
पीनी पड़ी दारू बंबई से आया मेरा दोस्त, दोस्त को सलाम करो, रात को खाओ-पियो दिन को आराम करो’ बेहतरीन और स्मार्ट कलाकार विनोद खन्ना की फिल्म का ये गाना था जिसमें सारे दोस्त, दोस्त के आने पर खाते और दोस्त के सत्कार मे ‘पीते’ हैं।
छातासरई प्राथमिक शाला विकासखण्ड लैलूंगा के शिक्षक कुष्टोराम भोय ने स्कूल जाने के पहले थोड़ी ले ली, रायफल ली या पिस्टल ली ये पता नहीं चला। घबराईये नहीं रायफल या पिस्टल बारूद वाले नहीं हैं ये अल्कोहल वाले हैं। यानि ये बाॅटल के नाम हैं, शराब के नाम हैं।
विकासखण्ड का नाम ही है ‘लै’लूंगा, तो लेना तो बनता है सो ले ली। पर जलनखोरों को रास नहीं आया। अकेले ली न। साथ में लेते तो हजम कर लेते। हल्ला-गुल्ला मच गया।
शिक्षक घबराया कि ‘लेेने’ पर ‘लेने के देने’ न पड़ जाएं। लिहाजा तत्काल साॅरी बोला…. ‘आईंदा ऐसा नहीं होगा’। अभी भी मजबूरी थी घर में मेहमान आए थे न। इसलिये थोड़ी सी ले ली’।
दिन-दहाड़े। अतिथि देवो भव की परम्परा रही है न। कैसे करता बेचारा… बंबई से आया मेरा दोस्त.…

ये पता नहीं चल पाया है कि शिक्षक पर कोई कार्यवाही हुई या नहीं। उसे निलंबित किया गया या फिर पीने के जुर्म में सजा से बचने के लिये उसने सीनियर को भी पिलाकर मामला सैट कर लिया।
अपने यहां तो ऐसा ही होता है भैया। कठिन से कठिन काम टेबल पर बोतल से हो जाता है।
जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700 IMNB NEWS AGENCY
रायफल और पिस्टल
पियो तो जानो
छग स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन ने रायपुर और शराब दुकानों में टाॅरगेट पूरा न होने के कारण दुकान कर्मचारियों पर जुर्माना किया है। जिन दुकानों में पिस्टल और रायफल नहीं बिकी उन्हें जुर्माना। उनके पिस्टल और रायफल नाम हैं शराब के। दादा रे… हमारे अहिंसक प्रदेश में ये कैसे हिंसक नाम रख दिये गये हैं।
हो सकता है नये ब्राण्ड आने पर कट्टा, कारतूस, तोप का गोला जैसे नाम रखने पड़ें। नगर में बढ़ते नशेड़ी-अपराधी रामपुरी, कटार और दोधारी जैसे नामों की मांग न करने लगें। धुरंधर मूवी में रिवाॅल्वर को अलविदा नाम दिया गया। रहमान डकैत अपने भाई उबेर से कहता है इसे एक अलविदा दे तो उबेर हमजा को एक रिवाॅल्वर देता है।
शायद इस चीज से इंसान को दुनिया से अलविदा कराया जाता है इसलिये।
लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी उमर द्वारा बार-बार अपना ठिकाना बदलते रहने के कारण उसे खरगोश का नाम दिया गया था। इस खरगोश ने बाद में नाम बदलकर सज्जाद कर लिया और फर्जी कागजात् बनवा कर देश से भाग निकला।
इंसान का नाम ‘खरगोश’, बड़ा ही अटपटा है। ऐसे ही अटपटे नामों को बदलने के लिये राजस्थान के शिक्षा विभाग ने सार्थक नाम अभियान के तहत बच्चों के अटपटे नामों को बदलने का अभियान चलाया। हालांकि ये बाद में बंद करना पड़ा और फिलहाल स्थगित है।

मै चाहे ये करूं
मैं चाहे वो करूं… मेरी मर… जी
मैं चाहे ये करूं मैं चाहे वो करूं मेरी मर…जी। किसी को मारूं चाहे किसी को बचाउं, दुनियां को अपनी उंगली पे नचाउं, मेरी मर…जी।
ईरान ने इसमें जोड़ दिया औंधे मुंह पलट के गिरूं और मुंह की खाउं ….. तेरी… मर्जी।
ये पता नहीं कितना सच है कि अमेरिका सारे बड़े-बड़़े देशों के और असीम संभावनाओं के देशों के उभरते काबिल नेताओं को जब वे ‘लो प्रोफाईल’ होते हैं तभी से अपने यहां अतिथि के रूप में आमंत्रित करता रहता है और फिर उन्हें पटा लेता है।
फिर बाद में जब वे अपने ही देश में हाई-फाई हो जाते हैं, पावर में आ जाते हैं तो अपने संबंधों के दम पर उनसे मनचाहा काम कराता है। ऐसा हो भी सकता है भैया, नहीं भी हो सकता। कोई कन्फर्म नहीं है।
वैसे अपने यहां हिंदी फिल्मों में तो ऐसा ही दिखाते हैं। अखबारों में रोजाना ऐसे ही ब्लैकमेलिंग की खबरें भी छपती हैं। हालांकि हम कोई दावा नहीं करते।
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक


