
*पैट्रोल सस्ता-विपक्ष खस्ता, हेडिंग और ये लाईन पढ़कर पूरी खबर समझ में आ गयी होगी।* कुछ और कहने की जरूरत शायद नहीं है।

नेशनल ट्राईबल गेम में
अधिकारियों का गेम
अधिकारी जो न करें कम है।
*ये दूसरी मंजिल पर बोर कराने की अनुमति दे देते हैं। ये 9 टन माल एक बार में स्कूटर और बाईक पर ढोना दर्शा कर बिल ले लेते हैं। ये पैसे मिलते हों तो रात की घटना को दिन की बता देते हैं। ये लड़की का जेण्डर चेंज दर्शा देते हैं। और ये…. और ये…. अब बस की जाए। नहीं तो इसी पर पूरा पन्ना भर जाएगा*।

यहां तो बस उन्होंने ऐसा किया है कि खेलमंत्री अरूण साव की उपस्थिति में पनीर परोसा और उनके जाते ही आलू पर उतर आए। संभावना ये व्यक्त की जा रही है कि बिल पनीर का ही लगाया होगा।
*शर्म चाहे न आए महानुभाव, पर मंत्रीजी का डर तो अंदर आना चाहिये न। शायद पूरा भरोसा है कि परम्परा अनुसार कमाए माल में से हिस्सा उपर पहुंचाना सारे कष्टों का निवारण कर देगा।*
देश में सबसे पहले नेशनल ट्राईबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में हो रहा है।
जिसमें खिलाड़ियों को परोसे जाना वाला भोजन 400 रूप्ये किलो के पनीर से सुसज्जित था, जब तक खेल मंत्री अरूण साव स्थल पर मौजूद थे और उनके जाते ही थाली में 25 रूप्ये किलो का आलू दिखने लगा।

सावधान
टाईम पास करने के लिये मोबाईल में एपीके किसी भी लिंक को क्लिक करने से आपका फोन हैक हो जाएगा और आपके एकाउन्ट के पैसे लिंक भेजने वाले के अण्डर हो जाएंगे। राजधानी के किराना दुकान कमल टेडर्स के मालिक कमल शाडीजा के एकाउन्ट से लाखांे रूप्ये पार हो गये।
*ईधर फायदा तो ईसाईउधर फायदा तो एससी-एसटी*

*आंध्रप्रदेश के पादरी चिंथाड़ा आनंद को होशयारी कोर्ट में काम न आई। दरअसल वे ईसाई धर्म ग्रहण कर लेने के बाद मारपीट के मामले में सामने वाले पर एससी-एसटी की धाराएं भी जुड़वाना चाहे रहे थे।*

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये जातिगत व्यवस्था ईसाई धर्म में नहीं है इसलिये अनुसूचित जाति जनजाति को मिलने वाले लाभ का हकदार कोई ईसाई नहीं हो सकता।
पिछले दस सालों से चिंथाड़ा ने हिंदु धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाया । वे ईसाई होते हुए एससी-एसटी की सुविधाओं का लाभ नहीं ले सकते।

*चर्चा है कि अब ईसाई संस्थाएं धर्म परिवर्तन के समय धर्म परिवर्तन करने वाले से नाम बदलने को नहीं कहती हैं ताकि जातिगत मिलने वाले लाभ मिलते रहें। बस घर में हिंदु देवी-देवताओं के चित्र लगाने और पूजा-पाठ से मना करती हैं। यानि ईसाई तो बनो पर कानून की नजर से छिपे रहो।*
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700






