाग को दिखाई नहीं देते, या फिर विभाग जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है?

और भी गंभीर बात यह है कि कई जगहों पर कृषि अनुदान से लगाए गए बोरवेल के पानी का उपयोग ईंट भट्टों के व्यावसायिक काम में किया जा रहा है। यानी किसानों के लिए दी गई सरकारी सहायता का इस्तेमाल खुलेआम व्यापार में हो रहा है।
अवैध भट्टों के कारण खेतों की उपजाऊ मिट्टी खोदी जा रही है, जमीन बंजर हो रही है, भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और वातावरण में धुएं व राख से प्रदूषण बढ़ रहा है। लेकिन इन सबके बावजूद प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है।
अब सवाल यह है कि जब पूरा जिला सूखे की मार झेल रहा है, तब खेतों में धधकते इन अवैध ईंट भट्टों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
क्या प्रशासन की नजर नहीं पड़ रही ?
अगर समय रहते इस पर सख्ती नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बेमेतरा की उपजाऊ धरती ईंटों के ढेर में तब्दील हो जाएगी और जिम्मेदार सिर्फ वही होंगे जो आज सब कुछ देखकर भी चुप हैं।









