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परमाणु कार्यक्रम पर भी बनेगा निगरानी तंत्र डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा. उनके मुताबिक, इससे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जा सकेगा और उसके परमाणु कार्यक्रम पर अधिक प्रभावी निगरानी स्थापित होगी. ट्रंप ने कहा कि समझौते के तहत निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और ईरान के परमाणु सामग्री प्रबंधन तथा निपटान से जुड़े प्रावधान भी शामिल होंगे. फरवरी से शुरू हुआ था संघर्ष यह संभावित समझौता उस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी. उस दौरान अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया था. अब यदि 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो इसे पश्चिम एशिया में हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में गिना जा सकता है.

Oil Prices US Iran Peace Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के बाद रविवार को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली. निवेशकों ने इसे आपूर्ति संकट कम होने के संकेत के रूप में लिया, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई. ट्रंप ने ईरान पर लगाई गई अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की भी की घोषणा की. इसकी वजह से ब्रेंट क्रूड का भाव रविवार को करीब 3.9 प्रतिशत गिरकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत में 4.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.

यह 4 मार्च के बाद कच्चे तेल का सबसे निचला स्तर होगा. 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत के बाद से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल तक चले गए थे. हालांकि मौजूदा गिरावट के बावजूद तेल की कीमतें अभी भी युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर से काफी ऊपर हैं. फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले शुरू होने से पहले कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा था.

युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया भर के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस का कारोबार होता था. इस संकरे समुद्री मार्ग पर नाकेबंदी की वजह से दुनिया भर में तेल संकट गहरा गया था. लेकिन अब ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के बाद दुनिया राहत की सांस ले सकती है. हालांकि, शुक्रवार आने में अभी चार दिन हैं.

भारत में घटेंगी की तेल की कीमतें!

भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम इस समय लगभग हर राज्य में करीब 100 रुपये प्रति लीटर हैं. ऐसे में जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की डील फाइनल हो गई है, तो इस गिरे हुए तेल के रेट का फायदा भारत को भी मिलेगा, क्योंकि भारत का तेल बाजार अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूरी तरह से जुड़ा हुआ है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

ट्रंप और ईरान दोनों ने दी समझौते की पुष्टि

रविवार देर शाम डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरी तरह तैयार हो चुका है. उन्होंने लिखा, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है. सभी को बधाई. दुनिया के जहाज अपने इंजन शुरू करें. तेल का प्रवाह जारी रहने दें.’

इसके कुछ समय बाद ईरान ने भी पुष्टि की कि अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दे दिया गया है. तेहरान ने बताया कि इस दस्तावेज पर शुक्रवार को साइन किया जा सकता है. पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने बताया कि 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है. अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से यह संकेत भी दिया गया कि ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी हटाई जाएगी.

समझौते की उम्मीद ने पहले ही कम कर दिए थे दाम

बाजार में पिछले कुछ दिनों से इस बात की उम्मीद बन रही थी कि इस वीकेंड तक अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते का प्रारूप तैयार हो सकता है. इसी कारण शुक्रवार को तेल पहली बार युद्ध के शुरुआती सप्ताह के बाद 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बंद हुआ था.

राहत के बावजूद सामान्य नहीं हुआ है तेल बाजार

बाजार ने समझौते की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत जरूर किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आपूर्ति को पूरी तरह सामान्य होने में अभी लंबा समय लग सकता है. सबसे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाना होगा. इसके बाद जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल करनी होगी. साथ ही मध्य पूर्व के कई तेल उत्पादन केंद्रों को दोबारा चालू करना पड़ेगा, रणनीतिक तेल भंडारों को फिर भरना होगा और युद्ध में क्षतिग्रस्त ऊर्जा ढांचे की मरम्मत भी करनी होगी.

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के बाद भी लगेगा समय

युद्ध के दौरान मध्य पूर्व के कई तेल कुओं का उत्पादन बंद कर दिया गया था. इन्हें दोबारा पूरी क्षमता तक पहुंचाने में कई सप्ताह लग सकते हैं. कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कई कुएं युद्ध से पहले के उत्पादन स्तर तक शायद जल्द नहीं पहुंच पाएं.

ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि शुरुआती गिरावट के बाद तेल की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है. जैसे-जैसे मांग बढ़ेगी और देशों को अपने आपातकालीन भंडार दोबारा भरने होंगे, कीमतों पर फिर दबाव बन सकता है

विशेषज्ञों ने भविष्य को लेकर जताई चिंता

रैपिडन एनर्जी के अध्यक्ष बॉब मैकनैली ने एबीसी न्यूज के कार्यक्रम ‘दिस वीक’ में कहा, ‘मुझे गंभीर चिंता है कि गर्मियों के आखिर तक तेल की कीमतों में फिर जबरदस्त उछाल आ सकता है. कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर के मध्य या उससे ऊपर तक जा सकता है और पेट्रोल की कीमतें फिर रिकॉर्ड स्तर के करीब 5 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच सकती हैं.’ उन्होंने कहा कि यदि आपूर्ति में व्यवधान लंबा खिंचता है और अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जैसे सुरक्षा कवच कमजोर पड़ जाते हैं, तो बाजार में नई उथल-पुथल देखने को मिल सकती है.

विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान समझौते पर तय समय के अनुसार हस्ताक्षर हो जाते हैं और समुद्री व्यापार मार्ग सामान्य रूप से खुल जाते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है. हालांकि आपूर्ति शृंखला को पूरी तरह सामान्य होने में अभी कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है.

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