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परेशान हैं, अंदर से टूटे,आत्महत्या की आ गई नौबत; ये है हल, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी….

 

*{शत शत नमन – 3 अप्रैल 1680 को 50 वर्ष की आयु में छत्रपति शिवाजी महाराज का स्वर्गवास हुआ था। शत शत नमन}*

क्या आप अंदर से परेशान हैं ? हांेगे ही चाहे कम या ज्यादा मगर होंगे जरूर। अंदर से टूटे, निराश, हताश। किसी-किसी को कभी आत्महत्या का विचार भी आया होगा।

*कोई पैसे से परेशान है तो कोई रिश्तों से। जितना बड़ा आदमी उतनी बड़ी समस्या। भावुक इंसान को रिश्तेदारों, दोस्तों की दगाबाजी से दुख। वक्त पर अपनों के पलट जाने से दिल टूटना।*

यानि परेशान होने के हजारों कारण हैं। ऐसे में सुख से जीने के लिये किया क्या जाए।
जीवन मे जिन चीजों का प्रभाव पड़ता है वे हैं भाग्य,कर्म,प्रार्थना और वास्तु।

*भाग्य, कर्म, प्रार्थना, वास्तु*

*भाग्य बनता है कर्म से। कर्म अच्छे होंगे तो फल अच्छा मिलेगा। कर्म खराब होंगे तो कभी भी फल अच्छा नहीं मिलेगा। इसमें दो और दो चार का फार्मूला काम करता है।*

आमतौर पर जीवन में कभी दो और दो चार नहीं होता। दो और दो का परिणाम कभी कम तो कभी ज्यादा हो सकता है। लेकिन विधि के कर्म के विधान में दो और दो हमेशा चार होता है इसका कोई अपवाद नहीं। *कर भला तो होगा भला और बुरा करोगे तो बुरा ही भोगोगे।*

*यहां पर केवल इस जन्म के ही नहीं,पिछले जन्मों के कर्म भी संचित होकर गिने जाते हैं। इसीलिये इस जन्म में कई बेहद धार्मिक, दयालु और सात्विक लोग भी कष्ट भोगते हैं। निस्संदेह ये उनके पिछले जन्मों के कर्म के कारण है।*

खैर ये विषय बहुत लंबा खिंच जाएगा। इस पर फिर कभी विस्तार से चर्चा करेंगे।

अभी तो ये देखें कि यदि विधान में हमारे लिये कष्ट लिखा है तो इससे बचा कैसे जाए या इसे कम कैसे किया जाए।

*रामबाण है*
*बजरंगबाण का पाठ*

आमतौर आपने किसी असाध्य बीमारी के बारे मे बात करते हुए ये डायलाॅग जरूर सुना होगा कि फलां दवा ले लो, जरूर फायदा होगा ये रामबाण है।
रामबाण इलाज मतलब कभी फेल न होने वाला इलाज।
भगवान राम का छोड़ा बाण कतई कभी चूकता नहीं। इसलिये जो बात अवश्यंभावी होती है उसे रामबाण कहते हैं।

यदि आप बेहद निराश, हताश हैं। कोई रास्ता समझ में नहीं आ रहा है। तो यकीन मानिये आपके इलाज के लिये बजरंगबाण का पाठ रामबाण साबित होगा। यानि *यदि आपने नियमित रूप् से भगवान हनुमान की प्रार्थना बजरंग बाण के पाठ से की तो आपकी समस्या हल होने लगेगी।*

यदि कोई कष्ष्ट प्रारब्ध में लिखा हेै ओर भुगतना ही है तो उसका असर कम हो जाएगा।

विद्वजन ंबताते हैं कि *बेहद कठिन परिस्थिति में ही बजरंग बाण का पाठ करना चाहियें।* अन्यथा तो हनुमान चालीसा भी बेहद असरकारक है। नियमित हनुमान चालीसा के पाठ से इंसान गंभीर से गंभीर कष्ट से उबर सकता है।

*आजमा के देखिये*
*जीवन बदल न जाए तो कहना*

लोगों के व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर ये कहा जा सकता है कि दिल से, भरोसे से हनुमानजी को पुकारिये। *नियमित प्रार्थना कीजिये, आपका आत्मविश्वास एकाएक बढ़ जाएगा, घबराहट,चिन्ता दूर हो जाएगी, मन मजबूत हो जाएगा। यानि आप खुद सही निर्णय लेने की स्थिति में आ जाएंगें।*
*इसके अलावा परिस्थितियां अनुकूल होती चली जाएंगी।*

*आपके दुश्मन का दुश्मन आपसे एकाएक मिल जाएगा,जो आपका दोस्त बन जाएगा*। अथवा एकाएक अनअपेक्षित धन आ जाएगा। संतान जो प्रतिकूल थी एकाएक अनुकूल होने लगेगी। मन से डर निकलने लगेगा। जरूर आजमाइये।

*सेम, मंगल, बुध, गंुरू, शुक्र, शनि, सूर्य, राहु-केतु*
*पर प्रभाव*

*हनुमानजी की स्तुति का मंगल और शनि पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। मंगल खराब होने से या शनि का दुष्प्रभाव होने पर हनुमानजी की भक्ति करके सुधार लाया जा सकता है। यदि मंगल अच्छा है या शनि भी अनुकूल है तो हनुभतकृपा से इसका लाभ कई गुना ज्यादा मिलने लगता है।*

यदि कभी गलत काम किये हैं और नियमानुसार शनि के दण्ड के भागी हैं तो कर्म सुधारने के साथ हनुमानजी की पूजा करने से शनि के न्याय से मिलने वाली सजा में कमी आ सकती है।

भगवान सूर्य को हनुमानजी का गुरू कहते हैं तो हनुमान जी की कृपा से सूर्य का आशीर्वाद भी मिलता है। इसी तरह किसी भी ग्रह का दुष्प्रभाव हो उपाय हनुमत भक्ति है। जो रामबाण है।

*कर्म सुधारने से*
*संवरती है किस्मत*

कर्म अच्छे होने से किस्मत संवरती है। यदि आप किसी की भी मदद करने को तैयार रहते हैं और अपनी क्षमता अनुसार किसी के दुख को दूर करने के लिय उसका साथ देते हैं। तो आपको भी वक्त आने पर मदद मिलती है। इसमें कोई संदेेह नहीं।

जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700

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