ईरान ने भी समझौते की पुष्टि की
प्रेस टीवी के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की कि समझौते का मसौदा अंतिम रूप देकर दोनों पक्षों ने उस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. उन्होंने बताया कि इस विषय पर ओमान और अन्य देशों के साथ काफी समय से परामर्श चल रहा था तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन से जुड़े अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी थी. बघाई ने कहा कि समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी, लेकिन इसके साथ ही ‘होर्मुज जलडमरूमध्य पर इस्लामी गणराज्य ईरान की संप्रभुता और अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे.’
14 सूत्रीय समझौते में क्या-क्या शामिल है?
1. सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की प्रतिबद्धता
अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों ने तत्काल प्रभाव से सभी सैन्य अभियानों को समाप्त करने और भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध या सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं करने का संकल्प लिया है. इसमें लेबनान से जुड़े संघर्ष भी शामिल हैं. साथ ही लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर सहमति बनी है.
2. एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान
दोनों देश एक-दूसरे की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की नीति अपनाएंगे.
3. 60 दिनों में अंतिम समझौते का लक्ष्य
अमेरिका और ईरान ने अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता तैयार करने पर सहमति जताई है. जरूरत पड़ने पर यह अवधि आपसी सहमति से बढ़ाई जा सकती है.
4. अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटेगी
एमओयू पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकेबंदी और अन्य बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा. 30 दिनों के भीतर इसे पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है.
5. होर्मुज जलडमरूमध्य से मुफ्त और सुरक्षित आवाजाही
ईरान 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों को मुफ्त और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा. तकनीकी और सैन्य बाधाओं को हटाने तथा समुद्री बारूदी सुरंगों की सफाई के बाद 30 दिनों में यातायात सामान्य स्तर पर पहुंचाने की योजना है.
6. ईरान के लिए 300 अरब डॉलर की आर्थिक योजना
अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर कम से कम 300 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास योजना तैयार करेगा. इसकी कार्यप्रणाली अंतिम समझौते में तय होगी.
7. प्रतिबंध हटाने का रोडमैप
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, आईएईए बोर्ड और अपने सभी प्राथमिक एवं द्वितीयक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है.
8. परमाणु कार्यक्रम पर समझौता
ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा. दोनों देश संवर्धित परमाणु सामग्री के निपटारे, यूरेनियम संवर्धन और अन्य परमाणु जरूरतों पर अंतिम समझौते के तहत विस्तृत चर्चा करेंगे.
9. वार्ता के दौरान यथास्थिति बनी रहेगी
अंतिम समझौते तक ईरान अपने मौजूदा परमाणु कार्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा. वहीं अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा और क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल भी नहीं भेजेगा.
10. तेल निर्यात को तत्काल राहत
एमओयू लागू होते ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे जुड़ी बैंकिंग, बीमा तथा परिवहन सेवाओं के लिए विशेष छूट जारी करेगा.
11. जमे हुए ईरानी फंड जारी होंगे
अमेरिका ईरान की फ्रीज या प्रतिबंधित संपत्तियों और धनराशि को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने पर सहमत हुआ है. इसके लिए आवश्यक लाइसेंस और मंजूरियां भी दी जाएंगी.
12. निगरानी तंत्र बनेगा
समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य में अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा.
13. अंतिम समझौते पर औपचारिक वार्ता शुरू होगी
एमओयू के शुरुआती प्रावधानों के लागू होने के बाद दोनों देश शेष बिंदुओं पर अंतिम समझौते के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करेंगे.
14. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी
अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए वैधता प्रदान की जाएगी.
नोट- ये सभी बिंदु अमेरिका की ओर से जारी किए गए हैं. कमोवेश ईरान ने भी इसी तरह के बिंदुओं पर ही सहमति जताई थी. हालांकि, ईरान की ओर से पूरा टेक्स्ट अभी सामने नहीं आया है.
परमाणु हथियार नहीं बनाने की दोहराई प्रतिबद्धता
प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने समझौते में एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा. साथ ही, ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में आगे चर्चा करने पर भी सहमति बनी है.
पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा मोड़
अगर यह समझौता तय शर्तों के अनुसार लागू होता है तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त होगा, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाले वैश्विक ऊर्जा व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की भू-राजनीति पर भी बड़ा सकारात्मक असर पड़ेगा.