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शिक्षा ने बदली जिंदगी : पहाड़ी कोरवा युवती बनी प्रेरणाश्रोत”

 

कोरबा 30 मार्च 2025/विकासखण्ड कोरबा के वनांचल क्षेत्र, ग्राम पंचायत गढ़उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम कदमझेरिया की निवासी राजकुमारी, पहाड़ी कोरवा (विशेष पिछड़ी जनजाति) समुदाय की वह युवती है जिसने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़कर अपनी शिक्षा, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर एक नई पहचान बनाई है।
बचपन में परिवार के साथ दूसरों के घरों में मजदूरी करना, जंगलों से वनोपज इकट्ठा कर गुजर-बसर करना, यही उनकी दिनचर्या थी। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि एक वक्त का भोजन भी बड़ी मुश्किल से नसीब होता था। घास-फूस से बने कच्चे मकान में रहने वाली राजकुमारी का जीवन संघर्षों से भरा था।
घरवालों ने 5वीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे गांव भेजने से साफ इंकार कर दिया। लेकिन राजकुमारी ने हार नहीं मानी। संकल्प लिया कि शिक्षा ही जीवन बदल सकती है। जिद कर वह सतरेंगा के आदिवासी कन्या आश्रम में भर्ती हुई और अपनी पढ़ाई जारी रखी। 8वीं तक की पढ़ाई आश्रम में पूर्ण करने के बाद राजकुमारी ने घर पर रहते हुए 10वीं और 12वीं की परीक्षा स्वाध्यायी विधि से उत्तीर्ण की। इस दौरान समाज के ताने भी कम नहीं थे- “लड़कियों को ज्यादा पढ़ाई नहीं करनी चाहिए”, “ज्यादा पढ़ने से इंसान पागल हो जाता है” जैसी बातें उनके हौसले तोड़ने की कोशिश करती रहीं। लेकिन राजकुमारी का लक्ष्य स्पष्ट था। मुख्यधारा में शामिल होकर अपने समुदाय के लिए बदलाव का मार्ग प्रशस्त करना। शिक्षित और योग्य होने के कारण उन्हें आदिवासी विकास विभाग द्वारा क्ब्। कंप्यूटर कोर्स कराया गया। उनकी मेहनत रंग लाई और जिला प्रशासन कोरबा के विशेष भर्ती अभियान के तहत 1 जनवरी 2022 को उन्हें तहसील कार्यालय पोंड़ी-उपरोड़ा में सहायक ग्रेड-03 के पद पर नियुक्ति मिली।
आज राजकुमारी अपनी सरकारी नौकरी से आर्थिक रूप से सक्षम हो चुकी हैं। उन्होंने अपने जीवन स्तर को पूरी तरह बदल दिया है-कार, मोटरसाइकिल, स्कूटी, टीवी, फ्रिज, कूलर, मोबाइल जैसी सुविधाएँ अब उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हैं। वे अपने परिवार के साथ शासकीय कॉलोनी पोंड़ी-उपरोड़ा में सम्मानजनक और खुशहाल जीवन जी रही हैं। ससुराल ग्राम कोनकोना (पोंड़ी-उपरोड़ा) में उनका पक्का मकान भी निर्माणाधीन है। यह उनकी उपलब्धि और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। जहाँ एक ओर पहाड़ी कोरवा समुदाय शिक्षा के अभाव में अभी भी जंगलों और पहाड़ों के सहारे जीवन काट रहा है, वहीं राजकुमारी उनकी सोच और भविष्य दोनों को बदलने वाली प्रेरक शक्ति बन चुकी हैं। आज राजकुमारी को देखकर समुदाय की कई अन्य युवतियाँ और युवा शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं और शासकीय शिक्षण संस्थानों में प्रवेश ले रहे हैं।
राजकुमारी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ी कोरवा समुदाय के लिए आशा, परिवर्तन और सशक्तिकरण की प्रतीक बन चुकी हैं।

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