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लखपति दीदी विद्या साहू ने आत्मनिर्भरता की गढ़ी नई पहचान

*बेकरी-नमकीन व्यवसाय से संवार रही परिवार का भविष्य*

 

रायपुर, 09 जून 2026 (IMNB NEWS AGENCY) बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के ग्राम सिंगनपुर की रहने वाली विद्या साहू आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर उन्होंने अपने सपनों को नई उड़ान दी और मेहनत, लगन तथा आत्मविश्वास के बल पर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है।

 

*स्वरोजगार से मिली पहचान*

कभी सीमित संसाधनों में परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाली विद्या ने स्वरोजगार के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। उन्होंने बेकरी एवं नमकीन निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। शुरुआत छोटे स्तर पर हुई, लेकिन उनके उत्पादों की गुणवत्ता, स्वाद और मेहनत ने जल्द ही स्थानीय बाजार में उन्हें विशेष पहचान दिला दी। आज उनके द्वारा तैयार किए गए बेकरी एवं नमकीन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और वे आसपास के दुकानदारों तथा व्यवसायियों को नियमित रूप से उत्पादों की आपूर्ति कर रही हैं।

 

*उन्नत कृषि तकनीकों से बढ़ी आय*

व्यवसाय के साथ-साथ विद्या सिलाई-कढ़ाई का कार्य भी करती हैं, जिससे उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हुए हैं। उनके पति श्री प्रतीक साहू भी इस सफलता यात्रा में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। खेती-किसानी से जुड़े प्रतीक अपनी दो एकड़ कृषि भूमि पर उन्नत कृषि तकनीकों का उपयोग कर परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

 

*मेहनत की कमाई से विद्या ने ली एक स्कूटी*

विद्या साहू बताती हैं कि बेकरी एवं अन्य कार्यों से उन्हें प्रतिमाह लगभग 12 से 15 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। इस आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। वे अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही हैं तथा उनकी बेहतर परवरिश और भविष्य के लिए निवेश कर रही हैं। अपनी मेहनत की कमाई से विद्या ने आभूषण और एक स्कूटी भी खरीदी है। स्कूटी मिलने से उनके व्यवसायिक कार्यों में सुविधा बढ़ी है और आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है। आज उनका परिवार पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर, सशक्त और खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहा है।

 

*ग्रामीण महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा*

विद्या साहू की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की वाहक भी बन सकती हैं। उनकी उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महिला शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।

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