
15 अप्रैल को पंचमुखी हनुमानजी के मंदिर में आशीर्वाद लेने के बाद सम्राट चैधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। खास बात ये है कि पहली बार भाजपा का अपना मुख्यमंत्री बना है बिहार में। इसके पहले लालू यादव और नीतिश कुमार गैर भाजपाई मुख्यमंत्री बनते रहे हैं।

हालांकि सम्राट भी पहले लालू के साथ थे। पर बाद में उन्होंनें भाजपा ज्वाईन कर ली।
उम्मीद की जा रही है कि अब बिहार में विकास होगा और बहुत बड़ा बदलाव आएगा।
भाजपा के नेता धर्मसंकट में हैं। यदि वे ये कहते हैं कि अब हम सुधार लाएंगे तो ये कहा जाएगा कि इसका मतलब इससे पहले सुधार नहीं था जबकि सरकार आपकी ही थी नीतिश कुमार के साथ। मतलब आपका शासन अच्छा नहीं था।
बहरहाल… भाजपा ने अब जो पैर जमाया है तो फिर ये अंगद के पैर की तरह जम जाएगा। सबको पता है अंगद का पैर नहीं हिल सकता। इस पर लालू क्या कहंेगे ये जानना दिलचस्प होगा।
क्योंकि एक बार 2010 में अपने घमण्ड में लालू यादव ने योगी आदिल्यनाथ को साधु बाबा कहा था और कहा था कि आपका काम है मंदिर मे जाकर घंटी बजाना। वक्त बदल गया है और अब योगी की पार्टी भाजपा ने लालू को घंटी बजाने पर विवश कर दिया है।
धन्ना सेठ और
गुण्डे का समझाौता
कल्लू भिखारी के घर
अमेरिका और ईरान की लड़ाई में बेहद दिलचस्प कमेन्टस आ रहे हैं। जब से पता चला है कि अमेरिका और ईरान के समझौता कराने के लिये पकिस्तान जरूरत से ज्यादा उत्सुक है तब से सारे विश्व में मजाक का दौर चल पड़ा है।

इस बात पर एक व्यक्ति ने कमेंट किया कि ‘घोर कलयुग है भैया, एक धन्ना सेठ और एक नामी गुण्डे में झगड़ा हो गया और मजे की बात ये कि उनका समझौता कल्लू भिखारी की झुग्गी में हो रहा था’।
जहां कुछ लोग ट्रम्प को कोस रहे हैं वही ऐसे लोगों की कमी नही है जो मुस्लिम देशों की तुलना में अमेरिका की दादागिरी को अच्छा बता रहे हैं।
वीभत्स और खूनी कानून लागू है इन देशों में। आमधारणा है कि जुल्म के पैरोकार मुस्लिम देशों से दुनिया को सिवाय बरबादी और नरक के कुछ हासिल नहीं होगा।
इसलिये ट्रम्प की दादागिरी ही अच्छी है।
हे खेड़ा
हेमंता को क्यांे छेड़ा
हो गया न
फिजूल में बखेड़ा
किसे पता था कि राहुल गांधी की चिरौरी करने के चक्कर में पवन चकरघिन्नी बन जाएंगे और राहुल गांधी जिनको इस वक्त अपनी खाल बचाना मुश्किल पड़ रहा है, उनसे छिटकते नजर आएंगे। खेड़ा के बखेड़े से खेड़ा की राज्य सभा का लाॅलिपाॅप तो गया ही आजादी के लाले अलग से पड़ रहे हैं।

क्योंकि हेमन्ता विश्वशर्मा खेड़ा को जेल से कम किसी कीमत में नहीं देखना चाहते।
कांग्रेस के बयानबाज नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार पवन खेड़ा के लिये कह दिया था कि वे राहुल गांधी की कठपुतली हैं। बात तो ठीक है पर भैया कांग्रेस में कौन ऐसा है जो कठपुतली नहीं है। हर किसी को जिसे कांग्रेस में रहना है राहुल के इशारे पर नाचना होगा।
विश्वशर्मा ने विरोध किया तो बाहर होना पड़ा और अब वे ही पूरी कांग्रेस के गले की हड्डी बन गये।
वरूण गांधी
अच्छे दिन आने वाले हैं

क्रांतिकारी उधमसिंग ने उस अंग्रेज को लंदन जाकर गोली मार दी थी जिसने लाला लाजपत राय पर लाठीयां बरसाईं थीं जिनसे उनका निधन हो गया था। उधमसिंग का खून तब खौल गया था जब बसंती देवी ने कहा था कि ‘क्या हमारा खून इतना ठण्डा पड़ गया है कि लालाजी पे पड़ी लाठी के बाद भी गरम नहीं होता…. ’

बसंती देवी के पति चितरंजन दास ने अलीगढ़ हथियार काण्ड में क्रांतिकारियों के लिये केस लड़ा था। इन दोनों महान शख्सियतों की पोती हैं यामिनी दास। ये यामिनी दास राहुल गांधी के कज़न यानि चचेरे भाई वरूण गांधी की पत्नी हैं।

यदि आपको याद हो तो वरूण गांधी इंसानों का जीना हराम कर देने वाले आवारा कुत्तों के प्रति भरपूर प्रेम रखने वाली भाजपा की वरिष्ठ नेत्री मेनका गांधी के पुत्र हैं।
कुत्तों को संरक्षण देकर आम आदमी को नुचवाने की व्यवस्था करने वाली ये मेनका गांधी इंदिरा गांधी के दूसरे पुत्र स्व. संजय गांधी की पत्नी हैं जिन्हें इंदिरा गांधी ने घर से निकाल दिया था। बाद में वे भाजपा में शामिल होकर मंत्री बनीं थीं।

तो वरूण गांधी इतने बड़े बैकग्राउण्ड के युवा नेता हैं। राहुल गांधी के मुकाबले में खड़े होकर भाजपा के नेता और सांसद बन गये।
समय बदला तो पीलीभीत से उनका टिकट कट गया। नयी भाजपा तो कड़े फैसले लेने के लिये प्रसिद्ध है। टिकट कटा तो वरूण गांधी शत्रुहन सिन्हा की तरह बौखलाए। बयान बाजी की, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ बोले। बोले तो दिल खोलकर शत्रुहन भी और बोलते हुए बहुत आगे तक निकल गये, फिर लौट न सके।
इधर वरूण को कांग्रेस हाथों हाथ ले लेगी ऐसे कयास लगाए जाने लगे।
दूसरी ओर शायद कांग्रेसी सर्वेसर्वा राहुल गांधी ने सोचा होगा कि वरूण गांधी के आने से उनके लिये चैलंेज खड़ा हो जाएगा, एक तो वे पहले ही बहन प्रियंका को रास्ते का कांटा मानकर चल रहे हैं। कदाचित् यही कारण है कि वरूण के लिये कांग्रेस का दरवाजा नहीं खुला।
मजबूरन वरूण लौटकर फिर से भाजपा के प्रति वफादारी के रास्ते पर चल पड़े। वरूण ने पिछले दिनों मोदीजी को पितातुल्य बता दिया और मोदीजी से परिवार सहित मिले यानि मामला फिट करने के प्रयास जारी हैं।
जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700







